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चिप को लेकर टिम कुक का दर्द:आखिर चिप की कमी से एपल क्यों परेशान, क्यों दुनियाभर की दिग्गज कंपनियां चिप के लिए ताइवान पर हैं निर्भर; जानें चिप के बारे में सबकुछ

नई दिल्ली2 महीने पहले
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चिप की सप्लाई में कमी की वजह से मैक और आईपैड की बिक्री कम हुई। ये कहना है एपल के CEO टिम कुक का। कहने को अप्रैल-जून 2021 की तिमाही के दौरान कंपनी का रेवेन्यू करीब 6 लाख करोड़ रुपए रहा। सालाना आधार पर उसे 36% की ग्रोथ भी मिली। मैक से रेवेन्यू करीब 61 हजार करोड़ रुपए और आईपैड से रेवेन्यू करीब 54 हजार करोड़ रुपए रहा। इतनी जबरदस्त कमाई करने वाली एपल को सितंबर तिमाही के लिए चिप की कमी का डर अभी से सताने लगा है।

एपल कंप्यूटर चिप या सेमीकंडक्टर से संबंधित सप्लाई में आने वाली बाधाओं को देख रही है। इससे सितंबर तिमाही में आईफोन और आईपैड की बिक्री पर बड़ा असर देखने को मिल सकता है। वैसे, एपल ही नहीं, दुनिया की सभी टेक और ऑटोमोबाइल कंपनियां चिप की कमी से जूझ रही हैं।

ऐसे में सवाल ये उठता है कि एपल जैसी कंपनी को आखिर छोटी सी चिप का डर क्यों सता रहा है? आखिर चिप की सप्लाई अब तक दुरुस्त क्यों नहीं हो पाई है? इसकी कमी से किन कंपनियों को नुकसान उठाना पड़ रहा है? पहली बार चिप का इस्तेमाल कब हुआ?ताइवान के ऊपर ही दुनियाभर की कंपनियां निर्भर क्यों हैं? इन तमाम सवालों के जवाब हम एक-एक करके बताएंगे, लेकिन शुरुआत करते हैं चिप बनाने वाली कंपनियों से...

कौन-कौन सी कंपनियां चिप बना रहीं?
वैसे तो दुनियाभर में चिप बनाने वाली कई कंपनियां हैं, लेकिन चिप के ओवरऑल प्रोडक्शन में सबसे ज्यादा हिस्सेदारी ताइवान सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कंपनी (TSMC) का है। बीते साल इस कंपनी ने अकेले ही दुनियाभर में 54 फीसदी चिप की सप्लाई की थी। ताइवान की ही यूनाइटेड माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक कॉर्पोरेशन (UMC) चिप का प्रोडक्शन करने वाली दूसरी बड़ी कंपनी है। इसके अलावा सैमसंग, इंटेल, SK हाइनिक्स, माइक्रोन टेक्नोलॉजी, क्वालकॉम, ब्रॉडकॉम, तोशिबा, एनवीडिया, टेक्सस इंस्ट्रुमेंट्स जैसी कंपनियां भी चिप का निर्माण करती हैं।

क्या है सेमीकंडक्टर?
ये आमतौर पर सिलिकॉन चिप्स होते हैं। इनका इस्तेमाल कंप्यूटर, सेलफोन, गैजेट्स, व्हीकल और माइक्रोवेव ओवन तक जैसे कई प्रोडक्ट्स में होता है। ये किसी प्रोडक्ट की कंट्रोलिंग और मेमोरी फंक्शन को ऑपरेट करते हैं। वर्क फ्रॉम होम और ऑनलाइन स्टडी की वजह से डेस्कटॉप, लैपटॉप, मोबाइल, टैबलेट की मांग बढ़ी। तो फिट रहने के लिए लोगों ने फिटनेस बैंड भी खरीदे। वहीं, गेमिंग डिवाइस के साथ दूसरे गैजेट्स भी जमकर बिके।

पहली बार सेमीकंडक्टर का इस्तेमाल 1901 में हुआ
इटली के भौतिकशास्त्री एलेसेंड्रो वोल्टा ने 1782 में पहली बार सेमीकंडक्टिंग शब्द का इस्तेमाल किया था। हालांकि अमेरिकी भौतिकशास्त्री माइकल फैराडे 1833 में सेमीकंडक्टर प्रभाव का निरीक्षण करने वाले पहले व्यक्ति थे। फैराडे ने पाया कि सिल्वर सल्फाइड के विद्युत प्रतिरोध में तापमान में कमी आई है। 1874 में कार्ल ब्रौन ने पहले सेमीकंडक्टर डायोड प्रभाव की खोज की। 1901 में पहले सेमीकंडक्टर डिवाइस 'कैट व्हिस्कर्स' का पेटेंट कराया गया। इसका आविष्कार जगदीश चंद्र बोस ने किया था।

क्वालिटी के मामले में ताइवान के चिप बेहतर
बदलती तकनीक के साथ चिप के निर्माण में क्रांति आई। बीते साल TSMC और सैमसंग ने दुनियाभर में चिप की मांग को पूरा करने की कोशिश की। दोनों ने 5nm वाले चिप बनाए। 2022 तक इनकी 3nm चिप बनाने की योजना है। हालांकि क्वालिटी की वजह से ताइवान के चिप की डिमांड दुनियाभर में बढ़ी है। एपल भी TSMC के चिप का इस्तेमाल कर रही है।

दुनियाभर में ताइवान की 60% से ज्यादा हिस्सेदारी
2020 में दुनियाभर के सेमीकंडक्टर प्रोडक्शन में ताइवान की 63% हिस्सेदारी रही। वहीं, कोरियन कंपनी की 18%, चीन की 6% और अन्य की 13% हिस्सेदारी रही। इसमें भी TSMC की हिस्सेदारी 54% रही। TSMC करीब 550 बिलियन डॉलर (करीब 41 लाख करोड़) के मार्केट कैप के साथ दुनिया की 11वीं सबसे वैल्यूएबल कंपनी बन चुकी है।

सेमीकंडक्टर मिलने में दिक्कत क्यों आ रही है?
ताइवान में पिछले कुछ महीनों में कोविड के मामलों में अचानक तेजी आई है। जिसकी वजह से कंपनियों को अपने मैन्युफैक्चरिंग प्लांट बंद करने पड़े। वहीं, महामारी की वजह से इसकी सप्लाई चेन भी प्रभावित हुई। इसी वजह से चिप की किल्लत दुनियाभर में हो गई। पहले की तुलना में हालात सुधरे हैं, लेकिन अभी भी महामारी का असर बना हुआ है। यही वजह है दुनियाभर की टेक और ऑटो कंपनियां चिप की कमी के चलते परेशान हो रही हैं।

चिप की कमी का किन कंपनियों पर ज्यादा असर?
रॉयटर्स के मुताबिक, सेमीकंडक्टर की कमी 2022 में भी जारी रह सकती है। इसका असर स्मार्टफोन प्रोडक्शन के साथ इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटोमोबाइल कंपनियों पर हो रहा है। मारुति, टाटा, महिंद्रा जैसी देसी कंपनियों के साथ हुंडई, फोर्ड, वॉक्सवैगन, ऑडी, निसान जैसी कई कंपनियों का प्रोडक्शन प्रभावित हुआ है। सैमसंग और एपल जैसी कंपनियों के साथ दूसरी टेक कंपनियों का प्रोडक्शन भी चिप की कमी से प्रभावित हुआ है।

सस्कुहन्ना एनालिस्ट क्रिस रोलैंड ने कटिंग पावर मैनेजमेंट और एनालॉग चिप लीड टाइम्स का हवाला देते हुए कहा कि चिप की कमी से ऑटोमेकर्स को इस साल बिक्री में 110 बिलियन डॉलर (करीब 8 लाख करोड़ रुपए) का नुकसान होने की आशंका है।

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