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चार्जर टेक्नोलॉजी बदल रही है:मोबाइल चार्ज करने में लगने वाला 8 घंटे का समय, अब फास्ट चार्जिंग से महज 17 मिनट का हो गया; जानिए फास्ट चार्जिंग टेक्नोलॉजी काम कैसे करती है?

नई दिल्लीएक महीने पहले
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चीनी स्मार्टफोन कंपनी शाओमी ने बुधवार को अपनी 11T सीरीज के 2 स्मार्टफोन 11T और 11T प्रो लॉन्च किए हैं। पहली बार कंपनी ने अपने स्मार्टफोन सीरीज में 120 वॉट हाइपर चार्जर को लाया है। शाओमी 11T प्रो में 5000mAh की दमदार बैटरी भी दी गई है। ये बैटरी 120 वॉट के शाओमी हाइपर चार्जर को सपोर्ट करती है। कंपनी का दावा है कि शाओमी 11T प्रो महज 17 मिनट में ये 100% चार्ज हो जाएगी। चार्जर को सेफ्टी के लिए TUV सेफ चार्ज सिस्टम सर्टिफिकेट भी मिला है।

इसी को देखते हुए आज हम आपको बता रहे हैं कि कैसे स्मार्ट फोन के साथ उसके चार्जर और बैटरी में समय के साथ बदलाव हुआ और आज के दौर इस्तेमाल हो रही फास्ट चार्जिंग टेक्नोलॉजी कैसे काम करती है.......

1983 में सबसे पहले आए पहले पोर्टेबल फोन मोटोरोला डायना TAC 8000X की बैटरी 1 घंटे का टॉकटाइम मिलता था, जबकि चार्ज होने में करीब 8 घंटे का समय लगता था।

फास्ट चार्जिंग काम कैसे करता है?

  • जब आपका फोन चार्ज होता है तो उसमें पावर जनरेट हो रहा होता है, पावर यानी एम्पीयर और वोल्ट। पावर को ऐसे समझिए कि जैसे आप पाइप से पानी डाल रहे हैं तो पाइप में जितना फोर्स होगा वो वोल्टेज होगा, फ्लो रेट है जो जोर से आता है वो है एम्पीयर। यदि एम्पीयर और वोल्टेज को मिला दिया जाए तो पावर यानी वोल्ट बनता है। इस तरह एम्पीयर और वोल्टेज को मिलाकर वॉट बनता है। यही वॉट मोबाइल चार्जर पर होता है।
  • फास्ट चार्जिंग टेक्नोलॉजी पूरी तरीके से वोल्ट पर आधारित है हम साधारण चार्जिंग टेक्नोलॉजी की बात करें तो चार्जर में 5 वोल्ट से स्मार्टफोन चार्ज हो जाते हैं जबकि फास्ट चार्जिंग टेक्नोलॉजी में 5 वोल्ट की जगह पर इससे ज्यादा का वोल्ट जनरेट करके फोन चार्ज किया जाता है।
  • एडाप्टर जो कि वोल्ट को स्मार्ट फोन में भेजता है। फास्ट चार्जिंग के लिए एडाप्टर को इस तरीके से बनाया जाता है कि वह 5 वोल्ट की जगह पर ज्यादा वोल्टेज को स्मार्टफोन में भेजें। साथ ही स्मार्टफोन में भी फास्ट चार्जिंग टेक्नोलॉजी को लगाया जाता है जिससे कि वह 33 या इससे ज्यादा वॉट की स्पीड से बैटरी को चार्ज कर सके। फास्ट चार्जिंग के अंदर वोल्टेज को बढ़ाया जाता है और स्मार्टफोन इस प्रकार से बनाया जाता है कि वह बैटरी को ज्यादा वोल्टेज से चार्ज कर सके, जिससे की बैटरी जल्दी चार्ज हो सके।
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