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थिंक टैंक फाउंडेशन का अलर्ट:प्रधानमंत्री योजना लोन की फेक वेबसाइट लोगों की पर्सनल डिटेल जुटा रही, गलत इस्तेमाल होने का खतरा

नई दिल्ली16 दिन पहले
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  • यहां हैकर्स लोगों के आधार कार्ड, राशन कार्ड, पेन कार्ड की डिटेल हासिल कर रहे हैं
  • साइबरपीस फाउंडेशन ने ऑटोबोट इंफोसेक प्राइवेट लिमिटेड के साथ मामले की जांच की

दिल्ली स्थित थिंक टैंक साइबरपीस फाउंडेशन ने लोन लेने वाले लोगों को अलर्ट किया है। फाउंडेशन के मुताबिक, लोन लेने वाले लोगों को लुभाने के लिए 'प्रधानमंत्री योजना लोन' के नाम से एक फेक वेबसाइट बनाई गई है। इस वेबसाइट पर लोगों के साथ फ्रॉड हो रहा है। ये लोगों की पर्सनल डिटेल जुटाकर उसका गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। इसी नाम से ऐप भी बनाया गया था, जिसे अब गूगल प्ले स्टोर से हटा दिया गया है।

इस फेक वेबसाइट के जरिए हैकर्स लोगों के आधार कार्ड, राशन कार्ड, पेन कार्ड की डिटेल हासिल कर लेते हैं। बाद में इस डेटा का गलत इस्तेमाल किया जाता है। साइबरपीस फाउंडेशन ने ऑटोबोट इंफोसेक प्राइवेट लिमिटेड के साथ मिलकर इस मामले की जांच शुरू की है।

डॉट कॉम के नाम से बना है डोमन
रिपोर्ट में कहा गया है कि वेबसाइट के पास .com का एक डोमेन है। जबकि भारत सरकार से जुड़ी कोई भी वेबसाइट .gov.in या .nic.in पर होस्ट की जाती है। वेबसाइट पर कई ग्रामेटिकल गलतियां भी देखी गई हैं।

फाउंडेशन ने बताया कि वेबसाइट www.pradhanmantriyojanaloan[.]com पर्नसल जानकारी और बैंक खाते की डिटेल के लिए पूछता है। जब ग्राहक अपने पर्सनल डेटा की डिटेल दे देते हैं तब उसके पास एक थैंक यू का मैसेज भी आता है। इससे पहले इसी नाम का एंड्रॉइड ऐप भी लोगों से उनकी पर्सनल जानकारी जैसे एड्रेस प्रूफ और अन्य के बारे में पूछता था।

वेबसाइट इस तरह जुटा रही पर्सनल डिटेल
वेबसाइट पर मौजूद QR कोड को डिकोड करने के बाद फोनपे मर्चेंट UPI स्ट्रिंग प्राप्त किया गया। UPI ID के वेरिफिकेशन की कोशिश की गई, लेकिन इसे इनवैलिड माना गया। जब वेबसाइट पर डिटेल देने के बाद आगे गए तब नया पेड ओपन हुआ। इसमें मोबाइल नंबर का ओटीपी मांगा जाता है। प्रोसेस पूरी होने के बाद 10 अंकों वाली रीसिप्ट भी दी जाती है।

गूगल ने 100 इंस्टेंट लोन ऐप्स हटाए
गूगल ने अब तक भारत में प्ले स्टोर से लगभग 100 इंस्टेंट लोन ऐप्स को हटा दिया है। सरकार की तरफ से संसद में बताया गया कि ये ऐप्स नियमों का पालन नहीं कर रहे थे। यूजर्स और सरकारी एजेंसियों ने इन ऐप्स को लेकर चिंता जताई थी। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को इंस्टेंट लोन के नाम पर धोखाधड़ी को लेकर कई शिकायतें मिली थीं।

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