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भास्कर एक्सक्लूसिव:मार्च तक सेमीकंडक्टर की दिक्कतें खत्म होंगी, कार डिलीवरी टाइम पर होगी; ऑटो सेक्टर में 9 लाख नौकरी आएंगी

नई दिल्ली9 महीने पहलेलेखक: नरेंद्र जिझोतिया
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कार डीलर्स के सामने इन दिनों सबसे बड़ी चुनौती कार डिलीवरी की है। डीलर्स को बुकिंग मिल रही हैं, लेकिन वे टाइम पर डिलीवरी नहीं दे पा रहे। साथ ही, ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के सामने चिप की कमी, गाड़ियों की मांग में सुस्ती, फिर से लॉकडाउन जैसे कई चैलेंज भी खड़े हैं। फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (FADA) के प्रेसिडेंट विंकेश गुलाटी ने बताया कि मार्च के बाद सेमीकंडक्टर की दिक्कतें दूर हो जाएंगी। इससे कार की डिलीवरी टाइम पर होगी। उन्होंने और क्या-क्या बताया, आइए जानते हैं...

सवाल: ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के लिए 2021 कैसा रहा?
जवाब: ओवरऑल एनालिसिस किया जाए तो 2021 अच्छा नहीं रहा। ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री को रूरल इंडिया का सपोर्ट हमेशा रहता है, लेकिन इस बार इनका साथ नहीं मिला। टू-व्हीलर्स की बिक्री के लिए सबसे मजबूत कड़ी रूरल इंडिया है, लेकिन पिछले 2 सालों से वो हिला हुआ है। इंडस्ट्री की ओवरऑल पोजीशन डाउन रही है। पैसेंजर व्हीकल में थोड़ा सपोर्ट जरूर मिला, लेकिन सेमीकंडक्टर की शॉर्टेज ने यहां भी हमें बैकफुट पर ही रखा। हमें बुकिंग तो बहुत मिलीं, लेकिन डिलिवरी में नाकाम रहे। गाड़ियां वेटिंग पीरियड पर हैं।

सवाल: ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री को 2022 से क्या उम्मीदें हैं?

जवाब: अभी के हिसाब से 2022 में भी परिस्थितियां ज्यादा नहीं बदलने वालीं। हमें बहुत पॉजिटिव उम्मीद नहीं है। टू-व्हीलर को खरीदने वाला सबसे बड़ा वर्ग रूरल इंडिया और लोअर मिडिल क्साल है। अभी इनकी तरफ से पॉजिटिव रिस्पॉन्स नहीं मिल रहा है। जब तक रूरल इंडिया, टियर-2 और टियर-3 शहरों से डिमांड नहीं आएगी स्थिति सामान्य नहीं होने वाली। सेमीकंडक्टर की वजह से कार का बाजार भी डाउन है। इसमें सुधार होगा, लेकिन मार्च तक इंतजार करना पड़ सकता है।

सवाल: फिर से लॉकडाउन की स्थिति बनी तो इसके लिए क्या तैयारी है?
जवाब: 2020 और 2021 की स्थितियां अलग-अलग थीं। 2020 में कोविड की शुरुआत हुई थी। लंबे समय के लिए लॉकडाउन देखना पड़ा था। लोग घर से बाहर नहीं निकल रहे थे। 2021 में परिस्थितियां थोड़ी अलग थीं और गाड़ियों की बिक्री में डिमांड देखने को मिली। उम्मीद है कि 2022 में पहले जैसी परिस्थितियां नहीं बनेंगी। यदि कम्प्लीट लॉकडाउन नहीं लगता है तब डिमांड और सेल्स चलती रहेगी। यदि आधे दिन के लिए भी शोरूम खुलते हैं और 50% स्टाफ आता है, तो चीजें एक फ्लो में चलती रहेंगी। वैसे भी सरकार ने कहा है कि ओमिक्रॉन से घबराने की जरूरत नहीं है।

सवाल: चिप की कमी ने इंडस्ट्री को कितना प्रभावित किया? क्या नए साल में भी ये कमी जारी रहेगी?
जवाब: चिप की प्रॉब्लम 2020 में शुरू हुई थी, जो 2021 में तेजी से बढ़ गई। ये 2022 में भी जारी रहेगी, लेकिन स्थित में सुधार होगा। 2021 खत्म होने तक इसकी स्थिति कंट्रोल में थी, लेकिन इसका मतलब ये बिल्कुल नहीं है कि चिप की समस्या खत्म हो जाएगी। फरवरी, मार्च तक इसकी सप्लाई में इम्प्रूवमेंट देखने को मिलेगा। अभी गाड़ियों की डिमांड में तेजी है। यदि सब कुछ सही रहा तो मार्च के बाद से चिप की समस्या खत्म हो जाएगी।

सवाल: चिप प्रोडक्शन के लिए सरकार 76 हजार करोड़ का निवेश करेगी। इसका फायदा कब तक मिलेगा?

जवाब: मोदी सरकार चिप का प्रोडक्शन भारत में शुरू करने वाली है, लेकिन इसमें अभी कई चैलेंजेस भी आएंगे। चिप से जुड़े प्रोजेक्ट शुरू करने से प्रोडक्शन में लाने तक 2 साल का वक्त लगता है। चिप का प्रोडक्शन शुरू होने के बाद भी ऐसा नहीं है कि कोई भी कंपनी इसे खरीदकर लगा देगी। अलग-अलग कंपनियों के लिए जो चिप तैयार होती हैं, वो भले ही दिखने में एक जैसी हों, लेकिन उसकी प्रोग्रामिंग एकदम अलग होती है।

जैसे, महिंद्रा के लिए कोई कंपनी चिप बना रही है और महिंद्रा उसे लेना बंद कर दे, तो वो मारुति, हुंडई या किसी दूसरी कंपनी की कार में इस्तेमाल नहीं होगी, क्योंकि वो महिंद्रा के पेटेंट के साथ तैयार की गई है। देश में चिप का प्रोडक्शन शुरू होने से दुनियाभर में चिप को लेकर जो शॉर्टज शुरू हुई है, वैसी स्थिति फिर से नहीं बनेगी।

सवाल: डीलर्स को बुकिंग तो मिल रही हैं, लेकिन वे डिलीवरी नहीं दे पा रहे। क्या ऐसे में ग्राहकों का विश्वास डीलर्स के प्रति कम हो रहा है?
जवाब: पिछले कुछ समय से चीजें डीलर्स के हाथ में नहीं हैं। उन्हें बुकिंग तो मिल रही हैं, लेकिन चिप की कमी के चलते कंपनी प्रोडक्शन नहीं कर पा रही है। यही वजह है कि कार की डिलीवरी भी समय पर नहीं मिल पा रही। जब ग्राहक को समय पर डिलीवरी नहीं मिलती तो उसका नाराज होना लाजमी है। अगर कस्टमर से रिश्ते शुरू में ही खराब हो जाएं तो वो भविष्य में भी उस डीलर के पास नहीं आना चाहता। डीलर्स की पब्लिसिटी भी खराब होती है। वैसे, ग्राहक इस बात को समझ रहा है कि इन दिनों चिप की वजह से डिलीवरी की दिक्कतें चल रही हैं।

सवाल: इस साल ऑटोमोबाइल सेक्टर में नई नौकरियों को लेकर क्या संभावनाएं हैं?

जवाब: ऑटोमोबाइल सेक्टर में इस साल बंपर नौकरियां निकलेंगी। फाडा से अभी 45 लाख कर्मचारी जुड़े हुए हैं। ये वो कर्मचारी हैं जिन्हें सैलरी दी जाती है। फाडा में ही 15 से 20% तक नौकरियां निकलेंगी। यानी, करीब 9 लाख नए रोजगार के अवसर बनेंगे। इस साल कार, टू-व्हीलर, थ्री-व्हीलर समेत दूसरे व्हीकल्स का प्रोडक्शन बढ़ने की उम्मीद है। ऐसे में सेल्स को बढ़ाने के लिए ज्यादा मैनपावर की जरूरत भी होगी। हालांकि, इस बात का भी ध्यान रखना है कि किसी को 4-6 महीने के बाद नौकरी से नहीं निकाला जाए।

सवाल: आप जिस फ्रेंचाइजी एक्ट को लाना चाहते थे, उसकी मौजूदा स्थिति क्या है?
जवाब: फोर्ड जैसी कंपनी के भारत छोड़ने से ग्राहकों को विश्वास टूटा है। ग्राहकों को इसका कितना नुकसान उठाना पड़ेगा, इसका पता आने वाले दिनों में ही चलेगा। कंपनियां जब देश छोड़ देती हैं तब ग्राहकों को परेशान होना ही पड़ता है। इससे सर्विस महंगी हो जाती है। पार्ट्स की उपलब्धता कम हो जाती है। लेटेस्ट अपग्रेडेशन नहीं हो पाते। रिकॉल आने की स्थिति में क्या होगा।

इन सभी बातों का ध्यान रखते हुए ही हम फ्रेंचाइजी एक्ट लाना चाहते हैं। फिलहाल फ्रेंचाइजी एक्ट लागू नहीं हुआ है। हालांकि, ये एक्ट मिनिस्ट्री ऑफ रोड ट्रांसपोर्ट एंड हाईवे में पहुंच चुका है। इस पर अभी वर्किंग चल रही है। हम इसे लागू करने की डिमांड बार-बार रख रहे हैं। इसे लागू करना सरकार के हाथ में है।

सवाल: 2022 में EV इंडस्ट्री को कितनी ग्रोथ मिलने वाली है?
जवाब: इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर की डिमांड बढ़ रही है। वहीं थ्री-व्हीलर 45% से ज्यादा इलेक्ट्रिक पर शिफ्ट हो चुका है। इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर का मार्केट अभी 2 से 2.5% ही है। हीरो और बजाज जैसी बड़ी कंपनियां भी अब इलेक्ट्रिक मॉडल लाने की तैयारी कर चुकी हैं। हालांकि, ई-व्हीकल सेल्स को रफ्तार पकड़ने में 2 साल का वक्त लग जाएगा। इसकी बड़ी वजह सेमीकंडक्टर की प्रॉब्लम के साथ बैटरी की कीमतों का बढ़ना है। बैटरी की कीमतें जब तक कम नहीं होतीं तब तक लोगों का इंटरेस्ट ई-व्हीकल पर कम रहेगा। इलेक्ट्रिक पैसेंजर व्हीकल की बेहतर बिक्री के लिए अभी इंतजार करना होगा।

सवाल: फ्यूल और इलेक्ट्रिक व्हीकल में क्या बेहतर ऑप्शन है? क्या EV खरीदने का सही समय आ चुका है?

जवाब: ये यूटिलिटी, यूज और लोकेशन पर डिपेंड करता है। यदि कोई ई-व्हीकल आपकी डेली रेंज को फुलफिल करता है तब उसकी तरफ जरूर जाना चाहिए। गाड़ी खरीदते वक्त ये भी देखना चाहिए कि फिलहाल 80 हजार में पेट्रोल बाइक मिल रही है, जबकि ई-बाइक खरीदने में 1.30 लाख रुपए खर्च करने पड़ रहे हैं। ऐसे में 50 हजार रुपए का अंदर बड़ा होता है। यदि EV खरीदने पर सब्सिडी का फायदा मिल रहा है, तब इसे लिया जा सकता है। आपके शहर में इलेक्ट्रिक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर कितना बेहतर है, इस बात का भी ध्यान रखें।