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टेलीकॉम कंपनियों को झटका:AGR मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एयरटेल, वोडाफोन की याचिका खारिज की; कंपनियां AGR बकाया पर पुनर्गणना चाहती थीं

नई दिल्ली2 महीने पहले
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सुप्रीम कोर्ट ने आज (शुक्रवार, 23 जुलाई) टेलीकॉम कंपनियों की एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) बकाया की पुनर्गणना की याचिका को खारिज कर दिया है। भारती एयरटेल, वोडाफोन आइडिया और टाटा टेलीसर्विसेज ने याचिका में दूरसंचार विभाग (DoT) द्वारा बकाया AGR की कैलकुलेशन में गलती का आरोप लगाया था। इस मामले की सुनवाई जस्टिस एल नागेश्वर राव और जस्टिस हृषिकेश रॉय की बेंच ने की।

दूरसंचार विभाग (DoT) की कैलकुलेशन के अनुसार, वोडाफोन-आइडिया पर कुल 58,254 करोड़ रुपए और भारती एयरटेल पर 43,980 करोड़ रुपए का AGR बकाया है। इन कंपनियों को AGR चुकाने के लिए 31 मार्च, 2031 तक का समय दिया गया है। बता दें कि कोर्ट फैसले के बाद वोडाफोन आइडिया का शेयर 8 प्रतिशत गिर कर 7.87 रुपए पर आ गया।

किस टेलीकॉम कंपनी पर कितना बकाया

  • वोडाफोन के अपने अनुमान में पहले बकाया राशि 21,533 करोड़ रुपए रखी थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उसे बकाया राशि का स्व-मूल्यांकन करने से रोक दिया। कोर्ट इस मामले में दूरसंचार विभाग द्वारा दावा की गई राशि के साथ चला गया था।
  • DoT ने अपनी कैलकुलेशनके अनुसार, 58,400 करोड़ रुपए का बकाया AGR मांगा है।
  • कुल राशि में से वोडाफोन ने 7,854 करोड़ रुपए का भुगतान किया है। उसे 31 मार्च, 2031 तक 10 समान किश्तों में 50,400 करोड़ रुपए का बकाया पेमेंट करना होगा।
  • टाटा टेलीसर्विसेज ने भी अपने बकाया की पुनर्गणना की मांग करते हुए कहा कि 4,197 करोड़ रुपए पहले ही AGR बकाया के तौर पर जमा किए जा चुके हैं।
  • भारती एयरटेल के स्व-मूल्यांकन करके कुल बकाया 13,004 करोड़ रुपए का अनुमान लगाया। हालांकि, वो पहले ही दूरसंचार विभाग द्वारा मांगे गए 44,000 करोड़ रुपए के कुल AGR बकाया में से 18,000 करोड़ रुपए से अधिक का पेमेंट कर चुका है।

टेलीकॉम कंपनियों ने बकाया राशि का आंकड़ा गलत बताया था

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल AGR से संबंधित बकाया के भुगतान करने के लिए टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स को 10 साल का समय दिया था। अपनी याचिका में टेलीकॉम कंपनियों ने टेलीकॉम विभाग (DoT) द्वारा मांगे गए AGR से संबंधित बकाया के आंकड़े में गणना में कथित त्रुटियों का मुद्दा उठाया है। हालांकि, सॉलिसिटर जनरल ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया है कि DoT ने त्रुटियों के सुधार की अनुमति देने के लिए कोई निर्देश साझा नहीं किया है और सुप्रीम कोर्ट ने भी पिछले तीन मौकों पर माना है कि AGR की मांग की पुनर्गणना नहीं की जा सकती है।