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लाइफ इंश्योरेंस /जीवन बीमा कंपनियां लागत घटाने के लिए शाखाओं में करेंगी कमी, कर्मचारियों की संख्या में भी हो सकती है कटौती

शुरुआती चरण में पॉलिसी की कम बिक्री करनेवाली शाखाओं पर कंपनियों की नजर होगी शुरुआती चरण में पॉलिसी की कम बिक्री करनेवाली शाखाओं पर कंपनियों की नजर होगी

  • इंटरनेट कनेक्टिविटी वाले बड़े शहरों की शाखाएं पहले बंद हो सकती हैं
  • पॉलिसी की ऑनलाइन बिक्री कुल प्रीमियम के 10 प्रतिशत से भी कम है

Moneybhaskar.com

May 21,2020 03:38:14 PM IST

मुंबई. सभी सेक्टर की कंपनियां कोविड-19 के प्रभाव का मुकाबला करने के लिए लागत में कटौती करने के लिए संघर्ष कर रही हैं। जीवन बीमा कंपनियां भी अब इसका पालन कर रही हैं। खबर है कि जीवन बीमा कंपनियां शाखाओं की संख्या कम कर लागत पर बचाने की जुगत कर रही हैं। साथ ही कर्मचारियों की संख्या में भी कटौती हो सकती है।

6 से 8 प्रतिशत शाखाएं बंद हो सकती हैं

बीमा उद्योग के सूत्रों के मुताबिक वित्त वर्ष 2022 के मध्य तक 11,600 शाखाओं में से लगभग 6 से 8 प्रतिशत शाखाओं को पैसे बचाने के लिए बंद किया जा सकता है। इंटरनेट कनेक्टिविटी वाले बड़े शहरों की शाखाएं पहले बंद हो सकती हैं। डिजिटल ने देश भर में, विशेष रूप से मेट्रो शहरों में व्यापक पैठ बनाई है। एक निजी जीवन बीमा कंपनी में एक अधिकारी ने कहा कि विचार यह है कि रियल एस्टेट में निवेश करने के बजाय इस ताकत का लाभ उठाया जाए।

बैंक और एजेंट सबसे बड़े वितरण चैनल हैं

वर्तमान में बैंक और एजेंट, जीवन बीमा कंपनियों के लिए दो सबसे बड़े वितरण चैनल हैं। ऑनलाइन बिक्री कुल प्रीमियम के 10 प्रतिशत से भी कम है। हालांकि, जब से कोविड-19 प्रसार को कम करने के लिए एक राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन शुरू हुआ है, जीवन बीमा कंपनियाँ अपने संचालन को ऑनलाइन या स्थानांतरित करने के लिए मजबूर हो गई हैं। ये बीमाकर्ता अब अपनी कंपनी की वेबसाइट, बैंक वेबसाइटों के साथ-साथ ग्राहकों के साथ वीडियो कॉल के जरिए भी पालिसी बेच रहे हैं।

मार्च में प्रीमियम कलेक्शन में 32.2 प्रतिशत की आई थी कमी

जीवन बीमा कंपनियों ने कोविड-19 के बीच मार्च 2020 में नए प्रीमियम संग्रह में 32.2 प्रतिशत साल दर साल (YoY) की कमी देखी गई, जो देश भर में लॉकडाउन के कारण 25,409.30 करोड़ रुपए तक हो गया। इसी तरह अप्रैल 2020 में, प्रथम वर्ष प्रीमियम कलेक्शन 32.6 प्रतिशत साल-दर-साल घटकर 6,727.74 करोड़ रुपए रह गया। चूंकि देश के ज्यादातर हिस्सों में अभी तक आमने-सामने की बिक्री फिर से शुरू नहीं हुई है, इसलिए उत्पाद की बिक्री में गिरावट देखने को मिली है।

बड़े शहरों में कमर्शियल रियल एस्टेट है महंगा

मुंबई, दिल्ली और बैंगलोर जैसे बड़े शहरों में कमर्शियल रियल एस्टेट की लागत अधिक रही है। उदाहरण के लिए दक्षिण मुंबई में 700 वर्ग फुट ऑफिस के लिए किराया 65,000 से 80,000 रुपए प्रति माह के बीच हो सकता है। इसमें बिजली और पानी का खर्च और हाउसकीपिंग करने वालों, कैंटीन स्टाफ को काम पर रखने जैसे अन्य प्रशासनिक लागतें हैं।ऐसे समय में जब व्यापार में हर महीने घाटा हो रहा है, बीमाकर्ता व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए कैश का संरक्षण करने की तलाश में हैं। शाखा वॉक-इन शून्य के करीब हैं और इसके बावजूद, मासिक किराये की लागत खर्च की जा रही है।

कई शहरों में ढेर सारी शाखाएं हैं

दरअसल कंपनियों को ऐसा लग रहा है कि कई शहरों में ढेर सारी शाखाएं हैं। वर्तमान माहौल में जिस तरह का बिजनेस है, ऐसे में इन शाखाओं को जारी रखकर इन पर खर्च करने का कोई अर्थ नहीं है। शाखाओं की संख्या में कटौती धीरे-धीरे होगी। जीवन बीमा उद्योग में अब कंपनियों की बिजनेस रणनीति में शाखाओं को कम करने और कर्मचारियों को इधर से उधर करने पर बनेगी। शुरुआती चरण में पॉलिसी की कम बिक्री करनेवाली शाखाओं पर कंपनियों की नजर होगी। उसके बाद शहर के आधार पर समीक्षा की जाएगी।

समीक्षा के बाद होगा बंद करने का फैसला

इस समीक्षा में हर शाखा के चलाने पर कितनी लागत आती है, वह देखा जाएगा। इसके बाद शाखाओं को बंद किया जा सकता है। हालांकि छोटे शहरों की शाखाओं, जहां इंटरनेट की कम कनेक्टिविटी है, वहां यह सुनिश्चित किया जाएगा कि ग्राहक के साथ कंपनी के प्रतिनिधि पॉलिसी बिक्री और दावों के निपटान के लिए बात करें। यदि यह तरीका कारगर हो जाता है तो फिर शाखा को बंद कर दिया जाएगा।

3 लाख कर्मचारी इस सेक्टर में करते हैं काम

एक अधिकारी ने कहा कि हर शाखाओ में 50-70 लोग काम करते हैं। उसमें से सभी को शिफ्ट नहीं किया जाएगा। हर शाखा में कुछ न कुछ लोगों को रखा जाएगा। लेकिन अगर एकदम ही शाखा में काम नहीं है तो उसे बंद किया जाएगा। जीवन बीमा कंपनी के सेक्टर में 3 लाख कर्मचारी हैं। यह सभी फूल टाइम कर्मचारी हैं। इसमें से अकेले 1.15 लाख से ज्यादा कर्मचारी एलआईसी में हैं।

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