निवेश उपकरण /आरबीआई के 7.75 फीसदी बांड में निवेश करने का सिर्फ आजभर है मौका, कल से बंद हो रहा है बेहतरीन रिटर्न देने वाला यह इंस्ट्रूमेंट

आरबीआई का यह बांड इसलिए आकर्षक है क्योंकि इसकी ब्याज दर समान सुरक्षा देने वाले वाले वाणिज्यक बैंकों के एफडी व अन्य वित्तीय संस्थानों के उपकरणों के मुकाबले ज्यादा है आरबीआई का यह बांड इसलिए आकर्षक है क्योंकि इसकी ब्याज दर समान सुरक्षा देने वाले वाले वाणिज्यक बैंकों के एफडी व अन्य वित्तीय संस्थानों के उपकरणों के मुकाबले ज्यादा है

  • 7.75 % सेविंग्स (टैक्सेबल) बांड्स, 2018 गुरुवार को बैंकिंग का समय बंद होने के बाद से निवेश करने के लिए उपलब्ध नहीं रहेगा
  • इस बांड में कोई भी व्यक्ति कम से कम 1,000 रुपए का निवेश कर सकता है, अधिकतम निवेश की कोई सीमा नहीं है

Moneybhaskar.com

May 28,2020 02:53:26 PM IST

नई दिल्ली. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने घोषणा की है कि 7.75 फीसदी सेविंग्स (टैक्सेबल) बांड्स, 2018 शुक्रवार 29 मई 2020 से निवेश के लिए उपलब्ध नहीं रहेगा। केंद्रीय बैंक ने एक बयान में कहा कि भारत सरकार ने 27 मई 2020 को एक नोटिफिकेशन के जरिये घोषणा की है कि 7.75 फीसदी सेविंग्स (टैक्सेबल) बांड्स, 2018 गुरुवार 28 मई 2020 को बैंकिंग का समय बंद होने के बाद से सब्सक्रिप्शन के लिए खुला नहीं रहेगा।

एसबीआई के मुकाबले 2.35 फीसदी ज्यादा ब्याज

इसलिए आप आरबीआई के 7.75 फीसदी बांड में सिर्फ आज ही बैंकिंग का समय खत्म होने से पहले निवेश कर सकते हैं। इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक आरबीआई का यह बांड इसलिए आकर्षक है क्योंकि अभी इसकी ब्याज दर समान सुरक्षा देने वाले वाले वाणिज्यक बैंकों के एफडी व अन्य वित्तीय संस्थानों के उपकरणों के मुकाबले ज्यादा है। उदाहरण के लिए एसबीआई 27 मई 2020 से एक साल के एफडी पर 5.1 फीसदी और 5 साल से ज्यादा के एफडी पर 5.4 फीसदी का ब्याज देता है। दूसरी ओर आरबीआई का यह टैक्सेबल बांड सालाना 7.75 फीसदी ब्याज देता है।

आरबीआई के बांड में 7 साल का लॉक-इन पीरियड

आरबीआई के बांड में 7 साल का लॉक-इन पीरियड होता है। सामान्य निवेशक 7 साल से पहले अपने निवेश को नहीं तोड़ सकते हैं। सिर्फ वरिष्ठ नागरिक ही 7 साल से पहले अपने निवेश को तोड़ सकते हैं। वरिष्ठ नागरिकों के लिए तीन प्रकार की छोटी लॉकइन अवधियां हैं।

1. 60-70 साल के वरिष्ठ नागरिकों के लिए लॉकइन अवधि 6 साल है।

2. 70-80 साल के वरिष्ठ नागरिकों के लिए लॉकइन अवधि 5 साल है।

3. 80 साल व इससे ऊपर के वरिष्ठ नागरिकों के लिए लॉकइन अवधि 4 साल है।

कम से कम 1,000 रुपए का किया जा सकता है निवेश

आरबीआई के टैक्सेबल बांड में कोई भी व्यक्ति निवेश कर सकता है। अधिकतम निवेश की कोई सीमा नहीं है। इस बांड में कम से कम 1,000 रुपए का निवेश किया जा सकता है।

7 साल बाद इकट्‌ठा या हर 6 माह पर ले सकते हैं ब्याज

इस बांड के निवेशक क्यूमुलेटिव या नॉन-क्युमुलेटिव दोनों तरीके से ब्याज हासिल करने का विकल्प चुन सकते हैं। क्युमुलेटिव विकल्प चुनने पर मैच्योरिटी अवधि के अंत में मूलधन व ब्याज इकट्‌ठा मिलेगा। ब्याज हर 6 महीने पर कंपाउंडेड होगा। यदि निवेशक नॉन क्युमुलेटिव विकल्प चुनता है, तो हर छह महीने पर ब्याज मिलेगा। आरबीआई 10 जनवरी 2018 से ये बांड जारी कर रहा था।

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आरबीआई का यह बांड इसलिए आकर्षक है क्योंकि इसकी ब्याज दर समान सुरक्षा देने वाले वाले वाणिज्यक बैंकों के एफडी व अन्य वित्तीय संस्थानों के उपकरणों के मुकाबले ज्यादा हैआरबीआई का यह बांड इसलिए आकर्षक है क्योंकि इसकी ब्याज दर समान सुरक्षा देने वाले वाले वाणिज्यक बैंकों के एफडी व अन्य वित्तीय संस्थानों के उपकरणों के मुकाबले ज्यादा है

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