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मनी मैनेजमेंट /कोरोना संकट में बेहतर कल के लिए आज से ही संभालनी होगी वित्तीय स्थिति, ताकि भविष्य में होने वाले नुकसान से निपटा जा सके

इस दौर में जितने कर्ज लेंगे, भविष्य में उतनी ही किस्तें चुकानी होंगी। ऐसे में भविष्य में बचत के बजाय खर्ज बढ़ेंगे। इस दौर में जितने कर्ज लेंगे, भविष्य में उतनी ही किस्तें चुकानी होंगी। ऐसे में भविष्य में बचत के बजाय खर्ज बढ़ेंगे।

  • भविष्य के लिए वित्तीय योजना बनाने के पहले मौजूदा स्थिति का आकलन करें
  • ज़्यादा वित्तीय परेशानी और चिंता ना बढ़े, इसके लिए निवेश के सही विकल्प चुनें

Moneybhaskar.com

May 17,2020 10:04:00 AM IST

नई दिल्ली. कोविड-19 हमारी सेहत के साथ-साथ वित्तीय स्थिति को भी प्रभावित कर रहा है। इस दौर में हमारे पैसे ख़र्च करने का तरीक़ा बदला है और क्षमता भी। आने वाले कल पर भी इसका कितना असर होगा कितना नहीं, ये हम नहीं जानते पर तैयारी पहले से रखनी होगी। बेहतर कल के लिए आज से ही वित्तीय स्थिति संभालनी होगी ताकि भविष्य में होने वाले नुक़सान और पैसों की तंगी से निपटा जा सके। ऐसा कर पाना मुश्किल नहीं है। इसके लिए समझदारी से पैसों का प्रबंधन, बेहतर वित्तीय नियोजन और अनुशासन की आवश्यकता है। डॉ.संजय मित्तल ,सीनियर बैंकर एंड मनी मैनेजर बता रहे हैं कि ऐसे में आपको क्या करना चाहिए।

मौजूदा स्थिति का आकलन

भविष्य के लिए वित्तीय योजना बनाने के पहले मौजूदा स्थिति का आकलन करें। आप कितना कमाते हैं और अपनी कमाई कहां- कहां खर्च करते हैं, इसका विश्लेषण करें। ऋण का भुगतान करने में कोई दिक़्क़त तो नहीं है। इसके बाद आपात स्थितियों के लिए पर्याप्त राशि है या नहीं, यह सुनिश्चित करें। मौजूदा बीमा योजनाओं का विश्लेषण करें और देखें कि किसी अप्रिय परिस्थिति के लिए आपके पास पर्याप्त बीमा राशि है या नहीं। इन सबसे आपको अपनी वित्तीय स्थिति का पता चलेगा। अगर कोई वित्तीय समस्या है, तो किन क्षेत्रों में ध्यान देने की आवश्यकता है ये इस विश्लेषण से पता चलेगा।

भविष्य के लिए निवेश

भविष्य में ज़्यादा वित्तीय परेशानी और चिंता ना बढ़े, इसके लिए निवेश के सही विकल्प चुनें। म्यूचुअल फंड में एसआईपी के ज़रिए निवेश कर सकते हैं। छोटी बचत योजनाएं जैसे पीपीएफ, पोस्ट ऑफिस बचत योजना आदि में वित्तीय ज़रूरतों के हिसाब से निवेश कर सकते हैं। ये योजनाएं शादी, शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल आदि के लिए पैसों की ज़रूरत को पूरा करती हैं। साथ ही टैक्स की बचत भी होती है। भविष्य में इन निवेशों का लाभ उठा सकते हैं।

कम करने होंगे ख़र्चे

सबसे पहले अपने ख़र्चों को नियंत्रित करें। अगर पिछले पचास दिनों का विश्लेषण करें, तो आपके ख़र्च स्वयं नियंत्रित हो गए हैं। आप आराम से अपनी ज़िंदगी गुज़ार रहे हैं। ना कहीं आने-जाने में ख़र्च हुआ है और ना बाहर खाने पर। इनके अलावा फ़िज़ूल की ख़रीदारी और ख़र्च भी बंद हैं। इनको इसी तरह आगे भी नियंत्रित रखना है। एक-दो साल तक यात्राएं ना करने और यथासम्भव बाहर भोजन ना करने की हिदायत दी गई है, इसके साथ ही कपड़ों, सजावटी वस्तुओं, नए उपकरणों को आज़माने की इच्छा पूर्ति आदि के लिए भी हाथ बांधकर चलना होगा। इन्हें जीवन का नियम बना लें और इनसे बचने वाले पैसों को सही जगह निवेश करें, ताकि भविष्य में इनका सही उपयोग किया जा सके।

नए कर्ज़ लेने से बचें

इस दौर में जितने क़र्ज़ लेंगे, भविष्य में उतनी ही क़िस्तंे चुकानी होंगी। ऐसे में भविष्य में बचत के बजाय ख़र्च बढ़ेंगे। इसके अलावा छोटी-बड़ी ज़रूरतों, जैसे मोबाइल फोन, कैमरा, लैपटॉप, ऑनलाइन शॉपिंग के लिए ईएमआई से भुगतान करने से बचें। अगर आप ईएमआई पर सामान ख़रीदते हैं, तो उस सामान की एमआरपी से ज़्यादा क़ीमत चुका रहे होते हैं। चाहे सामान्य ईएमआई पर सामान ख़रीदें या नो कॉस्ट ईएमआई पर, हर स्थिति में एमआरपी से ज़्यादा क़ीमत देनी पड़ती है। ख़रीदारी के दौरान इस तरह की छोटी-छोटी समझदारियां लाभ देंगी।

आदतों को बदलें

  • आमदनी के नए रास्ते खोजें: भविष्य में खर्चों को पूरा करने के लिए अपनी हॉबी को कमाई का जरिया बनाएं। अगर वित्तीय ज्ञान है तो सलाहकार बने या कोई कला है तो उसका उपयोग भी कर सकते हैं। इससे अपना शौकभी पूरा होगा और कमाई भी हो जाएगी।
  • क्रेडिट कार्ड का सही इस्तेमाल: अगर आपके पास क्रेडिट कार्ड है तो ऐसे समय में उसका कम से कम और सही इस्तेमाल करें। जिन क्रेडिट कार्ड की जरुरत नहीं उनको हटा दें। इससे गैरजरूरी चीजे न खरीदें।
  • खुद संभाले काम: इस दौर में हमने अपने घर का काम खुद करने की आदत डालनी चाहिए। जिन कामों का अभी तक आप मोल चुकाते थे, उन्हें अगर खुद कर सकते हैं तो करें और पैसे बचाएं। हर बचाया हुआ पैसा बचत ही है।
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इस दौर में जितने कर्ज लेंगे, भविष्य में उतनी ही किस्तें चुकानी होंगी। ऐसे में भविष्य में बचत के बजाय खर्ज बढ़ेंगे।इस दौर में जितने कर्ज लेंगे, भविष्य में उतनी ही किस्तें चुकानी होंगी। ऐसे में भविष्य में बचत के बजाय खर्ज बढ़ेंगे।

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