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एन. रघुरामन का कॉलम:धोखाधड़ी के मामले में, आपके दुश्मन का हथियार, आपका ही मोबाइल है, सावधान रहें!

2 महीने पहले
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एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु - Money Bhaskar
एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु

‘कैसे हो, पहचाना? कभी फ़ोन ही नही करते? इतना बिज़ी हो?’ अनजान नंबर से आए फ़ोन पर जब ऐसी आवाज़ आई तो मेरा पूर्व-सहकर्मी विनायक दुबे भ्रमित हो गया। जिसका फोन आया था, वो ऐसे बात कर रहा था, जैसे कोई करीबी हो। विनायक न पहचानकर, शर्मिंदा होना नहीं चाहता था, इसलिए ‘पहचान कौन’ का खेल जारी रखकर बोला, ‘क्या करें, काम बहुत है।’ लेकिन फिर हार मानकर पूछ ही लिया, ‘मैं पहचान नहीं पा रहा, आप कौन हैं?’

दूसरी तरफ से आवाज़ आई, ‘अरे जीजा जी हूं, गुड़िया का पति, पहचाना?’ अब विनायक और भ्रमित हो गया- कौनसी गुड़िया? उत्तर भारत में गुड़िया आम नाम है और विनायक के परिवार में भी 2-3 गुड़िया हैं। रिश्तेदारी के दबाव में, विनायक को यह पूछने में हिचक हुई कि कौनसी गुड़िया.. कहीं ‘जीजा जी’ नाराज़ न हो जाएं। उसने बात जारी रखी, ‘अच्छा-अच्छा, कहिए कैसे याद किया?’ अब ये नए पैदा हुए जीजा जी बोले, ‘एक काम था।

मेरा ‘फोन पे’ ऐप काम नहीं कर रहा है, मुझे एक लड़के से पैसे लेने हैं, तुम्हारे अकाउंट पर डलवा देता हूं, बाद में मुझे दे देना।’ विनायक ने कहा, ‘ठीक है।’ ‘जीजा जी’ बोले, ‘पहले ऐप खोलो और अपना बैलेंस बता दो, ताकि जब वो लड़का पैसे जमा करे तो हमें पता चल जाए कि उसने कितने पैसे डाले।’ अब विनायक की दिमाग की घंटी बजी, उसे लगा कि ये धोखाधड़ी हो सकती है। वह बोला, ‘जीजा जी फोन पे वाले खाते में तो 30-40 रुपए होंगे।’

बिना देर किए जीजाजी ने फोन काट दिया। जब विनायक से मैं यह कहानी सुन रहा था, तब राजस्थान में एक मल्टी-स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के रिसेप्शन पर खड़ा था। तभी ओपीडी इंचार्ज के पास एक फ़ोन आया। फोन करने वाले व्यक्ति ने खुद को भारतीय वायु सेना का अधिकारी बताया और कहा कि वह थल सेना में भर्ती हुए 27 नए सैनिकों का ब्लड टेस्ट करना चाहता है। उसने अपना नाम सतीश कुमार बताया और अपने आईकार्ड की फोटो भेजी।

इससे इंचार्ज को शक हुआ क्योंकि वायुसेना का अधिकारी, थल सेना का टेस्ट क्यों कराएगा और सेना का कोई भी व्यक्ति अपने आईकार्ड की कॉपी नहीं भेजता। फिर भी उसने टेस्ट के खर्च का हिसाब लगाकर भेज दिया। फोन करने वाले ने कहा, ‘मैं 20% पैसा अभी भेज देता हूं’ और फिर वही पुरानी चाल चली, ‘मैं 200 रुपए भेज रहा हूं, यह देखने के लिए कि पैसे पहुंच रहे या नहीं।

तुम अपना फोन पे ऐप खोलना और मैं एक नंबर दूंगा, उसे अपने मोबाइल में डालना तो बाकी पैसे भी मिल जाएंगे।’ फोन करने वाले ने 200 रुपए भेजे तो इंचार्ज ने फोन काट दिया क्योंकि उसने जो नंबर दिया था वो क्रेडिट कार्ड नंबर था। अब ये ठग ‘सतीश कुमार’ पिछले दो दिन से फ़ोन कर रहा है कि कम से कम मेरे 200 रुपए तो लौटा दो। जब मैं इस घटनाक्रम को देख रहा था, तभी पत्नी का फ़ोन आया।

उन्होंने बताया, ‘मुझे वॉट्सएप पर मैसेज आया है, आज राज 10.30 बजे बिजली कट जाएगी क्योंकि मैंने पिछले महीने का बिल नहीं भरा है।’ मैंने उन्हें तीन चीज़ें बताईं- आपका नंबर अडाणी पॉवर के पास रजिस्टर नहीं है, मेरा है। कोई भी वॉट्सएप पर बकाया बिल नहीं भेजता। और कोई भी बिजली कंपनी रात को 10.30 बजे आकर कनेक्शन नहीं काटती। मुझे बाद में पता चला कि भोपाल में भी हजारों उपभोक्ताओं को ऐसे फर्जी मैसेज आए हैं। इस तरह देश में ऑनलाइन फ्रॉड की कई कथाएं जारी हैं…

फंडा यह है कि वित्तीय धोखाधड़ी के मामले में, आपके दुश्मन का हथियार, आपका ही मोबाइल है। सावधान रहें!