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एन. रघुरामन का कॉलम:अगर वाकई काम के बोझ तले दबना नहीं चाहते, तो परेशानी आने से पहली ही कदम उठाएं

2 महीने पहले
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एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु - Money Bhaskar
एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु

‘आपने बहुत देर कर दी’, ‘हम कोशिश करेंगे, बाकी ऊपर वाले के हाथ में है’ ‘हमें डिस्टर्ब मत कीजिए, हमें काम करने देंगे या नहीं, जाकर बाहर बैठिए।’ ऐसे शब्दों की सूची अनंत है। ऐसे शब्द या तो अस्पताल में सुने होंगे या फिल्मों में दिखाए अस्पताल में। ऐसा नहीं है कि डॉक्टर्स के पास दिल नहीं होता। देश में चार हजार लोगों पर एक डॉक्टर हैं, पर हर कोई चाहता है कि उसके मरीज को पहले देखें।

ऐसे दबाव के बीच काम करने वाले डॉक्टर्स को मैं सैल्यूट करता हूं। पर ऐसे दृश्य इन दिनों पुलिस स्टेशन में दिखते हैं! वो इसलिए क्योंकि साइबर अपराध चरम पर हैं। ये उदाहरण देखें। पिछले महीने दो लोगों ने एक एप पर खुद को ट्रैवल एजेंट के रूप में जाली नंबर से रजिस्टर्ड किया। उन्होंने दिल्ली के एक प्रोफेसर को भारी डिस्काउंट का ऑफर दिया, उनकी फ्लाइट टिकट बुक की, टिकट्स वाट्सएप की और पैसे ले लिए।

फिर दोनों ने टिकट कैंसल कर दीं, डेढ़ लाख रु. रिफंड ले लिया और फिर फोन बंद कर दिया। बेंगलुरु के दो आईटी इंजीनियर ने भी इसी तरीके से छह लाख गंवाए। पिछले महीने रवि सिंह ने लखनऊ-मुंबई टिकट के 5600 रु. गंवाए। अखिल कुमार से हैदराबाद-विजयवाड़ा टिकट के लिए ठगी हुई। रुकें, सिर्फ ट्रैवल इंडस्ट्री में ऐसा नहीं हो रहा, क्योंकि ये तेजी से बढ़ रही है। साइबर अपराधों ने आम जिंदगी को भी प्रभावित किया है।

अगर आप ‘consumercomplaintscourt.com’ वेबसाइट पर जाएं, तो समझ आएगा कि देश में कैसी-कैसी ऑनलाइन ठगी हो रही है। इसलिए पुलिस, साइबर ठगी की राशि के आधार पर केस को प्राथमिकता दे रही है, बिल्कुल वैसे जैसे डॉक्टर्स सबसे गंभीर मरीज पहले देखते हैं। मुझे ये अहसास तब हुआ, जब मेरे फोन में मुंबई साइबर सेल के एक के बाद एक मैसेज आए कि ‘क्या आपको बिजली कटने का संदेश आया है? क्या बैंक खाता ब्लॉक होने का मैसेज आया है? ये फ्रॉड मैसेज हो सकते हैं।

सतर्क रहें, किसी भी नंबर या लिंक पर क्लिक न करें। -प्रेषक महाराष्ट्र साइबर।’ पिछले दो दिनों में महाराष्ट्र साइबर विभाग ने बकाया बिजली बिलों या लंबित केवाईसी के बहाने धोखाधड़ी से निपटने के लिए राज्य में दो करोड़ से ज्यादा मैसेज भेजे। साइबर सुरक्षा व साइबर अपराध जांच के लिए नोडल एजेंसी-महाराष्ट्र साइबर ने बल्क मैसेजिंग सुविधाओं का दुरुपयोग करने वाले जालसाजों से निपटने के लिए जियो, एयरटेल, वोडाफोन जैसी दूरसंचार कंपनियों से करार किया है।

कल इस मुद्दे पर चर्चा के लिए मैं अपने एक पुलिस मित्र के पास गया, उसका पुलिस स्टेशन मेरे घर से 20 किमी दूर है और मैं एक घंटे के बजाय 30 ही मिनट में पहुंच गया क्योंकि बारिश में जरा-सा ही जलभराव था। सिविल ठेकेदारों द्वारा बिना निगरानी के मलबा फेंक देने से मुंबई में यह समस्या सालों से है। इस साल नगरीय निकाय ने इस मुद्दे को सुलझाने के लिए एसएमएस का रास्ता चुना।

उन्होंने ये मैसेज भेजा कि ‘क्या आपने घर में रिपेयर या रेनोवेशन का काम कराया है? क्या काम से मलबा इकट्‌ठा किया है? हम 331 रु. मीट्रिक टन की दर से एक फोन कॉल पर निर्माण स्थल से मलबा उठाने की सुविधा दे रहे हैं। अगर सड़क पर मलबा बिखरा हुआ मिला या किसी निजी सर्विस देने वाले को इसका ठेका दिया, जिसके पास इसे फेंकने के लिए खुद की अपनी जमीन नहीं है, तो आप पर बीस हजार रु का जुर्माना लगेगा।’

फंडा यह है कि अगर वाकई काम के बोझ तले दबना नहीं चाहते, तो परेशानी आने से पहली ही कदम उठाएं, संबंधित आदमी को सतर्क करें और अपना फोन नंबर दें, ताकि मुद्दा उनके स्तर पर ही सुलझ जाए और आपका बोझ कम से कम रहे।