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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:संसार में रहते हुए हमें जो भी करना है, वह तो करना ही चाहिए, लेकिन पूरी शांति के साथ

3 महीने पहले
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पं. विजयशंकर मेहता - Money Bhaskar
पं. विजयशंकर मेहता

मनुष्य होने का मोल चुकाइए। यह भोग से नहीं, योग से होगा। सवाल उठता है कि मनुष्य जीवन का सबसे बड़ा उद्देश्य क्या, तो जवाब होना चाहिए आत्मा की निकटता। उसके बाद सारी भौतिक यात्राएं आरंभ होनी चाहिए। खूब काम कीजिए, खूब धन कमाइए, पर ध्यान रखिए कि जब हम सफलता की यात्रा पर निकलते हैं तो जो मिलता है वो अपनी जगह, पर जो दांव पर लगता है, वे पांच चीजें हैं- समय, संबंध, संपत्ति, संतान और स्वास्थ्य।

लेकिन, जो लोग योग साधेंगे उनका स्वास्थ्य ठीक रहेगा और स्वास्थ्य ठीक होगा तो बाकी बातें अपने आप सही होती चली जाएंगी। योग की विशेषता है वह शारीरिक के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य पर भी प्रभाव डालता है। जीवन में दोनों का संतुलन होना चाहिए। आज कई लोग बुरे मानसिक स्वास्थ्य से ग्रसित हैं।

आने वाले 10-15 सालों में जब शांति ढूंढे नहीं मिलेगी, तब वह केवल योग से ही प्राप्त हो सकेगी। तो आज योग दिवस पर एक संकल्प के साथ योग को जीवन में इसलिए उतारिए कि संसार में रहते हुए हमें जो भी करना है, वह तो करना ही चाहिए, लेकिन पूरी शांति के साथ। योग का पर्याय ही शांति है।