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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:सत्य को थोड़ा-सा भी समझ लें तो खुद भी शांत हो जाएंगे और वातावरण भी साफ-सुथरा, पवित्र हो जाएगा

2 महीने पहले
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पं. विजयशंकर मेहता - Money Bhaskar
पं. विजयशंकर मेहता

आजकल जिधर देखो, सत्य का झगड़ा है। जब सत्य को धर्म से जोड़कर हल्ला होता है तो सत्य तो गायब ही हो जाता है। फिर सिर्फ धर्म के पीछे की सांप्रदायिकता चलने लगती है। वैसे भी सत्य को लेकर जब कोई विवाद होता है तो असल में वह विवाद सत्य का होता ही नहीं है। वह होता है ‘मेरे सत्य’ का। आज धर्म के नाम पर जितने विवाद सुनाई-दिखाई दे रहे हैं, ये सब ‘मेरे सत्य’ के हैं, अखंड सत्य के नहीं।

हालात ये हैं कि लोग आगे खड़े हो गए, सत्य को पीछे धकेल दिया। जब-जब सत्य पीछे खड़ा होगा, वह झूठ होगा। सत्य को समग्र रूप से स्वीकारना होगा। उसकी परतें उतारने का प्रयास करेंगे तो मसला भले ही सुलझ जाए, आप उलझ जाएंगे। किसी भी धर्म के सत्य को जानने का जो दावा लोग करते हैं, इनके लिए सत्य एक हथियार है, पत्थर है एक-दूसरे को घायल करने के लिए।

जिस सत्य के नाम पर इतना हल्ला होता है, उसे यदि थोड़ा-सा भी समझ लें, जी लें तो खुद भी शांत हो जाएंगे और अपनी अशांति से आसपास का वातावरण दूषित कर रखा है, वह भी साफ-सुथरा, पवित्र हो जाएगा।