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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:हमारा मूल स्रोत हैं माता-पिता, शास्त्र और हमारी आत्मा, जो इनसे जुड़ेंगे, वे मौलिक हो जाएंगे

3 महीने पहले
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पं. विजयशंकर मेहता - Money Bhaskar
पं. विजयशंकर मेहता

प्रतिस्पर्धा के इस दौर में अब लगभग सभी योग्य हैं। आप जो भी नया या अनूठा करेंगे, तुरंत उसकी नकल कर ली जाएगी और हो सकता है कि वह नकल ओरिजिनल से ज्यादा अच्छी हो। इसलिए इस समय हमारी मौलिकता बहुत मायने रखेगी। मौलिकता का अर्थ नया होना नहीं है, इसका अर्थ है मूल स्रोत से जुड़े रहना। हमारा मूल स्रोत हैं माता-पिता, शास्त्र और हमारी आत्मा। जो लोग इनसे ठीक से जुड़ेंगे, वे मौलिक हो जाएंगे।

उस मौलिकता में नया न होगा, लेकिन उसकी नकल नहीं हो सकेगी। इस समय हर तरफ इतनी प्रतिस्पर्धा है कि असफलता की पीड़ा भी होती है, दूसरों से पीछे रहने का दर्द भी सताता है। इस दर्द को यदि समय रहते दूर न किया गया तो आप इसे किसी और को भी देंगे, अपने परिवार में फैलाएंगे।

खुद तो दुखी रहेंगे ही, दूसरों को भी दुख परोस देंगे। इसलिए अपनी मौलिकता को बनाए रखिए, बचाए रखिए। जब हम मौलिक होते हैं तो करुणामय हो जाते हैं और ‘लोग मेरे बारे में क्या सोचेंगे’ का खयाल दिमाग से उतर जाता है। तो जुड़े रहिए अपनी जड़ों से, हो जाइए मौलिक।