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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:अपने भीतर के भिखारी का विश्लेषण करें और उसे ऋषि में बदलें, फिर आप भी ‘राजऋषि’ हो जाएंगे

2 महीने पहले
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पं. विजयशंकर मेहता - Money Bhaskar
पं. विजयशंकर मेहता

हर इंसान के पास अपनी विरासत है। अमीर हो या गरीब, ‘पीछे छोड़कर क्या जाएंगे’ यह खयाल हमेशा रहना चाहिए। भिखारी भी अपने पीछे कुछ छोड़कर जाता है। कभी भिखारी दिखे तो उसे परमात्मा का संकेत समझना और उसे दर्पण मानकर उसमें खुद की छवि देखना। ये दीनबंधु दर्पण के रूप में बताएंगे कि हर मनुष्य अपने-अपने स्तर पर भिखारी है। चाहे राजा हो या धनवान व्यक्ति, जहां तक मांग है वहां तक भिखारी ही होगा।

हां, जिसकी मांग खत्म हो गई, उससे बड़ा कोई बादशाह नहीं। ऐसा स्वामी रामतीर्थ कहा करते थे। ये जो जितने बड़े लोग हैं, कहीं न कहीं, किसी न किसी के आगे भिखारी हैं। गीता में कृष्ण ने एक शब्द दिया है- ‘राजऋषि’। राजऋषि से मतलब था योग का जानकार। इसका यह अर्थ नहीं कि राजा ऋषि जैसा हो गया।

राजा तो कहीं का भी हो, वह भी है तो भिखारी। हां, जो ऋषि यानी योगी हो जाएगा, कृष्ण की दृष्टि में वह असल राजा है। तो जब भी किसी भिखारी को देखें, भीतर के भिखारी का विश्लेषण करें और उसे ऋषि में बदलें। फिर आप भी ‘राजऋषि’ हो जाएंगे।