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कारा स्विशेर का कॉलम:क्रिप्टोकरेंसी का बाजार हो रहा ध्वस्त, खोया भरोसा फिर से पाना बड़ी चुनौती

2 महीने पहले
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कारा स्विशेर, वरिष्ठ अमेरिकी जर्नलिस्ट और एनवाईटी में स्तम्भकार - Money Bhaskar
कारा स्विशेर, वरिष्ठ अमेरिकी जर्नलिस्ट और एनवाईटी में स्तम्भकार

क्रिप्टोकरेंसी का बाजार ध्वस्त हो रहा है। कुछ इसे क्रिप्टो-विंटर की संज्ञा दे रहे हैं, जबकि यह क्रिप्टो का हिम-युग अधिक मालूम होता है। ज्यादा पुरानी बात नहीं, नवम्बर में क्रिप्टो बाजार उफान पर था। तब बिटकॉइन की कीमत 69 हजार डॉलर को छू गई थी। आज यह 20 हजार के इर्द-गिर्द मंडरा रही है। ऐसे में अगर इस सेक्टर की री-ब्रांडिंग के लिए बड़े पैमाने पर कोशिशें की जा रही हों तो वे आश्चर्यजनक नहीं हैं, क्योंकि वर्षों की अनवरत हाइप के बाद वह इस मुकाम तक पहुंचा था।

लेकिन हाल-फिलहाल तो इसके अनेक हाई-प्रोफाइल लीडर मुंह छुपाने की हालत में हैं। कारण, आने वाले समय में क्रिप्टो में और गिरावट के अंदेशे जतलाए जा रहे हैं। दुनिया के सबसे बड़े क्रिप्टो एक्सचेंज बायनान्स के संस्थापक और सीईओ चांगपेंग शाओ ने हाल में ब्लूमबर्ग को एक इंटरव्यू दिया। वे टेरायूएसडी के पतन पर बोल रहे थे। टेरायूएसडी एक स्टेबलकॉइन है, जो कि न तो स्टेबल है और न ही सही मायनों में कॉइन है। उन्होंने कहा, ‘मुझे तो इसके लचीलेपन को देखकर अचरज हुआ।

इसके पास कोई बेलआउट नहीं है, सेंट्रल बैंक नहीं है, सरकारी हस्तक्षेप नहीं है, अलबत्ता पैसों की मैं ज्यादा चिंता नहीं करता।’ हम्म, शायद। लेकिन बायनान्स को आज पैसों की ही सबसे ज्यादा चपत लग रही है। जहां अमेरिका और दूसरे देशों के रेगुलेटर्स बायनान्स की जांच-पड़ताल में जुट गए हैं, वहीं उसके सीईओ यह जताने की कोशिश कर रहे हैं कि उन्होंने समय से आगे की कोई चीज बनाई है, जिसे वयस्क ही समझ सकते हैं। तब तो बच्चों को क्रिप्टो से दूर रहना चाहिए, नहीं?

अब इसमें विडम्बना देखिए, शाओ अपनी कम्पनी लेकर दुबई जा छिपे हैं। दुबई ऐसे देशों से घिरा है, जो आज की तारीख में सबसे ज्यादा कमाई करने वाली कमोडिटी यानी तेल से मुनाफा कमा रहे हैं। शाओ ऐसा करने वाले पहले नहीं हैं। लेकिन क्रिप्टो के बाजार में संदिग्ध चीजों की कमी नहीं है। पूछें कि बायनान्स में चीजें किसके नियंत्रण में हैं? स्वयं शाओ के। और क्या वह कम्पनी है भी? नहीं, वो तो एक ऑर्गेनाइजेशन है।

ब्लूमबर्ग कहता है- एयरबीएनबी, उबर, पे-पल की ही चिर-परिचित राह पर चलने वाला एक और उद्यम हमारे सामने है। इसका एक ही फंडा है कि सरकारों की मांगों को जब तक हो सके, नजरअंदाज करो। और जब आपके बिजनेस का आकार बड़ा हो जाए तो मार्केट-शेयर में सहभागिता के लिए उन्हीं सरकारों के साथ मिलकर काम करो। लेकिन समस्या यह है कि अब क्रिप्टो एक्सचेंज वैश्विक-वित्त के एक बड़े हिस्से के साथ गुंथ चुके हैं, और अगर रेगुलेटर्स को इनके खिलाफ मोर्चा खोलना है तो यह छोटी-मोटी लड़ाई नहीं होगी।

जब तक यह समाप्त होगा, तब तक क्रिप्टो एक्सचेंज के मालिकान या तो आपराधिक मामलों के अभियुक्त होंगे या शायद दुनिया के सबसे अमीर व्यक्तियों में से एक। गत माह टेरायूएसडी और लूना- दोनों ही गर्त में गई थीं। वे अपने साथ दूसरी क्रिप्टोकरेंसी और सहयोगी-सेवाओं को भी ले डूबीं। टेरायूएसडी और लूना के पीछे जिस दक्षिण कोरियाई उद्यमी डो क्वोन का दिमाग लगा है, वे अब अपने नाकाम प्रोडक्ट्स के नए संस्करण सामने लाना चाहते हैं।

एक तरफ उन पर सरकारी जांचें चल रही हैं, वहीं वे वॉलस्ट्रीट जर्नल को इंटरव्यू देकर कह रहे हैं कि हमें पूरा विश्वास है हम पहले से भी ताकतवर बनकर लौटेंगे। वे अतीत में ऐसी ही बातें ट्विटर से भी करते रहे हैं। अलबत्ता अपने इंटरव्यू में उन्होंने माना कि उन्होंने टेरायूएसडी पर जो शर्तें लगाई थीं, उन्हें वे हार चुके हैं, लेकिन वे कहते हैं कि बिजनेस में नाकाम होना एक बात है और धोखाधड़ी दूसरी बात है।

पर ईमानदारी का सबूत देने के लिए अपनी नाकामियों को सामने रखने से खोया विश्वास नहीं लौटेगा, खासकर तब जब बुरे दिनों का पूर्वानुमान हाे। क्रिप्टो के पैरोकार कहते हैं इकोनॉमी के विकेंद्रीकरण के लिए पैसों का भी विकेंद्रीकरण करना होगा। ये बातें आपको भ्रामक लगती हैं तो उनके नए तर्कों पर आप क्या कहेंगे, जिनकी चमक भी उतर रही है।

क्रिप्टो मार्केट का फंडा है कि सरकारों की मांगों को जब तक हो सके, नजरअंदाज करो। और जब आपका बिजनेस बड़ा हो जाए तो मार्केट-शेयर में सहभागिता के लिए उन्हीं सरकारों के साथ मिलकर काम करो।

(द न्यूयॉर्क टाइम्स से)