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  • Retailers Received 'little Support' From Banks To Tide Over COVID Crisis: RAI Survey

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RAI सर्वे:कोविड संकट से निपटने के लिए खुदरा विक्रेताओं को बैंकों से कम समर्थन मिला, 52% निजी बैंकों से असंतुष्ट

नई दिल्ली8 महीने पहले
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  • देशभर में 311 खुदरा विक्रेताओं की प्रतिक्रिया के आधार पर इस सर्वे को किया गया है
  • 52% कोविड-19 के दौरान PSU बैंकों द्वारा विस्तारित वित्तीय सहायता से संतुष्ट हैं

रिटेलर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (RAI) के एक सर्वे के मुताबिक, 300 से अधिक खुदरा विक्रेताओं को कोविड-19 संकट के प्रभाव से उबरने के लिए बैंकों से बहुत कम या कोई वित्तीय सहायता नहीं मिली है। आरएआई के बैंक बेनेफिट सर्वे के अनुसार निजी बैंकों की तुलना में PSU बैंक तुलनात्मक रूप से अधिक मददगार रहे हैं।

आरएआई द्वारा देशभर में 311 खुदरा विक्रेताओं की प्रतिक्रिया के आधार पर इस सर्वे को किया गया है। इसमें 56 फीसदी के पास लोन की बकाया सुविधाएं थीं, जबकि 52 प्रतिशत को 27 मार्च को आरबीआई की तरफ से घोषित अधिस्थगन नहीं मिला।

65% के पास पहले से ही कार्यशील पूंजी ऋण
सर्वे के मुताबिक, 65 प्रतिशत उत्तरदाताओं के पास पहले से ही कार्यशील पूंजी ऋण है, और 54 प्रतिशत ने संबंधित बैंकों से अतिरिक्त कार्यशील पूंजी सीमा (कोविड लिमिट) मांगी है। हालांकि, सिर्फ 15 प्रतिशत खुदरा विक्रेताओं को अतिरिक्त कार्यशील पूंजी ऋण प्रदान किया गया, जैसा कि आरबीआई द्वारा अनिवार्य है।

52% निजी बैंकों से असंतुष्ट
सर्वे में कहा गया है कि लगभग 52 प्रतिशत उत्तरदाता कोविड-19 के दौरान PSU बैंकों द्वारा विस्तारित वित्तीय सहायता और सेवाओं से संतुष्ट हैं, लेकिन इतने ही प्रतिशत खुदरा विक्रेता निजी बैंकों से असंतुष्ट हैं।

आरएआई ने कहा, "निजी बैंक, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और भारत सरकार द्वारा जारी निर्देशों के बावजूद खुदरा विक्रेताओं को अतिरिक्त कार्यशील पूंजी ऋण देने के लिए पीएसयू बैंकों की तुलना में अधिक अनिच्छुक रहे हैं।"

गैर-आवश्यक वस्तुएं बेचने वाले खुदरा विक्रेताओं को 100% नुकसान
सर्वे में मिले जवाबों के आधार पर रिटेलर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के सीईओ कुमार राजगोपालन ने कहा कि कोविड-19 की वजह से आवश्यक वस्तुओं को बेचने वाले खुदरा विक्रेताओं की बिक्री में 40 फीसदी और गैर-आवश्यक वस्तुएं बेचने वाले खुदरा विक्रेताओं की बिक्री में 100 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है।

उन्होंने कहा कि पिछले कुछ महीनों में कारोबार बंद होने से राजस्व का नुकसान हुआ है, जिसके कारण कुछ खुदरा विक्रेता अपने कर्मचारियों को वेतन देने में भी असमर्थ रहे हैं। बैंकों, विशेष रूप से निजी बैंकों की अनिच्छा, खुदरा विक्रेताओं के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है। इससे उन्हें बड़ा नुकसान पहुंच सकता है।

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