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कॉरपोरेट:इंफोसिस के खिलाफ अमेरिका में मुकदमा दाखिल, नस्लीय भेदभाव करने का लगा आरोप

नई दिल्ली7 महीने पहले
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लिंग्विस्ट ने आरोप लगाते हुए कहा है कि उसने 2016 में कंपनी के विरुद्ध एक क्लास-एक्शन मुकदमे में गवाही दी थी। इसके बाद कंपनी ने उसे उसकी जिम्मेदारियों से हटा दिया। आखिरकार लिंग्विस्ट ने 2017 में नौकरी छोड़ दी - Money Bhaskar
लिंग्विस्ट ने आरोप लगाते हुए कहा है कि उसने 2016 में कंपनी के विरुद्ध एक क्लास-एक्शन मुकदमे में गवाही दी थी। इसके बाद कंपनी ने उसे उसकी जिम्मेदारियों से हटा दिया। आखिरकार लिंग्विस्ट ने 2017 में नौकरी छोड़ दी
  • इंफोसिस की अमेरिकी इकाई की पूर्व डायवर्सिटी प्रमुख डेविना लिंग्विस्ट ने दाखिल किया है मुकदमा
  • नस्लीय भेदभाव का मुकदमा 11 जून को अमेरिका की एक जिला अदालत में दाखिल किया गया

भारत की अग्रणी आईटी सेवा कंपनी इंफोसिस की एक पूर्व कर्मचारी ने कंपनी पर नस्लीय भेदभाव करने का आरोप लगाते हुए अमेरिका में कंपनी के खिलाफ एक मुकदमा दाखिल किया है। यह मुकदमा डेविना लिंग्विस्ट ने दाखिल किया है। वह इंफोसिस की अमेरिकी इकाई में पूर्व डायवर्सिटटी प्रमुख के तौर पर काम कर चुकी है। मुकदमा 11 जून को जिला अदालत में दाखिल किया गया।

मनीकंट्र्रोल की एक रिपोर्ट के मुताबिक लिंग्विस्ट ने आरोप लगाते हुए कहा है कि उसने 2016 में कंपनी के विरुद्ध एक क्लास-एक्शन मुकदमे में गवाही दी थी। इसके बाद कंपनी ने उसे उसकी जिम्मेदारियों से हटा दिया। आखिरकार लिंग्विस्ट ने 2017 में नौकरी छोड़ दी। जब किसी मुकदमें एक खास व्यक्ति की अपेक्षा एक बड़े वर्ग का हित जुड़ा होता है, तो उसे क्लास-एक्शन मुकदमा की श्रेणी में डाल दिया जाता है।

2013 में एक आईटी पेशेवर ब्रेंडा कोचलर ने आरोप लगाया था कि कंपनी ने नौकरी देने में उसकी जगह एक दक्षिण एशियाई पेशेवर को तवज्जो दी थी। यह मुकदमा बाद में क्लास-एक्शन मुकदमा बन गया। इसी मुकदमें में लिंग्विस्ट ने कंपनी के खिलाफ गवाही दी थी।

2013 के मुकदमें से भी पहले कंपनी पर एक और मुकदमा दर्ज किया गया था। वह मुकदमा अगस्त 2012 में रद्द हो गया था। उस मुकदमें में अलबामा में इंफोसिस के एक कर्मचारी जैक पामर (अमेरिकी नागरिक) ने आरोप लगाया था कि जब उसने शॉट-टर्म वीजा के दुरुपयोग का मुद्दा उठाया था, तब कंपनी ने उसे प्रताड़ित किया था।

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