15 साल बाद ऐसी है KBC के पहले 'करोड़पति' की लाइफ, कुछ यूं बदला वक्त

दुष्यंत कुमार

Jun 08,2015 04:31:00 PM IST
फोटोः सदी के महानायक अमिताभ बच्चन के साथ केबीसी के प्रथम विजेता हर्षवर्धन नवाथे और उनकी पत्नी।
नई दिल्ली. हर्षवर्धन नवाथे। मुंबई निवासी, कौन बनेगा करोड़पति के पहले विजेता। साल 2000 की बात है, जब कौन बनेगा करोड़पति को होस्ट कर रहे महानायक अमिताभ बच्चन ने उनके हाथ में एक करोड़ रुपए का चेक थमाया। इसके बाद तो नवाथे रातोंरात सेलेब्रिटी बन गए। वह पार्टियों में जाने लगे। कॉलेजों में लेक्चर के लिए उनको बुलावा आने लगा। कई समारोह में उन्हें फीता काटने के लिए बुलाया गया। राजनीतिक रैलियों में शामिल हुए। बड़े-बड़े लोगों से उनका याराना हो गया। यहां तक की अभिनेता जॉन अब्राहम उनके अच्छे दोस्त बन गए। लेकिन क्या आज भी सब कुछ वैसा ही है, जैसा था। शायद आप भी यह सोचते होंगे कि जो पैसे नवाथे को मिले उन्होंने कहां खर्च किए। जो ख्वाब उन्होंने देखे, क्या वह पूरे हुए। क्या इसके बाद हर्षवर्धन की जिंदगी वाकई बदल गई। मनी भास्कर के दुष्यंत कुमार ने नवाथे से ही जाना उनकी आज की लाइफ का हाल। आइए डालते हैं लाइट...कैमरा...एक्‍शन के साथ करोड़पति बने नवाथे की रियल लाइफ पर नजर...
सपनों जैसा था 15 साल पहले का वो लम्हा
15 साल हो गए। सब कुछ सपनों जैसा ही तो था। मैंने एक करोड़ रुपए जीते, तो दोनों हाथ हवा में उठ गए। बगल में खड़े एंकर ने भी कहा था, ‘हर्षवर्धन नवाथे आपने इतिहास बना लिया है।’ यकीनन, वह एक शानदार लम्हा था। केबीसी में जीता, तो फेमस हो गया। अमिताभ बच्चन सर ने, हाथ में एक करोड़ रुपए का चेक थमाया। लगा, किस्मत बदल गई है। खुद अमिताभ बच्चन ने एक कोने में ले जाकर कहा, ‘तुम्हारी जिंदगी बदलने वाली है।’
अभी महिंद्रा एंड महिंद्रा में हैं हेड (CSR & एथिक्स)
हर्षवर्धन अभी महिंद्रा एंड महिंद्रा में (CSR & एथिक्स) डिपार्टमेंट में हेड हैं। उन्होंने KBC की चमक से निकलने के बाद ही करियर के बारे में सोचना शुरू कर दिया था। वह इस कंपनी से साल 2005 से जुड़े हैं। हालांकि, केबीसी में करोड़पति बनने के बाद उन्होंने सबसे पहले IL&FS में नौकरी शुरू की। इसके बाद वह नंदी फाउंडेशन में डायरेक्टर बने और फिर नंदी कम्युनिटी वाटर सर्विस प्राइवेट लिमिटेड में चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर रहे। हर्षवर्धन अब आम लोगों की तरह ही, मुंबई स्थित कंपनी महिन्द्रा एंड महिन्द्रा के दफ्तर निकलते हैं।
आगे की स्लाइड्स में जानें हर्षवर्धन ने कैसे खर्च किए थे 1 करोड़ रुपए...
फोटोः ये फोटो उस वक्त की है, जब साल 2000 में वह कौन बनेगा करोड़पति के पहले विजेता बने थे। तब शो होस्ट कर रहे अमिताभ बच्चन ने उन्हें 1 करोड़ रुपए का चेक सौंपा था। कुछ इस तरह खर्च हुए रुपए हर्षवर्धन कहते हैं कि मुझे 1 करोड़ रुपए का चेक मिला। मैंने सारे पैसे, सेविंग अकाउंट में जमा करा दिए। इस पैसे पर टैक्स भी लगा। चेक मुझे अक्टूबर में मिला था और दिसंबर तक एडवांस चेक जमा करना था। इस तरह, कुल 30 लाख रुपए का टैक्स भरना पड़ा। वह याद करते हुए कहते हैं कि सबसे पहले मैंने मारुति एस्टीम वीएक्स खरीदी। तकरीबन 6 लाख रुपए की रही होगी। इसके बाद पढ़ाई में पैसे लगाए। पहले सिंबॉयसिस पुणे में फीस दी जहां MBA करने गया था। फिर यूके में पढ़ाई की, तो वहां की फीस भी दी। उस वक्त लोग कहते थे, तुम्हें और पैसों की क्या जरूरत तुम तो करोड़पति हो। रखा गया था होटल में, दुनिया की नजरों से बचाकर केबीसी में करोड़पति बनने के बाद हर्षवर्धन को दुनिया की नजरों से बचाकर एक होटल में रखा गया था, वो भी नाम बदल कर। पूरे 10 दिनों के लिए। हर्षवर्धन बताते हैं, मुझे बिल्कुल रॉकस्टार जैसा ट्रीटमेंट मिला। चौबीस घंटे सिक्युरिटी। लेकिन बहुत बोरिंग था वह वक्त। मैं बाहर निकलकर लोगों के साथ सेलिब्रेट करना चाहता था, लेकिन न चाहकर भी उस होटल में बंद था। उन दस दिनों के लिए मेरा नाम था, तरुण प्रभाकर। वैसे ये तरुण प्रभाकर, केबीसी के सिद्धार्थ बसु के सहयोगी का नाम था। दरअसल, हर्षवर्धन के करोड़पति बनने वाले एपिसोड की शूटिंग प्रसारण से पहले पूरी हो चुकी थी और इसका खुलासा प्रसारण से पहले न हो जाए, आयोजक ने इस आशंका के चलते हर्षवर्धन को होटल में रखा था। आगे की स्लाइड में जानिए क्यों पीछे छूट गया हर्षवर्धन नवाथे का सपना....फोटोः अपने बेटे के साथ हर्षवर्धन नवाथे। ...और इस चमक में पीछे छूट गया सपना हर्षवर्धन भारतीय प्रशासनिक सेवा में जाना चाहते थे। इसकी तैयारी भी की थी। नवाथे कहते हैं कि मैं उस वक्त 27 साल का था। सिविल परीक्षा पास करने के लिए कम वक्त बचा था। दरअसल, IAS की तैयारी के लिए पढ़ाई का एक टेंपो होता है। KBC का पहला करोड़पति बनते ही, इतनी प्रसिद्धि मिली की कुछ सालों तक सब रुक-सा गया। इस तरह उम्र निकल गई और सपना अधूरा रह गया। हर्षवर्धन के पिता एक ईमानदार सीबीआई अफसर थे। वही हर्षवर्धन की प्रेरणा भी हैं। बचपन में नवाथे पुलिस या आर्मी में जाने का सपना भी देखते थे। इसलिए बचपन में वह अपना नाम पुलिस कमिश्नर हर्षवर्धन नवाथे लिखा करते थे। पढ़ाई के इसी शौक ने उन्हें करोड़पति भी बनाया और इसी की चमक ने इस सपने को दूर भी कर दिया। केबीसी के 23 मिनट से बदला था जीवन केबीसी से मिली शोहरत के बाद वे काफी दिनों तक किताबों से दूर रहे। जीतने के बाद, वह मुंबई की पार्टियों का नया चेहरा बन गए। हर कोई उन्हें अपनी पार्टी में बुलाना चाहता था। वे पार्टियों में जाते रहे और जॉन अब्राहम से लेकर क्रिकेटर सलिल अंकोला जैसे सितारों के दोस्त बनते गए। हर्षवर्धन कहते हैं, जॉन से काफी याराना था उन दिनों। हमनें एक-दो शो भी साथ में किए।; विज्ञापनों और शोज के ऑफर की बाढ़ थी। पीआर कंपनी के साथ, कई चैनल से भी करार हो चुका था। फोटोग्राफर अतुल कस्बेकर की पीआर एजेंसी भी हायर कर ली थी। वह कहते हैं कि उन लोगों का जिंदगी जीने का तरीका अलग था। उस एक साल में मैंने अनगिनत जगहों पर शिरकत की। रिबन काटे, राजनीतिक रैलियों में शामिल हुआ और कई शॉप का उद्घाटन किया। आगे की स्लाइड में जानिए KBC से निकलने के बाद किस तरह शुरू हुआ संघर्ष.....फोटोः KBC के विजेता बनने के बाद जब वह सड़कों पर निकलते थे, तो लोग उनकी फोटो खींच लेते थे। फिर की एमबीए की पढ़ाई बीएससी ग्रैजुएट नवाथे ने सिविल सर्विसेज का सपना छोड़कर एमबीए पर ध्यान लगाया। वह एमबीए करने सिंबॉयसिस, पुणे चले गए। लेकिन शोहरत यहां भी साथ थी, तो दिक्कतें वैसी ही रहीं। लोग कॉलेज कैंपस में अपनी दुकानों के उद्घाटन का प्रपोजल लेकर आने लगे। प्रेस वाले भी आते थे। राजनैतिक लोग भी जुड़े थे। इस वजह से क्लास डिस्टर्ब होने लगी और प्रोफेसर नाराज रहने लगे। मैं ये मैनेज नहीं कर पा रहा था। इसलिए बीच में ही एमबीए छोड़कर, यूके पहुंच गया। वहां नेपियर यूनिवर्सिटी में एमबीए में दाखिला लिया। नवाथे कहते हैं कि, वह वक्त शांति से गुजरा। काफी वक्त बाद नवाथे को सामान्य रहने का मौका मिला। 2007 में की शादी उनकी शादी साल 2007 में सारिका नीलत्कर से हुई। सारिका मराठी नाटकों, टीवी और फिल्मों में अभिनय करती थीं। इसके बाद उनकी जिंदगी में स्थायित्व आ गया। नवाथे, आजकल अपने परिवार के साथ काम में मशगूल हैं। आगे की स्लाइड में जानिए अब हर्षवर्धन के सपने के बारे में....फोटोः हर्षवर्धन नवाथे व्यस्त रहने के बाद भी अपने परिवार के साथ समय बिताना नहीं भूलते हैं। आना चाहते हैं राजनीति में नवाथे को राजनीति अच्छी लगती है। हर्षवर्धन कहते हैं कि राजनीति में जाने से पहले समझ होना जरूरी है। साल 1992 की बात रही होगी, जब मुंबई में स्कूलों में होने वाले इलेक्शन पर बैन लग गया। लेकिन मेरे दोस्त हैं, जो राजनीति में हैं उनके साथ मैं हमेशा रहा। ये एक सीरियस विषय है। वह मुस्कुराते हुए कहते हैं कि मैं राजनीति में आऊंगा जरूर।
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