• Home
  • MNC Tech. Increased involvement of Indian companies

एमएनसी टेक. कंपनियों में भारतीयों का बढ़ता दखल

बिजनेस भास्कर

Jan 23,2013 02:16:00 AM IST

बेहतर तस्वीर
एमएनसी टेक्नोलॉजी के कई एमडी भारतीय
गूगल और इंटेल में सबसे ज्यादा तवज्जो
एसेंचर की ग्लोबल लीडरशिप टीम में भारतीय नहीं
एसेंचर की तरह कई और अन्य कंपनियों में यही हालात

पिछले साल भारत में मौजूद टेक्नोलॉजी मल्टीनेशनल कंपनियों की लीडरशिप में काफी परिवर्तन हुए। इंटेल ने देवयानी घोष को डायरेक्टर और कुमुद श्रीनिवासन को प्रेसिडेंट बनाया है।

सैप ने सुप्रकाश चौधुरी को कार्यवाहक मैनेेजिंग डायरेक्टर बनाया गया है। उन्होंने पीटर गर्टनबर्ग के इस्तीफा देने के बाद यह पद संभाला है। पिछले एक महीने को दौरान आईबीएम ने वनिता नारायणन को इसका मैनेजिंग डायरेक्टर बनाया है जबकि सीएससी ने नीरज नित्यानंद को एमडी बनाया है।

भारतीयों को मिल रही अहमियत
आईबीएम की नारायणन ग्रोथ मार्केट के प्रभारी आईबीएम के शीर्ष अधिकारियों मेें से एक को रिपोर्ट करती हैं। वह आईबीएम के अंतरराष्ट्रीय सेल्स और मार्केटिंग हेड को रिपोर्ट करते हैं।

इसके बाद वह सीईओ को रिपोर्ट करते हैं। मतलब यह है कि नारायणन और सीईओ के बीच सिर्फ दो ही लोग हैं। आईबीएम के चार कर्मचारियों में से एक भारतीय है लेकिन इसके राजस्व में भारत की हिस्सेदारी सिर्फ 2.8 फीसदी है।

सिसको के भारत में मैनेजिंग डायरेक्टर नरेश बधवा और सीईओ के बीच तीन लोग हैं। कंपनी ने भारत को अपना दूसरा ग्लोबल हेडक्वार्टर बनाया है। एसेंचर आउटसोर्सिंग में बाद में आई लेकिन इसने अपना इंडिया ऑपरेशन बढ़ाया है। इसके 2,60,000 कर्मचारियों में से 30 फीसदी तो भारत के हैं। लेकिन इसकी वेबसाइट में जो 19 सीनियर एक्जीक्यूटिव हैं, उनमें एक भी भारतीय नहीं हैं।

सैप के ग्लोबल रेवेन्यू में 6.57 फीसदी हिस्सेदारी भारत की है जबकि ओरेकल इंडिया की ओरेकल में हिस्सेदारी 0.45 फीसदी है। ज्यादा एमएनसी में तीन स्तर की रिपोर्टिंग है। इंडिया एमडी और ग्लोबल सीईओ के बीच तीन स्तर की रिपोर्टिंग है। लेकिन केपजेमिनी अपवाद है। इस कंपनी में इंडिया एमडी सीधे सीईओ को रिपोर्ट करते हैं।

गूगल और इंटेल आगे
टेक्नोलॉजी कंपनियों की एक्जीक्यूटिव लीडरशिप की बात की जाए तो गूगल और इंटेल में सबसे ज्यादा भारतीय शीर्ष पर हैं। गूगल में एक्जीक्यूटिव लीडरशिप टीम में पांच भारतीय हैं जबकि इंटेल में चार। जबकि एसेंचर, आईबीएम, एचपी, सीएससी और लेनोवो की एक्जीक्यूटिव लीडरशिप टीम में एक भारतीय नहीं है।

अगर इन कंपनियों में कोई भारतीय इस पोजीशन में नहीं है तो इसके पीछे इनका भारत से राजस्व का कम आना नहीं है। एसेंचर, आईबीएम और सीएससी ने सीनियर लीडरशिप में भारतीय को जगह नहीं दी है।

जबकि उनके 25 से 30 फीसदी कर्मचारी भारत में हैं। जबकि गूगल और इंटेल भारतीयों को कुछ ज्यादा ही अहमियत दे रही हैं। भारत में उनके कर्मचारियों की तादाद भले ही कितनी हो लेकिन लीडरशिप टीम में उन्हें जगह मिली है।

हालांकि इन कंपनियों के लिए इसके लिए कोई पुख्ता नीति नहीं बनाई है। यह स्वाभाविक नेतृत्व की नीति के तहत हुआ है। इसका मतलब यह नहीं है कि भारतीयों को लीडरशिप टीम रखने के बारे में कोई गारंटी दी जा रही है। न ही कंपनियों के अंदर इसका समर्थन किया जाता है कि किसी क्षेत्र के देशों को ज्यादा नेतृत्व दिया जाए।

अन्य कं पनियों के लिए भी सबक
आंकड़ों के विश्लेषण और हालातों की समीक्षा की जाए तो पता चलता है कि भारतीय मल्टीनेशनल टेक्नोलॉजी कंपनियों में अपनी स्थिति सुधारते जा रहे हैं। मल्टीनेशनल टेक्नोलॉजी कंपनियां भी भारतीयों को ज्यादा अधिकार देना चाह रही हैं।

दरअसल टेक्नोलॉजी के मामले में भारतीय बाजार तेजी से उभर रहा है इसलिए ऑपरेशन और नीतियां तय करने का काम भारतीयों को दिया जा रहा है। जिन कंपनियों ने अपनी लीडरशिप में ज्यादा भारतीयों को नहीं लिया है वे भी देर-सवेर ऐसा ही करेंगी।

X

Money Bhaskar में आपका स्वागत है |

दिनभर की बड़ी खबरें जानने के लिए Allow करे..

Disclaimer:- Money Bhaskar has taken full care in researching and producing content for the portal. However, views expressed here are that of individual analysts. Money Bhaskar does not take responsibility for any gain or loss made on recommendations of analysts. Please consult your financial advisers before investing.