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कोरोनावायरस का असर:देश का डेट-जीडीपी रेश्यो बढ़कर 87.6% पर पहुंचने की आशंका, इसे 60% पर लाने का लक्ष्य 2029-30 तक ही हो पाएगा पूरा

नई दिल्ली6 महीने पहले
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एसबीआई ईकोरैप के मुताबिक 2020-21 में देश का कर्ज 170 लाख करोड़ रुपए पर पहुंचने की आशंका है - Money Bhaskar
एसबीआई ईकोरैप के मुताबिक 2020-21 में देश का कर्ज 170 लाख करोड़ रुपए पर पहुंचने की आशंका है
  • कारोबारी साल 2019-20 में देश का डेट-जीडीपी रेश्यो 72.2% रहा
  • इस दौरान देश का कर्ज बढ़कर 146.9 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच गया

कोरोनावायरस और लॉकडाउन की परिस्थितियों में सरकार द्वारा ज्यादा कर्ज लेने और जीडीपी विकास दर घटने के कारण देश का कर्ज और जीडीपी का अनुपात चालू कारोबारी साल में बढ़कर 87.6 फीसदी पर पहुंच जाने का अनुमान है। इसके कारण डेट-जीडीपी रेश्यो को घटाकर 60 फीसदी पर लाने का एफआरबीएम का लक्ष्य 7 साल पीछे खिसक जाएगा और यह 2029-30 तक ही पूरा हो पाएगा। यह बात भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की 20 जुलाई की ईकोरैप रिपोर्ट में कही गई है।

एसबीआई के ग्रुप चीफ इकॉनोमिक एडवायजर डॉ. सौम्या कांति घोष द्वारा लिखी गई रिपोर्ट में कहा गया है कि चालू कारोबारी साल 2020-21 के आखिर तक देश की सरकार द्वारा लिया गया कुल कर्ज बढ़कर 170 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच जाएगा, जो देश की जीडीपी का 87.6 फीसदी होगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि कोरोनावायरस महामारी के कारण विकास दर घटने से दुनिया के सभी देशों का डेट टु जीडीपी रेश्यो (कर्ज : जीडीपी) प्रभावित हुआ है।

विदेशी कर्ज 6.8 लाख करोड़ का रह सकता है

रिपोर्ट के मुताबिक 170 लाख करोड़ रुपए के कर्ज में से एक्सटर्नल डेट (विदेश से लिए गए कर्ज) का हिस्सा 6.8 लाख करोड़ रुपए (जीडीपी का 3.5 फीसदी) रहने का अनुमान है। बाकी हिस्सा डोमेस्टिक डेट का होगा। डोमेस्टिक डेट में से राज्यों का डेट जीडीपी के 27 फीसदी के बराबर रहने का अनुमान है।

डेट-जीडीपी रेश्यो कम करने के लिए विकास दर बढ़ाना ज्यादा जरूरी

रिपोर्ट में कहा गया है कि जीडीपी में गिरावट के कारण डेट टु जीडीपी रेश्यो कम से कम 4 फीसदी तक बढ़ सकता है। इसका मतलब यह हुआ कि डेट टु जीडीपी रेश्यो कम करने के लिए सबसे अच्छा तरीका है जीडीपी का विकास सुनिश्चित करना। कर्ज घटाने से सही परिणा निकलने की उम्मीद नहीं है।

पिछले कुछ साल में लगातार बढ़ा है देश का डेट-जीडीपी रेश्यो

पिछले कुछ साल में देश का डेट-जीडीपी रेश्यो लगातार बढ़ता गया है। कारोबारी साल 2011-12 में देश का कर्ज 58.8 लाख करोड़ रुपए (डेट-जीडीपी रेश्यो 67.4%) था। कारोबारी साल 2019-20 में यह बढ़कर 146.9 लाख करोड़ रुपए (डेट-जीडीपी रेश्यो 72.2%) पर पहुंच गया।

कर्ज बढ़ने के बावजूद यह बहुत ज्यादा नहीं है

घोष के मुताबिक देश का कर्ज बढ़ने के बावजूद यह बहुत ज्यादा नहीं है। देश के पास जो फॉरेक्स रिजर्व है, उसके बल पर सरकार किसी भी बाहरी देनादारी को चुकाने में सक्षम है। साथ ही चूंकि कर्ज का अधिकतर हिस्सा घरेलू है, इसलिए इसे चुकाना बहुत बड़ा मुद्दा नहीं है।

सरकार ने पिछले साल के मुकाबले 66% ज्यादा कर्ज लिया

केयर रेटिंग्स के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा है कि सरकार ने चालू कारोबारी साल में अभी तक 4.5 लाख करोड़ रुपए का कर्ज ले लिया है। यह पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 66 फीसदी ज्यादा है। चालू कारोबारी साल के लिए 12 लाख करोड़ रुपए की संशोधित कर्ज सीमा के मुकाबले यह 37 फीसदी है।

एफआरबीएम का लक्ष्य पूरा करने में 7 साल की होगी देरी

देश के कर्ज का स्तर बढ़ने का मतलब यह है कि फिस्कल रिस्पांसिबिलिटी एंड बजट मैनेजमेंट (एफआरबीएम) का लक्ष्य हासिल करने में 7 साल की देरी होगी और अब यह लक्ष्य कारोबारी साल 2030 में ही पूरा हो सकता है। एफआरबीएम में कारोबारी साल 2023 तक डेट-जीडीपी रेश्यो घटाकर 60 फीसदी पर लाने का लक्ष्य रखा गया है।

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