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पावर सेक्‍टर में किए गए सुधार की समीक्षा करे सरकार : फेडरेशन

ऑल इण्डिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन ने पावर मिनिस्‍टर आरके सिंह से मुलाकात की।

power engineers demands to review reform projects

  

नई दिल्‍ली। ऑल  इण्डिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे के नेतृत्व में बिजली इन्जीनियर्स का एक प्रतिनिधि मण्डल ने पावर मिनिस्‍टर आरके सिंह से मुलाकात की। फेडरेशन ने पावर मिनिस्‍टर से कहा कि नया इलेक्ट्रिसिटी एक्‍ट लागू करने से पहले अब तक किए गए सुधार कार्यक्रम की समीक्षा की जाए। फेडरेशन के मुताबिक, सरकार ने कई सुधार कार्यक्रम चलाए हैं, बावजूद इसके पावर सेक्‍टर की हालत दिनों दिन बिगड़ती जा रही है। सरकार को इन सब कार्यक्रमों की व्‍यापक समीक्षा करनी चाहिए। 

 

बिजली है फिर भी हो रही कटौती 
बैठक के बाद दुबे ने बताया कि फेडरेशन ने  पावर मिनिस्‍टर से कहा कि सुधारों के नाम पर किये जा रहे प्रयोगों की इससे बड़ी विफलता और क्या हो सकती है कि  देश में बिजली उत्पादन की कुल क्षमता लगभग 338000 मेगावाट है जबकि अधिकतम मांग 160000 मेगावाट है फिर भी  देश के 4 करोड़ से अधिक घरों के लगभग 30 करोड़ लोग बिजली से वंचित हैं और जिनके पास बिजली है भी उन्हें आये दिन भीषण बिजली कटौती का सामना करना पड़  रहा है तो साफ़ है कि केंद्र और राज्यों की गलत ऊर्जा नीति का खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़  रहा है। फेडरेशन ने निजी घरानों पर अति निर्भरता की ऊर्जा नीति में परिवर्तन की मांग की। 

 

इलेक्ट्रिसिटी एक्‍ट 2003 भी फेल 
दुबे ने कहा कि देश में इलेक्ट्रिसिटी एक्‍ट 2003 लागू किया गया और राज्‍यों में बिजली बोर्ड भंग कर बिजली निगम बनाए गए और निजीकरण को बढ़ावा दिया गया। जिसका दुष्परिणाम यह है कि इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 बनाने के समय बिजली बोर्डों का जो कुल घाटा जो  43000 करोड़ रु था वह घाटा अब बढ़ कर 4.14 लाख करोड़ रु और देनदारियां (कर्ज ) बढ़ कर 04.22 लाख करोड़ रु तक पहुँच गया है ।

 

नाम बदलने से नहीं होगा परिवर्तन 
पावर मिनिस्‍टर को दिए गए ज्ञापन में कहा गया है कि पहले शहरों के लिए आरएपीडीआरपी योजना थी और गाँव के लिए राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना जिनका नाम बदल कर अब आई पी डी एस और पं दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना कर दिया गया है जिससे कोई परिवर्तन नहीं होने वाला  है । इसी प्रकार बिजली वितरण कंपनियों को घाटे से उबारने के लिए पिछली सरकार ने एफआरपी लागू की थी जो विफल रही अब एन डी ए  सरकार ने " उदय " योजना लागू की है जो एफ आर पी का ही नया नाम है । हाल ही में  हर घर तक बिजली पहुंचाने हेतु सौभाग्य योजना की घोषणा की गयी है| उन्होंने कहा कि मात्र नाम बदलने के बजाय ऊर्जा नीति बदलने की ज़रुरत है ।  " उदय " की कामयाबी पर भारतीय रिज़र्व बैंक ने भी अपनी  रिपोर्ट में आशंका व्यक्त की थी  । फेडरेशन का मत है कि इन योजनाओं से तबतक सार्थक परिणाम नहीं मिलेंगे जब तक बिजली इंजीनियरों और कर्मचारियों को विश्वास में नहीं लिया जाता । इसलिए केंद्र सरकार इलेक्ट्रिसिटी ( अमेंडमेंट ) बिल को जल्दबाजी में पारित कराने की कोशिश बंद करे और सुधारों के नाम पर अब तक किये गए प्रयोगों की उच्च स्तरीय समीक्षा की जाये जिसमे इंजीनियरों का भी प्रतिनिधित्व हो।  

 

अधिवेशन 17-18 नवंबर को 
शैलेन्द्र दुबे ने आज यहाँ उक्त जानकारी देते हुए बताया कि ऑल इन्डिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन का राष्ट्रीय अधिवेशन आगामी 17 एवं 18 नवम्बर को बैंगलोर में हो रहा है जिसमे बिजली के क्षेत्र में निजीकरण की दृष्टि से किये जा रहे संशोधनों के विरोध में राष्ट्रव्यापी आंदोलन की रणनीति तय की जाएगी | उन्होंने बताया कि यदि इलेक्ट्रिसिटी ( अमेंडमेंट ) बिल को संसद के शीतकालीन सत्र में जल्दबाजी में पारित कराने की एकतरफा कोशिश की गयी तो इसके विरोध में बिजली कर्मचारियों के साथ मिलकर राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू कर दिया गया है जिसके तहत  देशभर में जिला स्तर तक सम्मलेन किये जाएंगे और आम जनता को इलेक्ट्रिसिटी ( अमेंडमेंट ) बिल के जरिये बिजली आपूर्ति को निजी घरानों को सौंपने की केंद्र सरकार की नीतियों के अन्दरूनी सच से अवगत कराया जायेगा । 

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