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जानकारी  /ज्यादा मेगापिक्सल होना ही अच्छे कैमरे की गारंटी नहीं, फोन खरीदते वक्त ऐसे करें पहचान

जानिए, आखिर कैसे कम मेगापिक्सल वाले DSLR से फोन के मुकाबले ज्यादा बेहतर फोटो क्लिक होती है।  

Saurabh Kumar Verma

Jan 11,2020 10:08:49 AM IST

नई दिल्ली. स्मार्टफोन निर्माता बड़े मेगापिक्सल (MP) वाले स्मार्टफोन लॉन्च कर रहे हैं। भारत में ऐसा माहौल बना दिया गया है कि ज्यादा मेगापिक्सल वाला स्मार्टफोन ही अच्छे कैमरे की गांरटी है और इससे कमाल की फोटो क्लिक की जा सकती है। लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। बेहतर कैमरा कई चीजों पर निर्भर करता है, तो आज हम आपको ऐसे ही कुछ चीजें बताने जा रहे हैं, जो आपको हमेशा अच्छा कैमरा फोन खरीदते में मदद करेंगी। स्मार्टफोन का कैमरा तब अच्छा होता है, जब उसमें अच्छी क्वॉलिटी वाला लेंस, इमेंज सेंसर, मेगापिक्सल, अपर्चर,फ्लैश, जूम, मौजूद हो। अब दिक्कत यह है कि आखिर फोन में मौजूद इन सभी चीजों की पहचान कैसे की जाएं।

मेगापिक्सल

फोन खरीदते वक्त मेगापिक्सल की संख्या के साथ ही उसका साइज अहमियत रखता है, जिनता ज्यादा बड़े साइज का पिक्सल होगा, उस पर ज्यादा लाइट पड़ेगी, जिसकी वजह से ज्यादा बेहतर क्वॉलिटी की फोटो क्लिक की जा सकेगी। कई बार स्मार्टफोन निर्माता कंपनियां एक छोटे इमेज सेंसर में ज्यादा मेगापिक्सल लगाकर ज्यादा मेगापिक्सल वाला कैमरा बना देती है। इससे मेगापिक्सल तो बढ़ जाते हैं। लेकिन फोटो अच्छी क्लिक नहीं होती है, जबकि कम मेगापिक्सल वाले डीएसएलआर कैमरे से अच्छी फोटो क्लिक होती है। दरअसल DSLR में काफी स्पेस होता है। इसकी वजह से इसमें बड़े साइज का इमेज सेंसर इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि अब कई मोबाइल निर्माता कंपनियां छोटे साइज के इमेंज सेसर से सॉफ्टवेयर की मदद से फोटो क्वॉलिटी को बढ़ा देती है। फिर यह फोनो बड़े इमेज सेंसर से क्लिक की गई फोटो का मुकाबला नहीं कर सकती हैं।

इमेज सेंसर

इमेज सेंसर जैसा कि नाम से स्पष्ट है, एक इमेज के कलर और बाकी चीजों को पहचानने का काम सेंसर करता है। इमेज सेंसर की माप नैनोमीटर में होती है। मतलब जितना बड़ा इमेज सेंसर होगा, उससे ज्यादा अच्छी फोटो क्लिक होगी। ऐसे में जब भी फोन खरीदने जाएं, तो जरूर ध्यान दें, कि फोन का इमेंज सेंसर 9nm, 11nm या फिर अन्य साइज का है। डीएसएलआर कैमरे में सीसीडी का नाम आपने सुना होगा। एक बढ़िया कैमरा में थ्री सीसीडी इमेज सेंसर का उपयोग किया जाता है। आज कल स्मार्टफोन कैमरे में भी निर्माता सेंसर का जिक्र करते हैं।


अपर्चर

कैमरे में जो f1.7, f2.0 की वैल्यू होती है। वहीं अपर्चर होता है। इसमें f का मतलब होता है फोकल लेंथ। मतलब f की वैल्यू जितनी कम होगी। लेंस का दरवाजा उतना ज्यादा खुलेगा और ज्यादा लाइट अंदर जाएगी। उदाहरण को तौर पर आप समझ सकते हैं कि अगर अपर्चर f1.4 है, तो ज्यादा अच्छा है और अगर f2.0 है, तो कम अच्छा है।

लेंस

लेंस को आप कैमरे की आंख के तौर पर देख सकते हैं। लेंस के बगैर कैमरे की कल्पना भी नहीं की जा सकती। फोन में लेंस की क्वालिटी जितनी अच्छी होगी वह उतना ही बेहतर तस्वीर लेने में सक्षम होगा। लेंस सोनी और अन्य कंपनियों के आते हैं। जूम को 2X और 8X में मापा जाता है।

फ्लैश लाइट

फ्लैश लाइट का इस्तेमाल रात के दौरान फोटो क्लिक करने में किया जाता है। आजकल फोन में एलईडी फ्लैश लाइट का इस्तेमाल किया जाता है, जो बेहतर लाइट जनरेट करती है। कई कंपनियां फोन में दो फ्लैश लाइट उपलब्ध करा रही हैं। लेकिन अब रात के दौरान फोटो क्लिक करने के लिए नाइट मोड दिया जा रहा है, जो शटर स्पीड और सॉफ्टवेयर की मदद से चलता है।

अन्य जानकारी

  • मेगापिक्सल एक यूनिट होता है जो कैमरे के रिवॉल्यूशन के बारे में बताता है

  • मेगापिक्सल को मिलियन पिक्सेल के नाम से भी जाना जाता है।

  • 1 मेगापिक्सल को एक मिलियन यानी 10 लाख पिक्सेल होते हैं।

  • 1 मेगापिक्सल का रेजोल्यूशन 1152×864 होता है।

  • इसके सेंसर में 1152 पिक्सेल लंबाई 864 और 864 पिक्सेल ऊंचाई होती है।
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