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BPO में आएंगी 48 हजार नौकरियां, केंद्र सरकार खर्च करेगी 493 करोड़ रु.

Moneybhaskar.com

Aug 24,2015 08:29:00 AM IST
नई दि‍ल्‍ली। डिजिटल इंडिया के तहत सरकार ने इंडि‍या बीपीओ प्रोमोशन स्‍कीम को मंजूरी दे दी है। इस स्कीम के बाद बीपीओ कंपनियां दि‍ल्‍ली-एनसीआर, बेंगलुरु और पुणे के साथ ही लखनऊ, बनारस, जयपुर, भोपाल आदि‍ दूसरे शहरों में कॉल सेंटर खोल सकेंगी। इससे छोटे शहरों को डेवलप करने में मदद मिलेगी। IBPS पर सरकार करीब 493 करोड़ रुपए खर्च करेगी। इस स्कीम से विभिन्न राज्यों में 48,300 बीपीओ जॉब्‍स क्रिएट होंगी। मनी भास्कर आपको बता रहा है इस स्कीम के बारे में...।
पॉपुलेशन के आधार पर जॉब्‍स का निर्धारण
आईबीपीएस स्‍कीम के तहत केंद्र सरकार ने 2011 की जनगणना को पैमाना माना है। इस आधार पर विभिन्न राज्यों में 48,300 बीपीओ जॉब्‍स तय की गई हैं। जॉब्‍स के इस बंटवारे में बीपीओ सर्विस के मौजूदा सेंटर्स को बाहर रखा गया है। यानी, बेंगलुरू, चेन्‍नई, दिल्‍ली एनसीआर (गुड़गांव, फरीदाबाद, नोएडा), हैदराबाद, कोलकाता, मुंबई, पुणे जैसे शहरों को संबंधित राज्‍य की पॉपुलेशन से घटा कर कैलकुलेट किया गया है। इस स्‍कीम के तहत किसी भी राज्‍य के लिए न्‍यूनतम सीटों की संख्‍या 100 निर्धारित की गई है।
यूपी में मिलेंगी सबसे अधिक बीपीओ जॉब्‍स
बीपीओ सीट्स का निर्धारण पॉपुलेशन के आधार पर किया गया है। ऐसे में इसका सबसे बड़ा फायदा उत्‍तर प्रदेश को मिला है। आईबीपीएस स्‍कीम के तहत उत्‍तर प्रदेश में सबसे ज्‍यादा 8,800 लोगों को रोजगार मि‍लेगा। इसके अलावा, बि‍हार (4,600), महाराष्‍ट्र (3,900) और प. बंगाल (3,400) का नंबर आएगा। अंडमान निकोबार, चंडीगढ़, दादर एवं नगर हवेली, दमन दीव, लक्षद्वीप, पुडुचेरी को 100-100 बीपीओ सीट्स का कोटा हासिल हुआ है। वहीं, नार्थ ईस्‍ट बीपीओ प्रोमोशन स्‍कीम (एनईबीपीएस) के तहत नार्थ ईस्‍ट क्षेत्र में अति‍रि‍क्‍त 5,000 सीट दी गई हैं।
इन राज्यों में मिलेंगी इतनी जॉब्स
राज्‍य
कॉल सेंटर्स में जॉब की संख्‍या
आंध्र प्रदेश
2200
बिहार
4600
छत्‍तीसगढ़
1100
गोवा
100
गुजरात
2700
हरियाणा
1000
हिमाचल प्रदेश
300
जम्‍मू कश्‍मीर
600
झारखंड
1500
कर्नाटक
2300
केरल
1500
मध्‍य प्रदेश
3200
महाराष्‍ट्र
3900
ओडिशा
1900
पंजाब
1200
राजस्‍थान
3000
तेलंगाना
1200
तमिलनाडु
2800
उत्‍तर प्रदेश
8800
उत्‍तराखंड
400
पश्चिम बंगाल
3400
अंडमान निकोबार
100
चंडीगढ़
100
दादर एवं नगर हवेली
100
दमन एवं दीव
100
लक्षद्वीप
100
कुल
48,300
आगे की स्लाइड में जानिए राज्यों का क्या फायदा होगा इस स्कीम से...
नोटः तस्वीरों का इस्तेमाल केवल प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है।
छोटे शहरों से बाहर नहीं जाएगा टैलेंट इस योजना का एक मकसद छोटे शहरों से दिल्ली, मुंबई और अन्य महानगरों की ओर टैलेंट के पलायन को रोकना भी है। जॉब एवं करियर कंसल्टेंसी आलोक बुद्धिराजा के अनुसार पिछले डेढ़ दशक में दिल्ली, मुंबई और आसपास के शहरों में मौजूद बीपीओ और केपीओ ने लाखों युवाओं को बेहतह करियर का विकल्प दिया है। इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रेजुएट्स एवं अंडर ग्रेजुएट्स टैलेंट छोटे शहरों से बड़े शहरों में पहुंचा है। अब छोटे शहरों में जॉब क्रिएशन से इन शहरों की इकोनॉमी में भी सुधार होगा। राज्यों में बढ़ेगा आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर आईबीपीएस योजना को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया मिशन की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। छोटे शहरों में बीपीओ सेवाओं के विस्तार से जहां इन राज्यों के छोटे शहरों में जहां आईटी सेवाओं को विस्तार होगा। वहीं, इससे ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी और डिजिटल सेवाओं का भी प्रसार होगा। आईबीपीएस के तहत आंत्रप्रेन्योर या बिजनेस में रुचि दिखाने वाली कंपनियां बीपीओ और आईटी ऑपरेशन शुरू कर सकेंगी। आगे की स्लाइड में जानिए किस तरह शुरू होगा काम....कैसे शुरू होगा काम आईबीपीएस में दो स्तर पर काम शुरू होगा। शुरुआत में एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (ईओआई) के लिए कंपनियों को इनवाइट किया जाएगा। ताकि वह विभिन्न राज्यों के बाजारों में कारोबार शुरू कर सकें। इसके बाद रिक्युवेस्ट ऑफ प्रपोजल (आरईपी) के जरिए योग्य कंपनियों को बिड के लिए इनवाइट किया जाएगा।
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