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UP: एक्सप्रेस-वे का रास्ता साफ, किसानों की याचिकाएं खारिज

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लखनऊ से आगरा एक्सप्रेस-वे के निर्माण के लिए यूपी सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया है।

Last Hurdle is over on Agra Lucknow expressway  as Allahabad High Court Rejects Farmers appeal
इलाहाबाद। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लखनऊ से आगरा एक्सप्रेस-वे के निर्माण के लिए यूपी सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया है। इस याचिका के खारिज हो जाने से लखनऊ से आगरा एक्सप्रेस-वे के बनने का रास्ता साफ हो गया है। इसे बनाने के लिए सरकार ने भूमि अधिग्रहण कानून के तहत धारा-4 की अधिसूचना जारी की थी।
 
यह अधिसूचना 19 अक्टूबर 13 को जारी हुई थी। बाद में एक्सप्रेस-वे के लिए भूमि अधिग्रहण की धारा-6 की अधिसूचना भी 30 अक्टूबर 2014 को प्रकाशित कर दी गई। याची फिरोजाबाद के एक दर्जन से अधिक किसानों का कहना था कि बिना उनके आपत्तियों का निस्तारण किए सरकार लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस-वे का निर्माण करा रही है।
 
न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी और न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार श्रीवास्तव ने शिकोहाबाद, जिला फिरोजाबाद के गांव असलेमपुर नगला कान्हार और उरावर हस्तरफ के किसानों की एक्सप्रेस-वे के खिलाफ याचिकाओं को बलहीन बताते हुए खारिज कर दिया। यूपी सरकार की ओर से महाधिवक्ता वीबी सिंह और मुख्य स्थाई अधिवक्ता रमेश उपाध्याय, वाईके श्रीवास्तव ने पक्ष रखा।
 
इन्‍होंने कहा कि सरकार ने कानून के तहत सारी औपचारिकता पूरी कर इस एक्स्प्रेस-वे को बनाने के लिए किसानों की जमीन ले रही है। कहा गया था कि किसानों की आपत्तियों का भी निस्तारण कानून की परिधि में रहकर किया जा रहा है। कहा यह भी गया था कि धारा-4 के प्रकाशन के बाद धारा-6 के प्रकाशन की अवधि एक साल के अंदर है। न्यायालय ने एक्सप्रेस-वे के खिलाफ किसानों की याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा है कि एक्सप्रेस-वे बनना जनहित में है। इस कारण अधिग्रहण की प्रक्रिया से जमीनों को मुक्त रखना उचित नहीं होगा।
 
किसानों को उनकी जमीनों का मुआवजा कानून के मुताबिक, निर्धारित दर से दिया जाएगा। अदालत ने कहा है कि भूमि अधिग्रहण कानून की धारा 5-ए के अंतर्गत किसानों की आपत्तियों का निस्तारण किया गया है। आपत्तियों के निस्तारण से पूर्व किसानों को सुना भी गया है। अदालत ने किसानों की याचिकाओं को खारिज करते हुए यह भी कहा है कि अधिकांश किसानों की आपत्तियों में कोई भी ठोस आधार नहीं लिया गया है।

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