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इस गुप्ता के चलते संकट में आया बैंक ऑफ बड़ौदा, छोड़ना पड़ेगा देश

देश के प्रमुख सरकारी बैंकों में शामिल बैंक ऑफ बड़ौदा के लिए साउथ अफ्रीका की चर्चित गुप्ता फैमिली से लिंक भारी पड़ा है। स

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जोहानिसबर्ग. देश के प्रमुख सरकारी बैंकों में शामिल बैंक ऑफ बड़ौदा के लिए साउथ अफ्रीका की चर्चित गुप्ता फैमिली से लिंक भारी पड़ा है। साउथ अफ्रीका के सेंट्रल बैंक ने कहा कि अब बैंक ऑफ बड़ौदा वहां पर परिचालन नहीं कर पाएगा। माना जा रहा है कि गुप्ता फैमिली से संबंधित ट्रांजैक्शन से जुड़े विवादों में फंसने के चक्कर में बैंक ऑफ बड़ौदा को इस एक्शन का सामना करना पड़ रहा है।

 

 

साउथ अफ्रीकन रिजर्व बैंक ने जारी किया आदेश

गुप्ता फैमिली पहले से ही साउथ अफ्रीका के प्रेसिडेंट जैकब जुटमा के साथ लिंक के चलते विवादों से जूझ रही है। अब सोमवार को साउथ अफ्रीकन रिजर्व बैंक (एसएआरबी) ने कहा, 'ऑफिस ऑफ द रजिस्ट्रार ऑफ बैंक्स से बैंक ऑफ बड़ौदा को साउथ अफ्रीका से जाने की सूचना दे दी गई है।'

 

बैंक ऑफ बड़ौदा के साथ संपर्क में है एसएआरबी

एक स्टेटमेंट के मुताबिक, ' साउथ अफ्रीका से व्यवस्थित तरीके से निकासी सुनिश्चित करने के लिए रजिस्ट्रार बैंक ऑफ बड़ौदा के साथ लगातार बात कर रहा है, जिससे बैंक को कोई नुकसान नहीं हो।' गौरतलब है कि रजिस्ट्रार एसएआरबी का ही हिस्सा है। बयान में यह भी कहा गया कि एसएआरबी इस मसले पर और कोई टिप्पणी नहीं करेगा। बैंक ऑफ बड़ौदा की स्थानीय ब्रांच से इस मसले पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी।

 

2007 में खोली थी पहली ब्रांच

बैंक ने पोर्ट सिटी डरबन में एक दशक तक एक ऑफिस चलाने के बाद वहां पर अपनी पहली ब्रांच वर्ष 2007 में खोली थी। भारत सरकार के स्वामित्व वाला बैंक अप्रैल 2016 में गुप्ता ब्रदर्स अजय अतुल और राजेश के साथ साथ बिजनेस की इच्छा जाहिर करके जांच के दायरे में आ गया था। गुप्ता फैमिली पर पहले से ही प्रेसिडेंट जुमा और उनके फैमिली मेंबर्स के साथ मिलीभगत से सरकारी संपत्ति पर कब्जे के आरोप लग रहे थे।

 

गुप्ता ब्रदर्स की कंपनियों के बंद हो गए थे अकाउंट

साउथ अफ्रीका के सभी बड़े बैंकों द्वारा गुप्ता फैमिली की कंपनियों के अकाउंट्स बंद किए जाने के बाद उनके मालिकाना हक वाली कंपनी ओकबे रिसोर्सेज ने एक स्टेटमेंट में कहा था, 'बड़े स्थानीय बैंकों द्वारा उनके लिए सर्विसेज बंद किए जाने के बावजूद उन्हें एक बड़े एशियाई बैंक की सेवाएं मिलती रहेंगी, जो साउथ अफ्रीका में मौजूद है। इस बैंक ने उसके नाम का उल्लेख नहीं करने का अनुरोध किया है।'

 

आखिर कौन है गुप्‍ता फैमिली

गुप्ता फैमिली मूल रूप से उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले की रहने वाली है। इन्होंने 1993 में भारत से साउथ अफ्रीका का रुख किया था। बेहद कम समय में फैमिली बेहद कम समय में फैमिली ने अपना कारोबार ऐसा बढ़ाया कि उस देश में ही इनका सिक्का चलने लगा। गुप्ता फैमिली में 4 भाई हैं, जिनके नाम अजय गुप्ता, अतुल गुप्ता और राजेश गुप्ता उर्फ टोनी है। इसके अलावा उनके एक चचेर भाई वरुण गुप्ता भी इनमें शामिल हैं। इनका साउथ अफ्रीका में कंप्यूटर बिजनेस के अलावा माइनिंग अैर मीडिया से जुड़ा बड़ा कारोबार है। सहारा ग्रुप (साउथ अफ्रीका) के नाम से ये फैमिली कारोबार करती है, जिसमें सहारा कंप्यूटर भी शामिल है। 

 

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अरबों की मालिक है गुप्ता फैमिली

गुप्ता परिवार अरबों रुपयों की संपत्ति का मालिक है। साल 2016 के जोहान्सबर्ग स्टॉक एक्सचेंज के आंकड़ों के आधार पर, अतुल गुप्ता दक्षिण अफ्रीका के सातवें सबसे अमीर व्यक्ति हैं। उनकी कुल सम्पत्ति 5026 करोड़ रुपए है। यह फैमिली साउथ अफ्रीका के जोहान्सबर्ग में रहती है।

 

प्रेसिडेंट के परिवार को रख चुका है काम पर

गुप्‍ता फैमिली को दक्षिण अफ्रीका के राष्‍ट्रपति जैकब जुमा के काफी करीब माना जाता रहा है। यहां तक कि यह परिवार जुमा फैमिली के सदस्‍यों को नौकरी भी दे चुका है। जैकब जुमा की वाइफ बॉन्गी जेमा जुमा गुप्ता परिवार के एक फर्म जेआईसी माइनिंग सर्विसेज में कम्युनिकेशन अफसर के रूप में जॉब कर चुकी हैं। वहीं, प्रेसिडेंट की बेटी डुडुजील जुमा भी सहारा कंप्यूटर में डायरेक्टर रह चुकी हैं। यही नहीं, जुमा का बेटा डूडूजेन जुमा भी गुप्ता फैमिली के एक फर्म में डायरेक्टर था, हालांकि पब्लिक प्रेशर के बाद उसे पद छोड़ना पड़ा।

 

 

कैसे आई मुश्किल में

गुप्‍ता परिवार पर साउथ अफ्रीकी सरकार से नजदीकियों के चलते कई आरोप लग रहे हैं। मार्च 2015 में यह आरोप लगे कि फैमिली के एक सदस्य को 2015 में मिनिस्टर तक की पोस्ट ऑफर हुई थी। इस बारे में इस फैमिली के कई ई-मेल भी लीक हो चुके हैं। मार्च 2016 में आरोप लगे कि साउथ अफ्रीकी प्रेसिडेंट जैकब जुमा की नजदीकियों का फायदा इस परिवार ने अपने बिजनेस को प्रमोट करने के लिए उठाया है। इस परिवार को ऐसी कई सुविधाएं मिलीं जो सिर्फ राजनेताओं को मिलती है। वहीं, इन्हें कई तरह की छूट भी मिली जो दूसरों को नहीं मिलती है। 

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