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योगी का 1 साल : इंफ्रा-सोशल सेक्‍टर के लिए पैसा जुटाना चुनौती, 75% खर्च होगा वेतन-ब्‍याज पर

उत्‍तर प्रदेश की भाजपा सरकार का आज एक साल पूरा हो गया है।

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नई दिल्‍ली. उत्‍तर प्रदेश की भाजपा सरकार का आज एक साल पूरा हो गया है। इस दौरान सरकार ने बजट भी पेश कर दिया है, लेकिन यह बताता है कि सरकार के पास पैसों की तंगी रहेगी। इसका सबसे बड़ा कारण अपनी आय में से वेतन, पेंशन और उधारी को चुकाने पर होने वाला खर्च। ऐसे में सरकार के पास केन्‍द्र से मदद के बिना बड़ी योजनाओं को चलाने की गुंजाइश कम ही नजर आती है। इस बीच गोरखपुर और फूलपुर सीट की संसदीय सीट पर हार ने भाजपा की योगी आदित्‍यनाथ सरकार पर बड़े फैसले लेने का दबाव बढ़ा दिया है। अब यह देखने की बात होगी कि सरकार सीमित साधनों से कैसे जनता की अपेक्षाओं पर खरी उतरती है। 
 

पहली बार 4 लाख करोड़ के पार निकला बजट

यूपी की योगी आदित्‍यनाथ सरकार ने इस बार जो बजट पेश किया है वह 428385 करोड़ रुपए का है। उत्‍तर प्रदेश का बजट पहली बार 4 लाख करोड़ रुपए के पार निकला है। बावजूद इसके इसका ज्‍यादातर हिस्‍सा कर्ज उतारने और कर्मचारियों को वेतन बांटने में ही खर्च होना है।

 

 

बजट में क्‍या हैं सबसे बड़े खर्च

एसबीआई की रिपोर्ट के अनुसार बजट में रेवेन्‍यु का सबसे बड़ा हिस्‍सा कर्मचारियों के वेतन और पेंशन पर खर्च होना है। बजट में जो जानकारी दी गई है उसके अनुसार टोटल रेवेन्‍यु एक्‍पेंडिचर का 75 फीसदी वेतन, पेंशन और उधार को चुकाने पर खर्च होगा। इस वर्ष पेंशन और ब्‍याज के रूप में सरकार का खर्च 54 फीसदी से बढ़कर 56 फीसदी हो जाएगा।

 

 

सोश्‍ाल सेक्‍टर पर कितना खर्च की उम्‍मीद

सरकार ने बजट में टोटल कैपिटल एक्‍सपेंडिचर के लिए 106864 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। इसमें से कर्ज पर 32621 करोड़ रुपए खर्च हो जाएगा। बचे 74244 करोड़ रुपए में ही सारा काम होना है। इसमें पुरानी योजनाओं के खर्च के अलावा लोन माफी का खर्च भी शामिल है। इससे साफ है कि बड़ी योजनाओं की घोषणा तो हो सकती है, लेकिन यह पूरी तभी हो पाएंगी जब केन्‍द्र सरकार कुछ अतिरिक्‍त ममद करे।

 

 

इन्‍वेस्‍टर समिट

प्रदेश सरकार ने अपना एक साल पूरा होने के पहले ही यूपी इन्‍वेस्‍टर समिट का आयोजन किया था। इसमें हालांकि घोषणाएं तो काफी बड़ी बड़ी हुई हैं, लेकिन जो पूरी होने की उम्‍मीद की जा सकती है उनमें कुछ को ही शामिल किया जा सकता है। इनमें हैं …

 

 

यूपी में इन्वेस्टर समिट की जल्‍द पूरी होने लायक घोषणाए

-अडानी ग्रुप- 35000 करोड़ का इन्वेस्ट करेगा।
-रिलायंस ग्रुप- Jio 10 हजार करोड़ का निवेश करेगा।
-एस्सेल ग्रुप- 18,750 करोड़ रुपये
-बिड़ला ग्रुप- 25000 करोड़ रुपए का करेगा निवेश।
 

गेम चेंजर साबित हो सकता है डिफेंस कॉरिडोर

प्रदेश और केन्‍द्र सरकार मिलकर यूपी के मथुरा से लेकर बुन्‍दलखंड तक डिफेंस कॉरिडोर विकसित करने करने जा रहे हैं। यहां पर सिर्फ डिफेंस से जुड़ी कंपनियों को मौका दिया जाएगा। इसके उत्‍पादों को पूरा पूरा सेना ही खरीदेगी, इसलिए उम्‍मीद लगाई जा सकती है। इसके चलते उम्‍मीद लगाई जा सकती है कि यह उत्‍पादन इकाईयां डिफेंस कॉरिडोर में अपनी इकाईयां लगाएंगी। अगर यह कॉरिडोर बन पाया तो निश्चित रूप से प्रदेश का फायदा मिलेगा।

 

 

अन्‍य बड़े प्रोजेक्‍ट में पूर्वांचल व बुंदेलखंड पर फोकस

यूपी में पूर्वांचल व बुंदेलखंड के दो बड़े हाईवे प्रोजेक्‍ट की घोषणा की गई है। पूर्वांचल के लोगों को लखनऊ तक पहुंचने के लिए बेहतरीन एक्सप्रेस वे का खाका तो अब जमीन पर दिखने लगा है। इसके लिए जमीन का अधिग्रहण शुरू हो चुका है। लखनऊ से गाजीपुर के 353 किलोमीटर लंबी इस परियोजना की लागत करीब 25 हजार करोड़ रुपये के करीब है। यह एक्सप्रेस वे लखनऊ, बाराबंकी, फैजाबाद, अंबेडकरनगर, अमेठी, सुल्तानपुर, आजमगढ़, मऊ और गाजीपुर से होकर गुजरेगा। इसी तरह का हााईवे प्रोजेक्‍ट बुन्‍देलखंड के लिए भी प्रस्‍तावित है, हालांकि इस पर काम आगे नहीं बढ़ा है।

 

अन्‍य योजनाएं

- ग्रेटर नोएडा के जेवर में एयरपोर्ट का काम शुरू
- नोएडा और ग्रेटर नोएडा में बिल्डर्स और बायर्स की समस्याओं का समाधान
- रियल स्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी बनाकर आवंटियों के हितों की रक्षा

 

 

घोषणाओं को जमीन पर उतारना होगा

एक साल की उपलब्धियां गिनाने में काफी लग सकती हैं, लेकिन दोनों महत्‍वपूर्ण संसदीय सीटों के चुनाव हारने से योगी आदित्‍यनाथ सरकार के सामने कुछ ऐसा करने की चुनौती पैदा हो गई है कि एक साल के अंदर हालात फिर से उसके लिए अनुकूल बनते लगे। यह इसलिए भी जरूरी है कि 2019 में लोकसभी के चुनाव भी हैं। इसलिए राज्‍य सरकार के पास प्रयोगों की गुंजाइश कम और करने का दबाव ज्‍यादा रहेगा। हालांकि इस हालात में केन्‍द्र सरकार से हर तरह का सहयोग ज्‍यादा मिलने की उम्‍मीद भी बढ़ गई है। हालांकि प्रदेश की योगी सरकार एक साल पूरा होने पर क्‍या बोलती है यह काफी कुछ बता देगा कि प्रदेश किस तरफ जाएगा।

 

 

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