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वुडन हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्टर्स करेंगे बार कोड का इस्तेमाल, 4,000 करोड़ के बिजनेस को बचाने की कवायद

नई दिल्ली। वुडन हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्टर्स को एक्सपोर्टर करने के लिए बार कोड और ‘वृक्ष सर्टिफिकेट’ लेना होगा। दरअसल, इंटरनेशनल बॉडी सीआईटीईएस ने वुडन हैंडीक्राफ्ट के लिए नए नियम जारी किए जिसकी वजह से देश के 4,000 करोड़ रुपए के वुडन हैंडीक्राफ्ट कारोबार पर सवालिया निशान लगा गया। इंडियन गवर्मेंट के दखल देने पर सीआईटीईएस बार कोड और वृक्ष सर्टिफिकेशन के बाद ही इंडियन वुडन एक्सपोर्ट को इजाजत दी है। अब एक्सपोर्टर को वुडन हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्ट करने के लिए सरकार से सर्टिफिकेट लेना होगा।
 
वुडन एक्सपोर्ट के लिए फॉलो करनी होंगी नई गाइडलाइंस
 
एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल ऑफ हैंडीक्राफ्ट (ईपीसीएच) के वाइस चेयरमैन राजेश कुमार जैन ने moneybhaskar.com  को बताया कि वुडन हैंडीक्राफ्ट को अपने प्रोडक्ट पर बार कोड लगाना होगा। बार कोड पर लकड़ी की पैदावार और खरीद की जानकारी देनी होगी। साथ ही एक्सपोर्टर्स को सरकार से ‘वृक्ष सर्टिफिकेट’ लेना होगा। ‘वृक्ष सर्टिफिकेट’ का मतलब होगा कि कारोबारी ने लकड़ी की पैदावार और खरीद कानूनी तरीके से की है। इसके जरिए इंटरनेशनल बॉडी और सरकार वुड के गैरकानूनी तरीके से बेचने और खरीदने के तरीके को रोकना है।
 
क्या है सीआईटीईएस
 
कंन्वेशन ऑन इंटरनेशनल ट्रेड इन एनडेंजर स्पीसिज ऑफ वाइल्ड फाउना एंड फ्लोरा (सीआईटीईएस) एक इंटरनेशनल ट्रीटी है, जिसने 182 देशों के लिए नियमों में बदलाव किया है। सीआईटीईएस का मकसद लुप्त होने वाले वाइल्ड लाइफ और पेड़ों को सुरक्षित करना है।
 
इंटरनेशनल एजेंसी ने ऐसे बढ़ाई मुश्किलें
 
इंटरनेशनल बॉडी सीआईटीईएस ने दलबर्जिया एसपीपी (शीशम और रोजवूड लकड़ी) को अपेंडिक्स टू के केटेगरी में डाल दिया। इससे एक्सपोर्टर अमेरिकी और यूरोपीय बाजार में शीशम और रोजवूड लकड़ी के बने हैंडीक्राफ्ट प्रोडक्ट एक्सपोर्ट नहीं कर सकते थे। इस मामले में इंडियन गवर्मेंट ने जब इंटरनेशलन बॉडी को अप्रोच किया। तब इंटरनेशलन बॉडी ने प्रोडक्ट पर बार कोर लगाने के लिए कहा जिस पर प्रोडक्ट के लिए इस्तेमाल की जाने वाली लकड़ी की सभी जानकारी होगी।
 
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