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    सेस से इस साल मोदी सरकार ने जुटाए 1.93 लाख करोड़, हिस्सेदारी नहीं मिलने से राज्य सरकारें नाराज

    नई दिल्ली। साल 2016-17 के बजट में फाइनेंस मिनिस्टर अरूण जेटली ने सेस के जरिए 1.93 लाख करोड़ रुपए जुटाएंगे। सेस के जरिए रेवेन्यू बढ़ाने की स्ट्रैटजी केंद्र सरकार को लगातार फायदा देती जा रही है। पिछले सात साल में सेस के जरिए सरकार की कमाई 57 हजार करोड़ से बढ़कर 1.93 लाख करोड़ पहुंचने वाली है। केंद्र सरकार की बढ़ती कमाई से राज्य नाराज हो रहे हैं। उनका कहना है कि केंद्र अपनी जेब भर रहा है और राज्यों को कुछ नहीं मिल रहा है।
     
    केंद्र का सेस कलेक्शन 7 साल में हुआ तीन गुना
     
    केंद्र सरकार ने करीब 20 तरह के सेस और सरचार्ज लगा रखे हैं। इसमें एजुकेशन और पेट्रोल, डीजल पर लगने वाले सेस से सरकार को सबसे ज्यादा कमाई होती है। केंद्र सरकार का सेस के जरिए टैक्स कलेक्शन बीते सात साल में तीन गुना से अधिक बढ़ चुका है। साल 2009-10 में केंद्र सरकार को सेस के जरिए 57,843 करोड़ रुपए मिले थे। ये साल 2012-13 में बढ़कर 85,328 करोड़ रुपए हो गया। बीते सात साल में यानी 2016-17 में सरकार का सेस टैक्स कलेक्शन बढ़कर 1,93,893 करोड़ रुपए पहुंच गया है।
     
    सेस में राज्यों को नहीं मिलता शेयर
     
    सीबीईसी के एक्स चेयरमैन सुमित दत्त मजुमदार ने moneybhaskar.com  को बताया कि सेस का पैसा राज्यों में नहीं बांटा जाता। यानी केंद्र सरकार की सेस के जरिए बढ़ी इनकम का हिस्सा राज्य सरकारों को नहीं मिलेगा। पिछले साल भी सरकार ने सर्विस टैक्स पर में .5 फीसदी एग्रीकल्‍चर कल्‍याण सेस और 4 फीसदी इंफ्रा सेस लगाया था। सरकार को इंफ्रा सेस के जरिए बीते एक साल में 3,000 करोड़ रुपए की आय हुई है।
     
     
    राज्य सरकार मांग रही है सेस में हिस्सेदारी
     
    वित्त मंत्री से राजस्थान सरकार मांग कर रही थी कि केंद्र के सेस में राज्यों को भी हिस्सा दे। उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि केंद्रीय बजट से दिल्ली को कुछ नहीं मिला। दिल्ली सरकार ने केंद्र सरकार से टैक्स में सालाना 5000 करोड़ रुपए की हिस्सेदारी की मांग की थी। लेकिन केंद्र सरकार से दिल्ली को 325 करोड़ रुपए ही मिले हैं। राज्यों को सेस में हिस्सेदारी इस साल भी बजट में नहीं मिली है।
     
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