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कोर्ट ने आसाराम सहित 3 को माना दोषी, आरोपी शि‍वा और प्रकाश बरी

जोधपुर की एक अदालत ने नाबालिक यौनशोषण के आरोप में आसाराम समेत 3 आरोपियों को दोषी माना है।

Asaram Bapu found guilty by Jodhpur Court
 
नई दि‍ल्‍ली. जोधपुर की एक अदालत ने नाबालिक यौनशोषण के आरोप में आसाराम समेत 3 आरोपियों को दोषी माना है। जबकि‍‍ 2 आरोपि‍यों को बरी कर दि‍या है। बता दें कि‍ साढ़े चार साल से जोधपुर जेल में बंद अासाराम के खिलाफ अपनी ही शिष्या से दुष्कर्म करने का अारोप था। ​इसके बाद मामले में पॉक्सो एक्ट के तहत एफआईआर की गई थी। फैसले को देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राजस्थान, गुजरात और हरियाणा को हिदायत दी है कि किसी भी सूरत में हिंसा नहीं होनी चाहिए। इन राज्यों में आसाराम के अनुयायी काफी संख्या में हैं।
 
'हम कानूनी टीम से सलाह लेंगे' 
 
आसाराम की प्रवक्ता नीलम दुबे ने कहा कि हम अपनी कानूनी टीम से सलाह लेंगे। इसके बाद ही भविष्य की रणनीति तय होगी। हमें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। 
 
आसाराम पर ये आरोप लगाए थे पीड़िता ने?
 
आसाराम के गुरुकुल में पढ़ने वाली छात्रा ने अपने बयान में कहा, "मुझे दौरे पड़ते थे। गुरुकुल की एक शिक्षिका ने मेरे माता-पिता से कहा आसाराम से इलाज कराएं। आसाराम ने मुझे जोधपुर के पास मणाई गांव के फार्म हाउस में लाने को कहा। वहां पहुंचे तो मेरे माता-पिता को बाहर रोक दिया गया। उनसे कहा गया कि आसाराम विशेष तरीके से मेरा अकेले में इलाज करेंगे। इसके बाद मुझे एक कमरे में भेज दिया गया। वहां पर आसाराम पहले से मौजूद थे। उन्होंने मेरे साथ अश्लील हरकतें की। साथ ही धमकी दी कि यदि मैं चिल्लाई तो कमरे से बाहर बैठे उसके माता-पिता को मार दिया जाएगा। मुझे ओरल सेक्स करने को कहा था, लेकिन मैंने मना कर दिया। 
 
और कौन हैं मामले में शामि‍ल?  
 
शिल्पी उर्फ संचिता 
छात्रावास की वार्डन शिल्पी पर इलाज के लिए छात्रा को प्रेरित कर आसाराम के पास भेजने का आरोप है। आरोप है कि उसने छात्रा व उसके परिजनों को भूत और प्रेत का डर दिखाया था। 
 
शरद उर्फ शरतचंद्र 
आसाराम के गुरुकुल के संचालक शरतचंद्र पर आरोप है कि उसने छात्रा की बीमारी का इलाज नहीं कराया। उसने छात्रा के परिजनों को भ्रमित किया कि छात्रा का इलाज सिर्फ आसाराम ही कर सकते हैं। इसके लिए आसाराम संग छात्रा को पूरी रात अनुष्ठान करना होगा। 
 

शिवा उर्फ सवाराम (बरी) 
सवाराम ने पीड़ित छात्रा को शाहजहांपुर से दिल्ली और फिर दिल्ली से जोधपुर ले जाने का काम किया। आरोप है कि सवाराम ने ही छात्रा को आसाराम से मिलवाया था। उसके बाद 15-16 अगस्त की रात को आसाराम ने छात्रा का यौन उत्पीड़न किया। 
 
प्रकाश (बरी)  
मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में स्थित आसाराम के आश्रम की ओर से चलाए जाने वाले हॉस्टल के कुक प्रकाश द्विवेदी ने जेल से निकलने के लिए बेल तक नहीं ली। कहा जाता है कि उसने आसाराम की सेवा के मकसद से बेल नहीं ली ताकि उन्हें किसी भी तरह की समस्या न हो। वह पूरे मामले में आसाराम, शिल्पी और शरतचंद्र के बीच की कड़ी था। 
 
5 साल केस के, 5 आरोपियों का फैसला इन 5-5 तथ्यों से समझें 
 
1) पीड़िता न डिगी न डरी, 27 दिन की लंबी जिरह में 94 पेज में दिए बयान।
2) जांच अधिकारी ने 60 दिन तक हर धारा पर दिए ठोस जवाब, 204 पेज के बयान। 
3) पीड़िता को बालिग साबित करने की हर मुमकिन कोशिश, उम्र पर संदेह की वजह नहीं। 
4) अभियोजन की कहानी को सपोर्ट करने वाले कृपालसिंह के बयान, जिसे मार दिया। 
5) पूरी कहानी दुष्कर्म की नई परिभाषा पर टिकी, वह टूटी तो केस ही बिखर सकता था। 
जेल में फैसला सुनाने का चौथा मामला 
- जेल का हॉल कोर्ट रूम के लिए तैयार किया गया है। यह वही हॉल है जहां 31 साल पहले टाडा कोर्ट बनी थी और कठघरे में अकाली नेता गुरचरणसिंह टोहरा खड़े थे। वहीं आसाराम व उसके चार साधक भी अपना फैसला सुनेंगे। 
 
 
- जेल में फैसला सुनाने के देश में चंद ही उदाहरण हैं। जिनमें इंदिरा गांधी के हत्यारों, आतंकी कसाब और राम-रहीम को भी जेल में ही फैसला सुनाया गया था। यह चौथा मामला है, जब सुरक्षा कारणों से कोर्ट अपना फैसला जेल में ही सुनाएगा। 
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