Home » States » Madhya PradeshWhy MP and Chhattisgarh are fighting over Kadaknath chicken

एक मुर्गे के लिए लड़ गए दो राज्य, हर महीने कराता है लाखों में कमाई

इन दिनों छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के बीच एक खास किस्‍म की जंग छिड़ी हुई है।

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नई दिल्‍ली.. दो राज्‍यों के बीच पानी समेत अन्‍य मुद्दों को लेकर विवाद तो आपने सुना होगा लेकिन इन दिनों छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के बीच एक खास किस्‍म की जंग छिड़ी हुई है। यह जंग मुर्गे को लेकर है।  कड़कनाथ नाम के इस मुर्गे पर दोनों राज्‍य अपना दावा कर रहे हैं। दिलचस्‍प बात ये है कि इस मुर्गे के जरिए लोगों को लाखों में कमाई भी होती है। तो आइए जानते हैं कि आखिर क्‍या है विवाद और कैसे होती है कमाई। 

 

 

सबसे पहले जानिए क्‍या है विवाद

 

छत्तीसगढ़ और मध्‍य प्रदेश  दोनों ही राज्यों में बरसों से कड़कनाथ की प्रजाति को पालने का चलन है। यही वजह है कि कड़कनाथ के 'जियोग्राफ़िकल इंडिकेशंस टैग' यानी भौगोलिक संकेतक का दावा करते हुए दोनों राज्यों ने चेन्नई के भौगोलिक संकेतक पंजीयन कार्यालय में अपना आवेदन पेश किया है और एक - दूसरे के दावे को कमजोर बताने में जुट गए हैं।  

 

जियोग्राफ़िकल इंडिकेशंस टैग 

 

जियोग्राफ़िकल इंडिकेशन टैग का मतलब ये है कि अधिकृत यूजर्स के अलावा कोई भी व्यक्ति, संस्था या सरकार इस उत्पाद के मशहूर नाम का इस्तेमाल नहीं कर सकती।  वर्ल्ड इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी ऑर्गेनाइजेशन के अनुसार जियोग्राफिकल इंडिकेशन ये बताता है कि वह उत्पाद एक खास क्षेत्र से ताल्लुक रखता है और उसकी विशेषताएं क्या हैं। साथ ही उत्पाद का आरंभिक स्रोत भी जियोग्राफि‍कल इंडिकेशन से तय होता है। आगे भी पढ़ें - लाखों में हो सकती है कमाई 

 

 

मुर्गे की क्‍या है खूबियां  

 

काले रंग के मुर्गे की इस प्रजाति का ख़ून और मांस तक काला ही होता है। देश में पाये जाने वाले दूसरे मुर्गों की तुलना में इसका आकार और वजन तो बड़ा होता ही है, इस मुर्गे में पाए जाने वाले पौष्टिक तत्व भी दूसरे मुर्गों की तुलना में कहीं अधिक होते हैं।  प्रोटीन की मात्रा 20 प्रतिशत की तुलना में 25 प्रतिशत तक होती है। इसी तरह वसा की मात्रा अधिकतम 1.03 प्रतिशत तक होती है, जो सामान्य मुर्गे में 13 से 25 प्रतिशत तक होता है। दूसरे मुर्गे की तुलना में कड़कनाथ में कोलेस्ट्राल भी कम होता है। 

 

लाखों में हो सकती है कमाई 

 

आम तौर पर 80 से 120 रुपए किलो बिकने वाले दूसरे मुर्गों की तुलना में कड़कनाथ का बाजार भाव 500 से 750 रुपए प्रति किलोग्राम है। वहीं काले रंग की इस कड़कनाथ मुर्गी का एक अंडा 50 से 70 रुपए तक में बि‍कता है। जाहिर है कि अगर इस मुर्गे का पालन किया जाए तो लाखों में कमाई हो सकती है। 

 

कैसे कर सकते हैं पालन 

 

- अगर आप 100 चि‍कन रख रहे हैं तो आपको 150 वर्ग फीट जगह की जरूरत होगी। हजार चि‍कन रख रहे हैं तो करीब 1500 वर्ग फीट जगह की जरूरत होगी।
- चूजों और मुर्गि‍यों को अंधेरे में या रात में खाना नहीं देना चाहि‍ए। मुर्गी के शेड में प्रतिदिन तकरीबन घंटे प्रकाश की आवश्यकता होती है।
- फार्म बनाते गांव या शहर से बाहर मेन रोड से दूर हो, पानी व बिजली की पर्याप्त व्यवस्था हो। फार्म हमेशा ऊंचाई वाले स्थान पर बनाएं ताकि आस-पास जल जमाव न हो।
- दो पोल्ट्री फार्म एक-दूसरे के करीब न हों। मध्य में ऊंचाई 12 फीट व साइड में 8 फीट हो।
- चौड़ाई अधिकतम 25 फीट हो तथा शेड का अंतर कम से कम 20 फीट होना चाहिए। फर्श पक्का होना चाहिए।
- एक शेड में हमेशा एक ही ब्रीड के चूजे रखने चाहिए। पानी पीने के बर्तन दो से तीन दि‍न में जरूर साफ करें।
- फार्म में ताजी हवा आती रहने से बीमारि‍यां नहीं लगतीं।
आगे भी पढ़ें -  कहां से पा सकते हैं

कहां से पा सकते हैं


इसके लि‍ए आप इंडि‍या मार्ट पर मौजूद सैलर्स से कॉन्‍टेक्‍ट कर उनसे मोलभाव कर सकते हैं। इसके अलावा इंटरनेट पर खोजेंगे तो कई ऐसे पोल्‍ट्री फार्म मि‍ल जाएंगे जो फार्म खोलने के लि‍ए चूजे और अंडे बेचते हैं। 
अगर आप इस मुर्गी का बड़े पैमाने पर पालन करने जा रहे हैं तो बेहतर होगा कि‍सी पोल्‍ट्री फार्म में जाकर चीजों को समझें या फि‍र अपने इलाके के मुर्गी पालन केंद्र में जाकर इसकी ट्रेनिंग लें।

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