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दलित संगठनों के भारत बंद का 10 राज्यों पर असर, मध्य प्रदेश में हिंसा में 3 की मौत

एससी-एसटी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ दलितों का भारत बंद का 10 राज्यों पर असर देखने को मिल रहा है।

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नई दिल्ली.  एससी-एसटी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ दलितों का भारत बंद का 10 राज्यों पर असर देखने को मिल रहा है। मध्य प्रदेश में हिंसा में 3 लागों की मौत हो गई। राजस्थान और मध्य प्रदेश में कई स्थानों पर हुई झड़पों में 30 लोग जख्मी हो गए। उधर, पंजाब में बंद के चलते सीबीएसई की परीक्षाएं टाल दी गई हैं। केंद्र सरकार इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटिशन दायर करेगी। 


राजस्थान में 25 लोग जख्मी, पुलिस ने किया लाठीचार्ज 
राजस्थान के बाड़मेर में दलित संगठनों और करणी सेना के बीच झड़प हो गई, जिसमें 25 लोग जख्मी हो गए। हालात काबू करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। यहां करणी सेना बंद के समर्थन में उतरी थी, जिसका दलित संगठनों ने विरोध किया। उधर, भरतपुर में महिलाएं हाथों में लाठियां लेकर सड़कों पर प्रदर्शन करने उतरीं। 


मध्य प्रदेश के मुरैना में भीम सेना और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं के बीच झड़प 
मध्य प्रदेश के मुरैना में भीम सेना और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हो गई। प्रदर्शनकारियों ने कई दुकानों में आग लगा दी। गोलीबारी में एक की मौत हो गई। ग्वालियर में 2 की मौत और 19 जख्मी हो गए। बंद समर्थकों ने रेलवे ट्रैक पर जाम लगा दिया। हिंसा को देखते हुए ग्वालियर के तीन और भिंड के 2 थाना क्षेत्रों में कर्फ्यू लगाया गया। यहां 50 एटीएम में तोड़फोड़ की गई। ग्वालियर में इंटरनेट सेवा रोक दी गई है।

 

पंजाब में सीबीएसई की 10-12वीं की परीक्षाएं टलीं 
स्कूल-कॉलेज, बसें और इंटरनेट बंद, सीबीएसई 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं टाली गईं। पटियाला में प्रदर्शनकारियों ने ट्रेनें रोकीं। राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए 12 हजार जवान तैनात किए गए हैं।
इसके अलावा बिहार, उत्तर प्रदेश, ओडिशा, झारखंड, गुजरात, हरियाणा, छत्तीसगढ़ में भी कई स्थानों पर झड़पें हुईं।

 

दलित संगठनों की क्या मांग है?
संगठनों की मांग है कि अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 में संशोधन को वापस लेकर एक्ट को पहले की तरह लागू किया जाए।

 

केंद्र क्या दलील दे सकता है?
सूत्रों के मुताबिक, केंद्र की पिटिशन में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की दलील होगी कि इस फैसले से एससी-एसटी एक्ट के प्रावधान कमजोर होंगे। लोगों में इस कानून का खौफ घटेगा, जिसकी वजह से इसके उल्लंघन के मामले भी बढ़ेंगे। 
कांग्रेस के राज्यसभा सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, "निश्चित ही रिव्यू पिटीशन दायर करनी चाहिए, यह सरकार का हक है। हालांकि, असल सवाल यह है कि सरकार इस केस को सुप्रीम कोर्ट में ठीक ढंग से पेश करने में नाकाम क्यों रही, इसकी जांच होनी चाहिए।" 

 

सुप्रीम कोर्ट का यह था फैसला
- सुप्रीम कोर्ट ने 20 मार्च को जारी एक आदेश में एससी-एसटी एक्ट के दुरुपयोग पर चिंता जताते हुए इसके तहत तत्काल गिरफ्तारी या आपराधिक मामला दर्ज करने पर रोक लगा दी थी। 
- कोर्ट ने एससी-एसटी एक्ट के तहत दर्ज होने वाले केसों में अग्रिम जमानत को भी मंजूरी दे दी थी। 
- केंद्रीय मंत्रियों रामविलास पासवान और थावरचंद गहलोत की अगुआई में एससी-एसटी सांसदों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलकर विरोध दर्ज करवाया था।

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