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मजबूर हुए मुकेश अंबानी, चाह कर भी नहीं कर पाएंगे छोटे भाई की मदद

कोर्ट के एक फैसले के बाद देश के अमीर शख्स मुकेश अंबानी चाहकर भी अपने छोटे भाई की मदद नहीं कर पाएंगे।

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नई दिल्ली. अनिल अंबानी को तगड़ा झटका लगा है, जिसके बाद साफ हो गया है कि उनके बड़े भाई और देश के अमीर शख्स मुकेश अंबानी चाहकर भी उनकी मदद नहीं कर पाएंगे। इसकी वजह छोटे भाई की कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम) के खिलाफ आया बॉम्बे हाईकोर्ट का एक फैसला बना है। इसके बाद अब आरकॉम कोर्ट की मंजूरी के बिना अपनी कोई एसेट नहीं बेच पाएगी। दरअसल आरकॉम कर्ज के बोझ से दबी हुई है और इससे उबरने के लिए उसने मुकेश अंबानी की जियो को अपनी एसेट बेचने के लिए बड़ी डील की थी।

 

 

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आरकॉम पर है 45 हजार करोड़ का कर्ज

आरकॉम पर 45 हजार करोड़ रुपए (मार्च, 2017 तक) का कर्ज है। लेंडर्स के भारी दबाव के चलते अनिल अंबानी दिसंबर, 2017 में कर्ज चुकाने के लिए एक प्लान पेश किया था।

इसमें उनके भाई मुकेश अंबानी बड़े मददगार के तौर पर सामने आए थे। अनिल अंबानी ने बड़े भाई की कंपनी जियो के साथ हजारों करोड़ रुपए की डील का ऐलान किया था, जिसके तहत आरकॉम की एसेट जियो को बेचने का प्रस्ताव था। कोर्ट के इस आदेश ने मुकेश अंबानी को भी मजबूर कर दिया है और अनिल अंबानी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

 

 

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स्वीडन की कंपनी की याचिका पर कोर्ट ने दिया था यह आदेश

दरअसल स्वीडन की कंपनी इरिक्सन की भारतीय सब्सिडियरी ने आरकॉम के देश भर में स्थित नेटवर्क को ऑपरेट और प्रबंधन के लिए 7 साल का करार किया था। इसी करार के तहत उसका आरकॉम पर लगभग 1155 करोड़ रुपए बकाया है। इसको लेकर कंपनी ने सितंबर, 2017 में आरकॉम के खिलाफ इनसॉल्वेंसी पिटीशन फाइल की थी और उसका बकाये का भुगतान सुनिश्चित करने का अनुरोध किया था।

आर्बिट्रेशन कोर्ट ने इस पर आरकॉम को तगड़ा झटका दिया और आरकॉम व उनकी दो अन्य कंपनियों पर बिना उसकी मंजूरी के किसी भी एसेट्स के ट्रांसफर और बिक्री करने पर रोक लगा दी थी।

 

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बॉम्बे हाईकोर्ट से भी आरकॉम को लगा झटका

आर्बिट्रेशन कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ आरकॉम ने हाल में बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। आरकॉम ने आर्बिट्रेशन कोर्ट के आदेश पर रोक लगाने का अनुरोध किया था। हालांकि हाईकोर्ट से भी आरकॉम को कोई राहत नहीं मिली और उसकी याचिका खारिज हो गई। दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेश दिया और आर्बिट्रेशन कोर्ट के आदेश को बरकरार रखने का फैसला किया।

 

चाइना डेवलपमेंट बैंक से आरकॉम ने लिया है कर्ज

इससे पहले आरकॉम को सबसे ज्यादा कर्ज देने वाले विदेशी लेंडर चाइना डेवलपमेंट बैंक ने जियो डील सहित अपने कर्ज में कटौती के प्लान पेश किए जाने के बाद उसके खिलाफ अपनी इनसॉल्वेंसी की पिटीशन वापस ले ली थी।

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