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मोदी के दांव के आगे गच्चा खा गया सऊदी, अब लगाएगा अरबों

भारतीय बाजार में अपनी पकड़ बनाने की मुहिम में लगा सऊदी अरब मोदी सरकार के दांव के आगे गच्चा खा गया।

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नई दिल्ली. भारतीय बाजार में अपनी पकड़ बनाने की मुहिम में लगा सऊदी अरब मोदी सरकार के दांव के आगे गच्चा खा गया। दरअसल सऊदी अरब अपनी एक कंपनी के सहारे भारत में एक रिफाइनरी के माध्यम से अपनी सब्सिडियरी शुरू करना चाह रहा था और उसके लिए तमाम ऑफर दे रहा था। लेकिन उसकी सभी कोशिशें नाकाम हो गईं, वो भी भारत सरकार की शर्तों पर। अब न उसके पास न तो मेजॉरिटी स्टेक होगी। साथ ही वह बड़ी मात्रा में क्रूड की सप्लाई भी करेगा।


सऊदी अरब की क्या है मजबूरी 
दरअसल सऊदी अरब अगले साल दुनिया का सबसे बड़ा आईपीओ लाने जा रहा है। सऊदी अरब की सरकारी ऑयल कंपनी सऊदी आर्मको 6.70 लाख करोड़ रुपए (100 अरब डॉलर) का आईपीओ लाने वाली है। कंपनी इस पैसे को दुनिया के कई विकासशील देशों में निवेश करेगी और कई रिफाइनरी की स्थापना के माध्यम से अपने क्रूड ऑयल के लिए डिमांड सुनिश्चित करेगी।


सऊदी को लगा बड़ा झटका
हालांकि आईपीओ आने से पहले ही सऊदी को भारतीय बाजार में बड़ा झटका लगा। बीते साल मार्च तक सऊदी,  भारत के लिए क्रूड का सबसे बड़ा सप्लायर हुआ करता था। अप्रैल में उसे पीछे छोड़कर इराक ने भारत के इस बाजार पर अपनी बादशाहत कायम कर ली थी। वित्त वर्ष 2017-18 में अप्रैल-जनवरी की अवधि के आंकड़ों के मुताबिक इस दौरान इराक भारत में क्रूड का सबसे बड़ा एक्सपोर्टर बना रहा। इराक ने इस दौरान भारत को 3.89 करोड़ टन ऑयल का एक्सपोर्ट किया, वहीं सऊदी अरब 3.09 करोड़ टन ही एक्सपोर्ट कर सका। 

 

 

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]फिर गच्चा खा गया सऊदी अरब
सऊदी इस झटके से उबरने और ऑयल की सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए भारत में एक बड़ी रिफाइनरी में मेजॉरिटी स्टेक लेने पर विचार कर रहा था, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। हालांकि अपनी भविष्य की योजनाओं को देखते हुए वह भारत की शर्तों पर निवेश को राजी हो गया। 
सऊदी अरब कंपनी महाराष्ट्र में 44 अरब डॉलर (लगभग 2.86 लाख करोड़ रुपए) के निवेश से बनने वाली मेगा ऑयल रिफाइनरी में 50 फीसदी स्टेक खरीदेगी। इस संबंध में इंटरनेशन एनर्जी फोरम (आईईएफ) कान्फ्रेंस के दौरान एक मेमोरैंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (एमओयू) पर दस्तखत किए गए। 


रिफाइनरी में आधे तेल की सप्लाई करेगा सऊदी
इस मौके पर  सऊदी अरब के ऑयल मिनिस्टर खालिद ए. अल फलीह ने कहा कि सऊदी अरब के लिए भारत प्रमुख इन्वेस्टमेंट डेस्टिनेशन है और सऊदी आर्मको वेस्ट कोस्ट रिफाइनरी के अलावा भी निवेश की संभावनाएं तलाशती रहेगी।
उन्होंने कहा कि सऊदी अरब 6 करोड़ टन क्षमता वाली रिफाइनरी को लगभग आधे तेल की आपूर्ति करेगी। सरकार के स्वामित्व वाली आईओसी, बीपीसीएल और एचपीसीएल के पास इस प्रोजेक्ट की बाकी 50 फीसदी हिस्सेदारी होगी।

 

 

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रिफाइनरी के लिए बनाया था ज्वाइंट वेंचर 
यह रिफाइनरी महाराष्ट्र के रत्नागिरी में बनेगी। महाराष्ट्र के पश्चिमी हिस्से में बनने वाली रिफाइनरी के लिए तीन सरकारी कंपनियों इंडियन ऑयल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम ने ज्वाइंट वेंचर रत्नागिरी रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स (आरआरपीएल) बनाया है।
सऊदी आर्मको दुनिया की सबसे बड़ी ऑयल प्रोड्यूसर हैं, जो अपने क्रूड के लिए डिमांड सुनिश्चित करने के वास्ते ओवरसीज में रिफाइनरीज में निवेश कर रही है। साथ ही अगले साल आने वाले आईपीओ को देखते हुए मार्केट शेयर बढ़ाने की योजना पर भी काम कर रही है।

 

 

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रोज 1530 करोड़ रु का क्रूड इंपोर्ट करता है भारत
दरअसल भारत में क्रूड की खासी ज्यादा खपत होती है और इसके लिए वह आयात पर निर्भर है। यही वजह है कि वह चीन, अमेरिका के बाद दुनिया में क्रूड का तीसरा बड़ा आयातक देश है। वह अपनी जरूरत का लगभग 90 फीसदी आयात से पूरा करता है।
वित्त वर्ष 2016-17 में भारत ने कुल 86 अरब डॉलर (5.60 लाख करोड़ रुपए) का क्रूड आयात किया। इस प्रकार भारत को क्रूड के आयात पर रोजाना 1530 करोड़ रुपए खर्च करने पड़ रहे हैं। 

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