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चीन में हिट हुई भारतीय दवा कंपनी पर बनी फिल्म, 3 दिन में कमा लिए 1 हजार करोड़, बनाती है कैंसर की दवा

चीन में बनी भारतीय फार्मा कंपनी Natco पर बेस्ड फिल्म Dying To Survive इन दिनों वहां खासी धूम मचा रही है।

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नई दिल्ली. चीन में बनी भारतीय फार्मा कंपनी Natco पर बेस्ड फिल्म इन दिनों वहां खासी धूम मचा रही है। यह फिल्म इस कदर हिट हुई कि उसने महज 3 दिनों में 1 हजार करोड़ रुपए कमाकर चीन की सबसे ज्यादा सफल फिल्मों की लिस्ट में शामिल हो गई है। इस फिल्म का नाम है ‘Dying To Survive’ और 5 जुलाई को रिलीज होने के बाद से अब तक फिल्म कुल 35 करोड़ डॉलर (2400 करोड़ रुपए) कमा चुकी है।

 

 

15 हजार करोड़ रु है Natco की मार्केट वैल्यू

Natco फार्मा को भारत की ऐसी दिग्गज कंपनियों में गिना जाता है, जिनसे मुश्किल दौर में भी इंडियन मार्केट में अपना दमखम दिखाया है। मार्केट एनालिस्ट भी इस कंपनी पर भरोसा जताते रहे हैं। ऐसे दौर में जहां देश की बड़ी फार्मा कंपनियों की मार्केट वैल्यू लगातार गिर रही है, वहीं नैटको फार्मा की मार्केट वैल्यू 15 हजार करोड़ रुपए के आसपास बनी हुई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनी के चेयरमैन वी. सी नानापनेनी  का मानना है कि अच्छे अवसरों को पहचानने की स्ट्रैटजी का फायदा हमेशा कंपनी को मिला है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक अमेरिका और भारत में प्रोडक्ट्स की लॉन्चिंग से उसकी ग्रोथ को बूस्ट मिला है।

 

 

 

चीन की सरकार को देनी पड़ी सफाई

यह फिल्म चीन के कैंसर के मरीजों को होने वाली दिक्कतों को भी जाहिर करती है। इस फिल्म की सफलता से घबराकर चीन सरकार को बयान भी जारी करना पड़ा। सरकार ने कहा कि कैंसर की महंगी दवाइयों से राहत देने के लिए चीन कई तरह के कदम उठा रहा है। चीन सरकार ने कहा था कि उसने दवाइयों और विशेष तौर पर कैंसर रोधी दवाइयों के इंपोर्ट को लेकर भारत के साथ समझौता किया है। इससे पहले मई में कुछ कैंसर रोधी दवाइयों के आयात पर टैरिफ भी हटाया गया था।इसके अलावा कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन विदेशी फार्मा कंपनियों के साथ भी दवाइयों की कीमत कम करने को लेकर बातचीत करने वाला है।


 

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Natco की कैंसर की दवा पर बेस्ड है फिल्म

चीन में बनी फिल्म Dying To Survive, नैटको फार्मा की कैंसर की जेनेरिक दवा पर बेस्ड है। इस फिल्म से यह भी पता चलता है कि चीनी लोगों की भारतीय दवाइयों पर निर्भरता कैसे बढ़ रही है।

यह फिल्म एक कैंसर रोगी पर बनी है जो भारत से सस्ती दवाएं खरीदने के लिए गिरफ्तारी का जोखिम उठाता है। चीनी मीडिया में यह भी कहा जा रहा है कि डाइंग टू सर्वाइव एक अमेरीकी फिल्म 'डलास बायर्स क्लब' की रीमेक है।


 

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कैंसर के मरीज की कहानी है फिल्म

चीनी मीडिया के मुताबिक, यह फिल्म कैंसर के एक मरीज लू योंग की असल ज़िंदगी पर बनी है। लू पूर्वी जिआंगसू प्रांत का एक टेक्स्टाइल व्यापारी हैं।

उसे एक तरह के कैंसर क्रॉनिक मेलॉइड ल्यूकेमिया से पीड़ित है। उसे भारत से नकली दवाइयां लाकर कैंसर के मरीजों को बेचने के आरोप में वर्ष 2013 में अरेस्ट किया गया था। इस फिल्म के हिट होने से जहां चीनी मीडिया हैरान है, वहीं इससे चीन में कैंसर की महंगी दवाओं के कारण आम लोगों होने वाली परेशानियों के बारे में भी पता चलता है। लू ने इस जेनेरिक दवा से चीन के सैकड़ों मरीजों की मदद की थी।


 

चीन में है भारतीय दवाइयों की खासी डिमांड  

चीन के एक सरकारी अखबार के मुताबिक, कुछ मरीजों को जेनेरिक दवाओं को लेकर चिंताएं हैं और चीन की घरेलू दवा बनाने वाली कंपनियां कम मुनाफे के चलते इन दवाइयों को बनाने से बचती भी हैं।

सरकारी मीडिया 'ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक चीन में मिलने वाली भारतीय दवाओं में ज़्यादातर कैंसर रोधी दवाइयां हैं। ये दवाइयां ज़्यादा असरदार होने के कारण चीन की बनने वाली दवाइयों की तुलना में ज्यादा प्रचलित हैं।

 

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