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    मारुति मानेसर प्लांट हिंसा केस में 13 को उम्र कैद, 4 को 5-5 साल की सजा, कंपनी के GM की हुई थी मौत

     
    नई दिल्ली.  मारुति सुजुकी के मानेसर प्लांट में लगभग पांच साल पहले हुई हिंसा के एक मामले में शनिवार को बड़ा फैसला आया। न्‍यूज एजेंसी के मुताबिक गुड़गांव की स्थानीय कोर्ट ने इस मामले में 13 लोगों को उम्रकैद जबकि 4 आरोपियों को 5-5 साल की जेल की सजा सुनाई। अदालत ने 14 दोषियों को जेल में काटी गई अवधि को पर्याप्त सजा मानते हुए रिहा कर दिया गया लेकिन इन पर  2500- 2500 रुपए का जुर्माना लगाया। इस मामले में कोर्ट पहले ही 31 लोगों को दोषी करार दे चुकी थी, जिनकी सजा आज तय होनी थी। हिंसा के इस मामले में कंपनी के एक बड़े अधिकारी की जलने से मौत हो गई थी और कई लोग घायल हो गए थे।
     
    फैसले का विरोध, 1 घंटे के हड़ताल का एलान
     
    उधर MSI वर्कर्स ने कोर्ट के फैसले का विरोध किया। इसमें गुरुग्राम, मानेसर के 3 मारुति सुजुकी प्‍लांटस और सुजुकी मोटरसाइकिल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के वर्कर्स भी शामिल थे। मारुति सुजुकी मजदूर संघ सेक्रेटरी कुलदीप झांगू ने कहा कि हम कोर्ट के फैसले से नाराज हैं और हमने फैसला किया है कि शनिवार यानी आज रात में 9 बजे से 10 बजे तक हड़ताल पर रहेंगे। 1 घंटे तक के लिए कंपनी के सभी 6 प्‍लांट में काम बंद रहेंगे।   वहीं दोषियों के परिजनों ने अदालत के फैसले को पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती देने की बात कही है। 
     
    117 लोग हो चुके हैं बरी
     
    मानेसर स्थित मारुति के प्लान्ट में 2012 में हुई भीषण तोड़फोड़ और आगजनी के मामले में गुड़गांव की एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशन्स कोर्ट ने बीती 10 मार्च को 31 लोगों को दोषी करार दिया था। साथ ही 117 लोगों को बरी कर दिया गया था।
     
    जिंदा जल गए थे मारुति के जीएम
     
    बता दें कि इस उपद्रव के दौरान कंपनी के तत्कालीन जीएम (एचआर) रहे अवनीश कुमार देव की जलने से मौत हो गई थी, वहीं कई घायल हो गए थे। इसके चलते 546 मजदूरों को बर्खास्त कर दिया गया था। इस मामले में पुलिस ने 147 लोगों को गिरफ्तार किया था। 11 लोग अभी जेल में हैं और बाकी जमानत पर बाहर हैं।
     
     
    यह था घटनाक्रम
     
    आईएमटी मानेसर स्थित मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड के मजदूरों ने प्लान्ट में 18 जुलाई 2012 को उपद्रव मचाया था। इस दौरान प्लान्ट के एक सेक्शन में आग गई थी। इससे तब जनरल मैनेजर (एचआर) रहे देव की जलने से मौत हो गई थी। इस घटना के बाद मैनेजमेंट ने 546 मजदूरों को निकाल दिया था, और 148 लेबर्स के खिलाफ केस दर्ज किया था।
     
    प्‍लांट में एक माह तक ठप रहा था उत्‍पादन
     
    करीब एक महीने तक प्लान्ट में प्रोडक्शन ठप रहा था। घटना के 12 दिन बाद सभी 148 आरोपियों का चालान कर दिया गया था। इनमें मुख्य आरोपी जियालाल समेत दर्जन भर यूनियन नेता शामिल थे। पुलिस ने अदालत में 400 पेज की चार्जशीट पेश की। इस केस में 182 गवाह बनाए गए थे, जिनमें 30 डॉक्टर, 40 से ज्यादा पुलिसकर्मी और करीब मैनेजमेंट के 70 इम्प्लॉइज थे। 

     

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