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    15 दिनों के लिए दिल्ली में टला जाट आंदोलन, बस और मेट्रो सेवाएं रहेंगी नॉर्मल

    नई दिल्ली। जाट नेताओं ने सोमवार को होने वाला दिल्ली कूच और संसद भवन घेराव का प्रोग्राम फिलहाल 15 दिनों के लिए टाल दिया है। हालांकि, आंदोलन जारी रहेगा। रविवार को हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर और जाट नेताओं के बीच एक बैठक हुई, जिसके बाद यह फैसला लिया गया है। जाट नेताओं के मुताबिक,  बातचीत में 7 में से 5 मांगों पर सहमति बनी है। सरकार ने एक कमेटी बनाने का भरोसा दिलाया है, जो जाटों की मांग पर काम करेगी। बैठक में केंद्रीय कैबिनेट मंत्री बिरेंद्र सिंह भी मौजूद थे।
     
    आल इंडिया जाट आरक्षण संघर्ष समिति के चेयरपरसन यशपाल मलिक का कहना है कि हमने हरियाणा सरकार से बात-चीत के बाद सोमवार से दिल्ली कूच और संसद भवन घेराव को टालने का फैसला किया है। उनका कहना है कि दिल्ली के हरियाणा भवन में हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर, केन्द्रीय मंत्री बिरेंद्र सिंह और केन्द्रीय मंत्री पीपी चौधरी की उपस्थिति में मांगों पर सहमति बनी। जिनको कल दिल्ली कूच में आना था, उन सभी को वापस धरनों पर पहुंचने के लिए बोला गया है। उन्हें धरनों पर सरकार से हुई बात-चीत के बारे में बताया जाएगा। 26 मार्च 2017 को हरियाणा प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक होगी और उसमें आगामी कितने धरने स्थगित होंगे और कितने चलेंगे, उस पर बात होगी। वहीं, हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर का कहना है कि केंद्र और राज्य सरकार जल्द ही जाटों को आरक्षण देने के लिए प्रॉसेस शुरू करेंगे।
     
    मेट्रो और बस सेवाएं रहेंगी नॉर्मल
    जाटों द्वारा 15 दिन के लिए दिल्ली कूच टालने के बाद स्पेशल सीपी दिपेंद्र पाठक का कहना है कि दिल्ली में बस और मेट्रो सेवाएं नॉर्मल रहेंगी। हालांकि यात्रियों की सुविधा के लिए सिक्योरिटी अरेंजमेंट बनी रहेगी। 
     
    कई जिलों में इंटरनेट सर्विस बंद हुई
    आंदोलनकारियों के दिल्ली पहुंचने के एलान के बाद हिसार, चरखी दादरी, रोहतक, झज्जर, भिवानी, कैथल, जींद, सोनीपत, पानीपत, फरीदाबाद, गुड़गांव और कई अन्य जिलों में इंटरनेट बंद कर दिया गया था। कुछ जिलों में खुला डीजल-पेट्रोल बेचने और शराब की बिक्री भी बंद कर दी गई। सोनीपत में कुंडली बॉर्डर और गोहाना रोड बाईपास पर भारी-भारी पत्थर रख दिए गए, ताकि आंदोलन करने वाले दिल्ली तक ट्रैक्टर-ट्रॉली या दूसरी गाड़ियां लेकर न पहुंच सकें।
     
    क्या है जाट समुदाय की मांग
    जाट अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणी के अन्तर्गत शिक्षा और सरकारी नौकरियों में आरक्षण की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा पिछले साल के आंदोलन के दौरान जेल में बंद लोगों को रिहा करने की भी मांग हो रही है। वहीं, प्रदर्शन के दौरान मारे गए और घायल लोगों के परिजनों को नौकरी देने की मांग की जा रही है। बता दें कि फरवरी 2016 में जाट आंदोलन के दौरान हुई हिंसा में 30 लोग मारे गए थे, जबकि 200 से अधिक लोग घायल हुए थे। इस दौरान सरकारी और निजी संपत्ति का भी नुकसान हुआ था।
     
    लागू की गई थी धारा144
    हरियाणा सरकार ने दिल्ली से सटे कई जिलों में धारा 144 लागू की थी। वहीं दिल्ली में भी ट्रैक्टरों के आने-जाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। इसके अलावा दिल्ली के बाहर जाने वाली मेट्रो सेवाओं पर भी पाबंदी लगाई गई थी। केंद्रीय सचिवालय, पटेल चौक और राजीव चौक सहित मध्य दिल्ली के 12 स्टेशन रविवार रात 8 बजे से बंद करने के आदेश दिए थे। वहीं, शांति बनाए रखने के लिए करीब 24,700 अर्धसैन्य कर्मियों को तैनात किया गया था।

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