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6,000 करोड़ का है जूतों का फेक मार्केट, बहादुरगढ़ में है बड़ी मार्केट

देश में बड़े फेक ब्रांड के कॉपी किए शूज का मार्केट 15-18 फीसदी की दर से बढ़ रहा है। इसकी हिस्सेदारी शू मार्कट में 15 फीसदी पहुंच गई है।

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नई दिल्ली। देश में बड़े फेक ब्रांड के कॉपी किए शूज का मार्केट 15-18 फीसदी की दर से बढ़ रहा है। इसकी हिस्सेदारी शू मार्कट में 15 फीसदी पहुंच गई है। एसोचैम के एक सर्वे के मुताबिक साल 2015 तक फेक शू मार्केट 6,000 करोड़ रुपए का खड़ा हो गया है। इंडस्ट्री के अनुसार देश के बाजारों में एडिडास, नाइक, प्यूमा जैसे बड़े ब्रांड के फेक जूतें सबसे ज्यादा कॉपी होते हैं।
 
तेजी से बढ़ रहा है फेक जूतों का मार्केट
 
एसोचैम के एक सर्वे के मुताबिक साल 2015 में शू मार्केट 38,700 करोड़ रुपए का था। ये सालाना 15 फीसदी की दर से बढ़ रहा है। साल 2012 में शू इंडस्ट्री 22,000 करोड़ रुपए की थी। फूटफेयर सेक्टर की 45 फीसदी डिमांड शहरी क्षेत्र से आती है। शू इंडस्ट्री के मुताबिक फेक जूतों का मार्केट करीब 6,000 करोड़ रुपए का है। ये मार्केट सालाना 15-18 फीसदी की दर से बढ रहा है।
कहां हैं इसके मैन्युफैक्चर
 
दिल्ली के पंजाबी बाग इंडस्ट्रियल एरिया, हरियाणा का बहादुरगढ़, पानीपत, मुंबई और कोलकाता में फेक शूज बनाने वाली इंडस्ट्री सबसे ज्यादा है। ये एरिया शूज मैन्युफैक्चरों का केंद्र भी माने जाते हैं क्योंकि यहां रॉ मैटिरियल से लेकर फाइनल प्रोडक्ट एक जगह मिल जाते हैं।
 
कैसे होते हैं कॉपी शूज
 
शूज मैन्युफैक्चरों के बड़े ब्रांड जैसे एडिडास, प्यूमा, नाइकी, रिबॉक के लोगो और नाम से स्पोर्ट शूज बनाते हैं। ये इंडियन शू ब्रांड मोची, क्लार्क, वुडलैंड जैसे ब्रांड के भी कॉपी किए शूज बिकते हैं।
 
कहां हैं ऐसे प्रोडक्ट का मार्केट
 
डुप्लिकेट शूज बनाने वाली दिल्ली के पंजाबी बाग कंपनी के मालिक ने नाम न देने की शर्त पर moneybhaskar.com को बताया कि गांव, कस्बो और छोटे शहरों और मेट्रो शहरों के थोक मार्केट में इनकी डिमांड सबसे ज्यादा है। गांव, कस्बो में लोगों को ब्रांड नाम याद नहीं होता। वह स्पोर्ट शूज और उस पर ब्रांड का नाम देखकर जूते खरीद लेते हैं। 
 
अच्छी लुक का मिलता है फायदा
 
कंपनी के मालिक ने बताया कि अच्छी डिजाइनिंग और जूते के फीते जल्दी बिक जाते हैं। ये मार्केट ऐसा जहां लोग कीमतों को लेकर ज्यादा अलर्ट हैं। उन्हें कम कीमत के स्पोर्ट शूज और सामान्य जूते चाहिए होते हैं। हमारी कीमतें कम होने कारण डिमांड ज्यादा है।
 
विज्ञापन का नहीं आता खर्च
 
जूतों के लिए रंग बनाने वाली बहादुरगढ़ की कंपनी के मालिक ने moneybhaskar.com को बताया कि इन कारोबारियों को विज्ञापन पर खर्च नहीं करना पड़ता। ये बेसिक जरूरत का प्रोडक्ट है जिसका कस्टमर प्राइस सेंसिटिव है। यही कारण है कि फेक ब्रांडेड जूतों का मार्केट तेजी से बढ़ रहा है।
 
अगली स्लाइड में जानें – क्यूं बढ़ रहा है फेक का कारोबार 
सस्ती लेबर के कारण मिल रही है मदद
 
पंजाबी बाग में जूतों के अन्य कारोबारी ने moneybhaskar.com को बताया कि यहां प्रोडक्शन कॉस्ट कम होने, रॉ मैटेरियल सस्ता होने, एक ही जगह जूतों का रॉ मैटेरियल मिलने और रिटेल सिस्टम अच्छा होने के कारण ये इंडस्ट्री ग्रोथ कर रही है।
 
कंपनियों ने किए केस दर्ज
 
एडिडास और नाइकी ने फेक प्रोडक्ट बेचने वाले मैन्युफैक्चरों और रिटेलरों के खिलाप शिकायत मिलने पर कंप्लेंट की है। पुलिस और अथॉरिटी ने इनके खिलाफ एक्शन भी लिया है।
 
फेक जुते पर पर पड़ी रेड
 
पुलिस ने कई बार उन दुकानों पर छापे मारे हैं, जो नाइकी, एडिडास के जूते बेच रहे थे। इन जूतों पर नाइकी और एडिडास के लोगो थे। इन दुकानदारों के खिलाफ कार्यवाही की गई। सभी फेक नाम वाले जूतों को पुलिस ने कई बार जब्त किया है।
 
कंपनियों का कहना अथॉरिटी करे मदद
 
एक्शन शूज के एमडी राजकुमार गुप्ता ने कहा कि ऐसी ट्रेड प्रेक्टिस बंद होनी चाहिए क्योंकि इससे शूज इंडस्ट्री को नुकसान हो रहा है। ये फेक मार्केट शू इंडस्ट्री को 6,000 करोड़ रुपए का नुकसान पहुंचा रहे हैं। सरकार और पुलिस को इसमें इंडस्ट्री की मदद करनी होगी।
 
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