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इलाज से गल गईं शरीर की हड्डियां, अब 1500 करोड़ हर्जाना देगी ये कंपनी

गलत ढंग से किए गए कूल्हा प्रत्यारोपण के मामले में जॉनसन एंड जॉनसन और उसकी सहयोगी कंपनी पर 16 सौ करोड़ का जुर्माना लगा

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नई दिल्‍ली.. किसी मरीज का डॉक्‍टर के पास जाने का मकसद सही इलाज होता है। लेकिन कई ऐसे भी मामले आ जाते हैं जिसमें मरीज को डॉक्‍टर या अस्‍पताल की लापरवाही की कीमत चुकानी पड़ती है। कुछ ऐसी ही लापरवाही बच्चों के लिए देखभाल के प्रॉडक्ट बनाने वाली कंपनी जॉनसन एंड जॉनसन और उसके सहयोगी  DePuy ने की है। इनकी लापरवाही की वजह से इलाज कराने गए 6 लोगों की हड्डियां गल गई हैं । तो आइए, जानते हैं कि क्‍या है पूरा मामला।  आगे पढ़ें - क्‍या है मामला 

 

 


 

 

मामला अमेरिका का

 

दरअसल, यह मामला अमेरिका के न्‍यूयॉर्क शहर का है। इस शहर के 6 मरीजों ने टेक्‍सास की स्‍थानीय अदालत में शिकायत दायर की थी कि उन्‍होंने जॉनसन एंड जॉनसन के सहयोगी न्‍यूरोसर्जरी कंपनी  DePuy में हिप्स ट्रांसप्लांट कराया। लेकिन ट्रांसप्‍लांट के बाद उन्हें हिप्‍स के खराब होने और अन्य कई तरह की बीमारियों का सामना करना पड़ा है। शिकायत के मुताबिक मरीजों के शरीर के अलग - अलग हिस्‍सों की हड्डियां गलने लगीं। आगे पढ़ें - अदालत ने कंपनी को माना दोषी

 1600 करोड़ रुपए का जुर्माना 

 

टेक्‍सास की अदालत ने गलत ढंग से किए गए हिप्‍स ट्रांस्‍प्‍लांट के मामले में जॉनसन एंड जॉनसन और उसकी सहयोगी कंपनी को दोषी माना है और उसपर 1600 करोड़ रुपए (24.7 करोड़ डॉलर) का जुर्माना लगाया है। न्‍यूयॉर्क के 6 मरीजों के बीच यह रकम बांटी जाएगी। अदालत ने अपने फैसले में माना कि मेटल ऑन मेटल हिप्स ट्रांसप्लांट करने के बाद कंपनी ने मरीजों को इसके खतरे के प्रति आगाह नहीं किया।आगे पढ़ें - कंपनी ने जज पर उठाए सवाल 

कंपनी ने जज पर उठाए सवाल 

 

कंपनी ने सुनवाई शुरू होने से पहले अदालत के जज एडवर्ड किनकेड के अधिकारों पर सवाल खड़ा किया था।उसने अपीलीय अदालत में इस तरह के केसों की सुनवाई संघीय अदालत में करने पर आपत्ति जताई थी, लेकिन तब जजों के पैनल ने फैसला दिया था कि संघीय अदालत मामले की सुनवाई करे। कंपनी ने कहा है कि वह फैसले के विरोध में अपीलीय अदालत में याचिका दायर करेगी। 

 


9 सप्‍ताह की सुनवाई के बाद फैसला 

उसके बाद 18 सितंबर से शुरू हुई नौ सप्ताह की सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला आया। बता दें कि जॉनसन एंड जॉनसन के खिलाफ इस तरह के 9700 मामले अदालतों में लंबित हैं। इस फैसले के बाद सभी मामलों पर असर पड़ेगा। हालांकि कंपनी के लिए फैसले के खिलाफ अपील का विकल्प खुला है।

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