Home »States »Punjab» HC Held That The Tata Project Cannot Be Allowed As It Was Well Within The Catchment Area Of Sukhna Lake.

HC ने टाटा हाउसिंग के 1800 करोड़ के प्रोजेक्ट पर लगाई रोक, बनने थे 92 हजार फ्लैट

 
 
नई दिल्‍ली. दिल्‍ली हाईकोर्ट ने बुधवार को टाटा कैमलॉट हाउसिंग प्रोजेक्ट के इन्वेस्टर्स को बड़ा झटका दिया। कोर्ट ने हुए कहा कि इस प्रोजेक्ट को मंजूरी नहीं दी जा सकती, क्योंकि यह चंडीगढ़ में सुखना लेक के कैचमेंट एरिया में आता है। कोर्ट ने सुखना कैचमेंट एरिया की ग्राम पंचायत द्वारा दी गई मंजूरी और इस पर पंजाब सरकार की रजामंदी को भी खारिज कर दिया। 
 
1800करोड़ रु का है टाटा हाउसिंग का यह प्रोजेक्ट
 
टाटा हाउसिंग का यह प्रोजेक्ट 1800 करोड़ रुपए का है, जिसमें 19 टावर में 92,100 फ्लैट बनने हैं। चंडीगढ़ कैपिटल कॉम्पलेक्स के निकट 53.39 एकड़ जमीन में बनने वाले सभी टावर 12 से 25 स्टोरीज के बीच बनने हैं। इस प्रोजेक्ट पर अभी काम शुरू होना है।
 
 
 
कोर्ट ने क्‍या कहा
 
चीफ जस्टिस जी रोहिणी और जस्टिस राजीव सहाय की बेंच ने एडवोकेट आलोक जग्‍गा की उस अपील पर यह फैसला सुनाया है, जिसमें सुखना लेक के किनारे टाटा हाउसिंग प्रोजेक्‍ट को मंजूरी दी गई थी। बेंच ने कहा कि कोर्ट  ने भारतीय नक्शा सर्वे के अनुसार संबंधित क्षेत्र का निरीक्षण किया है। यह क्षेत्र सुखना झील के जलग्रहण इलाके में पड़ता है। ऐसे में वहां आवासीय परियोजना को मंजूरी नहीं दी जा सकती। बेंच ने यह आदेश अधिवक्ता आलोक जग्गा की याचिका पर दिया है।
 
यह है मामला
 
टाटा हाउसिंग बोर्ड डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड के चंडीगढ़ के हाउसिंग प्रोजेक्ट टाटा कैमलॉट के निर्माण को लेकर विवाद लंबे समय से चल रहा है। इस विवाद की शुरुआत तब हुई जब पूर्व चीफ जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस एजी मसीह पर आधारित खंडपीठ ने 14 मार्च 2011 को आदेश जारी किए थे कि सुखना के कैचमेंट इलाके में किसी भी प्रकार की हाउसिंग कलोनी या भवन निर्माण नहीं होगा। लेकिन इस फैसले को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में एक बार फिर पुर्नविचार की अपील की गई। इसके बाद अगस्‍त 2013 में चीफ जस्टिस संजय किशन कौल एवं जस्टिस एजी मसीह पर आधारित खंडपीठ ने कंपनी के वाइस प्रेसिडेंट संजीव सूरी द्वारा हाईकोर्ट में प्रोजेक्ट क्लीयरेंस संबंधी एफिडेविट को देखने के बाद प्रोजेक्ट पर लगी रोक हटाने के निर्देश जारी कर दिए।
 
सुप्रीम कोर्ट पहुंचे याचिकाकर्ता
 
इसके बाद सरीन मेमोरियल लीगल एड फाउंडेशन और शहर के ही एडवोकेट आलोक जग्गा ने भी सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की । लेकिन यहां सुप्रीम कोर्ट द्वारा मामले को दिल्‍ली हाईकोर्ट को सौंप दिया गया।  सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में कहा गया था कि इस प्रोजेक्ट से चंडीगढ़ के स्वरूप को खतरा है। सुखना लेक, शिवालिक रेंज और सुखना वाइल्डलाइफ सैंक्चुरी पर इसका असर पड़ेगा। याचिकाओं में कैमलॉट प्रोजेक्ट को लेकर टाटा और पंजाब सरकार पर सवाल उठाया गया।

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