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44 करोड़ मोबाइल ग्राहकों की रातोंरात बदलेेगी कंपनी, Idea-वोडा का प्लान

जल्द ही वह दिन आने जा रहा है, जब देश के लगभग 44 करोड़ मोबाइल सब्सक्राइबर्स की कंपनी रातोंरात बदल जाएगी।

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नई दिल्ली. जल्द ही वह दिन आने जा रहा है, जब देश के लगभग 44 करोड़ मोबाइल सब्सक्राइबर्स की कंपनी रातोंरात बदल जाएगी। दरअसल आइडिया और वोडाफोन के मर्जर की प्रक्रिया तेज हो गई है। आदित्य बिड़ला ग्रुप की कंपनी आइडिया ने नई कंपनी का नाम वोडाफोन आइडिया करने का प्रपोजल तैयार किया है। इस पर विचार करने के लिए आगामी 26 जून को आइडिया की एक्स्ट्रा आर्डिनरी जनरल मीटिंग बुलाई गई है।

 

भारत में हैं दोनों कंपनियों के 44 करोड़ सब्सक्राइबर्स

वोडाफोन और आइडिया के मर्जर के बाद सामने आने वाली नई कंपनी भारत की सबसे बड़ी टेलिकॉम कंपनी होगी। टेलिकॉम कंपनियों के संगठन सेल्युलर ऑपेटर असोसि‍एशन ऑफ इंडि‍या (सीओएआई) के अप्रैल के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में वोडाफोन के सब्सक्राइबर्स की संख्या लगभग 22.20 करोड़ हैं। वहीं आइडिया के सब्सक्राइबर्स की संख्या 21.67 करोड़ है। फिलहाल 30.86 करोड़ सब्सक्राइबर्स के साथ भारती एयरटेल देश की सबसे बड़ी टेलिकॉम कंपनी है।

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नई कंपनी का नाम हो सकता है वोडाफोन आइडिया

आइडिया ने वोडाफोन के साथ मर्जर के बाद बनने वाली नई कंपनी का नाम ‘वोडाफोन आइडिया लिमिटेड’ करने के प्रस्ताव पर विचार करने के लिए 26 जून को ईजीएम बुलाई है। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज को दी गई फाइलिंग के मुताबिक 26 जून को होने वाली ईजीएम में कंपनी के नाम में बदलाव पर विचार किया जाएगा। ऐसा होता है तो आइडिया और वोडाफोन के सब्सक्राइबर्स के लिए नई कंपनी का नाम वोडाफोन इंडिया हो जाएगा।

फाइलिंग के मुताबिक, रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज द्वारा नए सर्टिफिकेट ऑफ इनकॉरपोरेशन जारी होने के बाद पुरानी कंपनी ‘आइडिया सेल्युलर लिमिटेड’ की जगह ‘वोडाफोन आइडिया लिमिटेड’ ले लेगी।

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ऐसे बंट सकती है हिस्सेदारी

अनुमान है कि मर्जर के बाद बनने वाली नई कंपनी में वोडाफोन के पास 45.1 फीसदी, आदित्य बिड़ला ग्रुप की 26 फीसदी और आइडिया के शेयरहोल्डर्स की 28.9 फीसदी हिस्सेदारी होगी। नई कंपनी के पास पहले दिन से ही लगभग 43 करोड़ मोबाइल सब्सक्राइबर्स होंगे।

 

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इन प्रस्तावों पर भी होगा विचार

ईजीएम में नाम में बदलाव के अलावा एनसीडी के माध्यम से कंपनी के द्वारा 15 हजार करोड़ रुपए का फंड जुटाने के प्रस्ताव पर भी चर्चा होगी। नोटिस में कहा गया, ‘समय-समय पर जारी की जाने वाली नॉन कन्वर्टिबल सिक्युरिटीज जो एनसीडी, सिक्योर्ड या अनसिक्योर्ड तक सीमित नहीं हैं, के लिए मेंबर्स और कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स से मंजूरी ली जानी है।’

कंपनी रिजॉल्यूशन पास होने की तारीख से एक साल के भीतर प्राइवेट प्लेसमेंट के आधार पर फंड जुटाने के लिए ईजीएम से मंजूरी लेगी।

 
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