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SC ने अम्‍बे वैली को टुकड़ों में बेचने की दी मंजूरी, महिंद्रा-पीरामल खरीदने की होड़ में

सुप्रीम कोर्ट ने अम्‍बे वैली की प्रॉपर्टी टुकड़ों में बेचने के लिए लिक्विडेटर को इजाजत दे दी है।

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नई दिल्‍ली. सुप्रीम कोर्ट ने अम्‍बे वैली की प्रॉपर्टी को टुकड़ों में बेचने के लिए लिक्विडेटर को इजाजत दे दी है। कोर्ट ने कहा कि अगर जरूरत पड़े तो उसे टुकड़ों में बेचा जा सकता है। वहीं लिक्विडेटर को कोर्ट को बताया कि महिंद्रा एंड महिंद्रा और पीरामल ग्रुप ने इस प्रॉपर्टी को खरीदने में दिलचस्पी दिखाई है।

 
अम्बे वैली की नीलामी हो
पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने बॉम्‍बे हाईकोर्ट के ऑफिशियल लिक्विडेटर से कहा था कि वह रिसीवर से मदद लें और इस प्रॉपर्टी की नीलामी सुनिश्चित करें। पीठ ने कहा था, ‘हम चाहते हैं कि प्रॉपर्टी नीलाम हो।’ पीठ ने लिक्विडेटर से इस काम के लिए बॉम्‍बे हाई कोर्ट के जजों से निर्देश लेने का आदेश दिया था।
 
सहारा ने मांगा था समय
सहारा ग्रुप ने कोर्ट से 9 हजार रुपए जमा कराने के लिए 18 माह का समय मांगा था। सहारा को 24 हजार करोड़ रुपए कोर्ट में जमा कराना है, जिससे प्रभावित लोगों को भुगतान किया जा सके। इसी राशि के हिस्‍से के रूप में 9 हजार करोड़ रुपए कोर्ट में जमा कराने हैं।
 
 
सेबी ने बताई थी खरीददारों के पीछे हटने की वजह
- सेबी ने दावा किया कि अम्बे वैली मैनेजमेंट ने सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस, पुणे को एक लेटर लिखा है और इसके चलते इच्छुक खरीददार अम्बे वैली के ऑक्शन में भाग लेने से पीछे हट रहे हैं।
-सहारा ग्रुप की पैरवी करते हुए सीनियर वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि अम्बे वैली के लिए कोई बिडर सामने नहीं आया और प्रॉपर्टी पुलिस को हैंडओवर नहीं की गई है, जिसके चलते ऑक्शन नहीं हो सका है।
-रोहतगी ने कहा कि लोकल पुलिस को एक पत्र लिखकर प्रॉपर्टी में पुलिस कर्मचारी तैनात करने के लिए लिखा गया है, क्योंकि कंपनी रेसिडेंट्स को निजी सुरक्षा देने में असमर्थ साबित हो रही है। कोर्ट ने कहा कि वह अभी भी सहारा ग्रुप के खिलाफ कोई आदेश पारित नहीं करेगी, क्योंकि रोहतगी को अभी पूरा ब्योरा देना है।
-ऑफीशियल लिक्विडेटर ने इस प्रोजेक्ट के लिए 37 हजार रुपए कीमत तय की थी, जबकि कंपनी इसका मार्केट प्राइस दोगुना होने की बात कर रही थी।
 
क्या है सेबी-सहारा समूह विवाद?
- सहारा ग्रुप की 2 कंपनियों-सहारा इंडिया रियल एस्टेट कॉरपोरेशन लिमिटेड (SIRECL)और सहारा हाउसिंग इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (SHICL) ने रियल एस्टेट में इन्वेस्टमेंट के नाम नाम पर 3 करोड़ से ज्यादा इन्वेस्टर्स से 17,400 करोड़ रुपए जुटाए थे।
- सुब्रत रॉय 4 मार्च 2014 को जेल गए थे। बता दें, रॉय के अलावा उनके दो डायरेक्‍टर रवि शंकर दुबे और अशोक रॉय चौधरी को भी कोर्ट का आदेश नहीं मानने पर गिरफ्तार किया गया था। वहीं, एक दूसरी कंपनी की डायरेक्‍टर वंदना भार्गव को कस्‍टडी में नहीं लिया गया।
- सितंबर 2009 में सहारा प्राइम सिटी ने आईपीओ लाने के लिए सेबी के पास डॉक्युमेंट्स जमा किए, जिसके बाद सेबी ने अगस्त 2010 में दोनों कंपनियों की जांच के आदेश दिए थे।
- कंपनियों में गड़बड़ी मिलने पर विवाद बढ़ता गया और मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया। सुप्रीम कोर्ट ने सहारा समूह की दोनों कंपनियों को इन्वेस्टर्स के 36 हजार करोड़ रुपए लौटाने का आदेश दिया।
 
 
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