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गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्‍ट्रपति का संबोधन, डिजिटल अर्थव्यवस्था पर जोर

गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्‍ट्रपति का संबोधन, डिजिटल अर्थव्यवस्था बनाने पर जोर

president Ram Nath Kovind addresses nation on Republic Day eve
 
 

नई दिल्‍ली। गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि हमें 21वीं सदी की डिजिटल अर्थव्यवस्था बनाने पर जोर देना चाहिए। इसके साथ ही उन्‍होंने जीनोमिक्स, रोबॉटिक्स और ऑटोमेशन की चुनौतियों से निपटने के लिए भी तैयार रहने की बात कही। 


डिजिटल अर्थव्यवस्था पर जोर 


उन्होंने कहा कि हमने साक्षरता को काफी बढ़ाया है। अब हमें शिक्षा के दायरे और बढ़ाने होंगे। शिक्षा-प्रणाली को ऊंचा उठाना और उसके दायरे को बढ़ाना तथा 21वीं सदी की डिजिटल अर्थव्यवस्था, रोबॉटिक्स और ऑटोमेशन की चुनौतियों के लिए समर्थ बनना हमारा उद्देश्य होना चाहिए। राष्ट्रपति ने कहा, 'इनोवेटिव बच्चे ही एक इनोवेटिव राष्ट्र का निर्माण करते हैं। इस लक्ष्य को पाने के लिए हमें एक जुनून के साथ जुट जाना चाहिए। हमारी शिक्षा-प्रणाली में, रटकर याद करने और सुनाने के बजाय, बच्चों को सोचने और तरह-तरह के प्रयोग करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।' 


हर नागरिक, लोकतंत्र को शक्ति देता है 


69वें गणतंत्र दिवस की देशवासियों को बधाई देते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि यह राष्ट्र के प्रति सम्मान की भावना के साथ हमारी संप्रभुता का उत्सव मनाने का भी अवसर है। उन्होंने कहा कि आज का दिन हमारे लोकतांत्रिक मूल्यों को नमन करने का दिन है। उन्‍होंने कहा कि हमारा हर नागरिक, हमारे लोकतंत्र को शक्ति देता है। देश के विविध क्षेत्रों में काम करने वाले हर एक सैनिक, किसान, पुलिस, अद्धसैनिक बल, डॉक्टर, मां, नर्स, हर एक स्वच्छता कर्मचारी, अध्यापक, वैज्ञानिक, हर एक इंजिनियर के योगदान का जिक्र किया। 

 

कुपोषण को दूर करने की चुनौती 


राष्ट्रपति ने कहा, 'हमने खाद्यान्न उत्पादन में काफी बढ़ोतरी की है लेकिन अभी भी कुपोषण को दूर करने और प्रत्येक बच्चे की थाली में जरूरी पोषक तत्व उपलब्ध कराने की चुनौती बनी हुई है। यह हमारे बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए और देश के भविष्य के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है।' उन्होंने आगे कहा कि मुहल्ले-गांव और शहर के स्तर पर सजग रहने वाले नागरिकों से ही एक सजग राष्ट्र का निर्माण होता है। हम अपने पड़ोसी के निजी मामलों और अधिकारों का सम्मान करते हैं। त्योहार मनाते हुए, विरोध प्रदर्शन करते हुए या किसी और अवसर पर, हम अपने पड़ोसी की सुविधा का ध्यान रखें। 


दान देने की भावना हमारी संस्‍कृति 


राष्ट्रपति ने कहा कि सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े हुए लोगों के जीवन को खुशहाल बनाना ही हमारे लोकतंत्र की सफलता की कसौटी है। गरीबी के अभिशाप को, कम-से-कम समय में, जड़ से मिटा देना हमारा कर्तव्य है। यह कर्तव्य पूरा करके ही हम संतोष का अनुभव कर सकते हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि ऐसे राष्ट्र में संपन्न परिवार अपनी इच्छा से सुविधा का त्याग कर देता है।  यह सब्सिडी वाली एलपीजी हो या कोई और सुविधा ताकि इसका लाभ किसी जरूरतमंद परिवार को मिल सके। दान देने की भावना हमारी युगों पुरानी संस्कृति का हिस्सा है। आइए, हम इसे मजबूत बनाएं। 

 
 
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