Home » States » Delhipatanjali ayurved faces big difficulty in the race to buy ruchi soya

फंस गए बाबा रामदेव, बेकार हो सकता है 5700 करोड़ का दांव

रुचि सोया को खरीदने की होड़ में शामिल बाबा रामदेव की पतंजलि आयुर्वेद इस बार बुरी तरह फंस गई है।

patanjali ayurved faces big difficulty in the race to buy ruchi soya

नई दिल्ली. रुचि सोया को खरीदने की होड़ में शामिल बाबा रामदेव की पतंजलि आयुर्वेद इस बार बुरी तरह फंस गई है। दिलचस्प यह है कि पहले जहां पतंजलि कर्ज से दबी कंपनी को खरीदने की होड़ में आगे थे, लेकिन अब वह अडानी ग्रुप की कंपनी से पिछड़ते दिख रहे हैं। हकीकत में अभी पतंजलि के पास बोली बढ़ाने का एक मौका है, लेकिन आखिरी मौका अडानी ग्रुप की कंपनी को ही मिलेगा। गौरतलब है कि अडानी ग्रुप ने जहां 6,000 करोड़ रुपए, वहीं पतंजलि ने 5,700 करोड़ रुपए की बोली लगाई है।

 

 

मिलेगा एक और मौका
दरअसल रुचि सोया के लेंडर्स ने ज्यादा से ज्यादा कीमत हासिल करने के लिए ऑक्शन के लिए स्विस चैलेंज मेथड के तहत बोलियां मांगी थीं। पहले राउंड में 4300 करोड़ रुपए की बोली के साथ सबसे आगे थी, वहीं दूसरे नंबर पर 3300 करोड़ रुपए की बोली के साथ अडानी ग्रुप की कंपनी अडानी विलमर थी। दूसरे राउंड में अडानी विलमर ने अपनी बोली को खासा बढ़ा दिया, जो 6 हजार करोड़ रुपए हो गई। वहीं पतंजलि आयुर्वेद 5700 करोड़ रुपए की बोली लगाने के साथ पीछे छूट गई। हालांकि अब भले ही पतंजलि के पास बोली बढ़ाने का मौका है, लेकिन एक पेंच होने से रामदेव की कंपनी बुरी तरह फंस गई है।

 

 

ऐसे फंस गई पतंजलि
स्विस चैलेंज मेथड के तहत अब पतंजलि को अडानी विलमर की 6000 करोड़ रुपए की बोली की बराबरी करने या बोली बढ़ाने का मौका है। इसके लिए पतंजलि को 16 जून तक का भी समय मिला है। ऐसे में पतंजलि 16 जून तक अपनी बोली बढ़ा सकती है। हालांकि इस स्विस चैलेंज मेथड के तहत यदि पतंजलि अपनी बोली बढ़ाती है तो फिर आखिरी बोली लगाने का मौका अडानी ग्रुप को मिलेगा। आखिरी मौका अडानी ग्रुप को मिलने का मतलब है कि अब पतंजलि उसी स्थिति में रुचि सोया को खरीद सकती है, यदि अडानी ग्रुप आखिरी बोली लगाने से इनकार कर दे। इससे ये तो साफ है कि आखिरी मौका अडानी ग्रुप को मौका मिलेगा, ऐसे में उसकी झोली में रुचि सोया के आने की संभावनाएं ज्यादा लगती हैं। 
अडानी ग्रुप की अडानी विलमर फॉर्च्यून ब्रांड के नाम से कुकिंग ऑयल बेचती है, जो देश का सबसे बड़ा इडिबल ऑयल ब्रांड है।

 

 

पतंजलि ने बिडिंग पर उठाए सवाल
ऐसा लगता है कि पतंजलि भी हालात को समझ चुकी है। पतंजलि ने अडानी विलमर की एडवाइजर के तौर पर काम कर रही लॉ फर्म सिरिल अमरचंद मंगलदास के इस्तीफे से संबंधित मीडिया रिपोर्ट्स का उल्लेख करते हुए प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए। लॉ फर्म रुचि सोया के रिजॉल्युशन प्रोफेशनल को भी परामर्श दे रही है।
पतंजलि के स्पोक्सपर्सन एस के तिजारावाला ने कहा, ‘हम आश्चर्यचकित हैं और इस संबंध में सीओसी से जानकारी मांगी है। हमने सिरिल अमरचंद मंगलदास के इस्तीफे के मुद्दे पर लेटर लिखा है।’

 

 

रुचि सोया पर है 12 हजार करोड़ का कर्ज
लेंडर्स का रुचि सोया पर 12,000 करोड़ रुपए का कर्ज बकाया है। सूत्रों ने कहा कि लेंडर्स शरुआती बिड्स से संतुष्ट नहीं थे, जहां 4,300 करोड़ रुपए की बिड के साथ पतंजलि सबसे बड़ी बिडर थी। वहीं अडानी ने 3,300 करोड़ रुपए की बोली लगाई थी। स्विस चैलेंज मेथड के अंतर्गत अगर पतंजलि अडानी की 6,000 करोड़ रुपए की बिड के बराबर या उससे बड़ा ऑफर लाते हैं तो अडानी ग्रुप की कंपनी को एक और मौका मिलेगा। 

 

 

रुचि सोया के लिए ये कंपनियां थी होड़ में 
रुचि सोया को खरीदने के लिए पतंजलि और अडानी के अलावा इमामी एग्रोटेक और गोदरेज एग्रोवेट ने भी दिलचस्पी दिखाई थी। पतंजलि आयुर्वेद का इडिबल ऑयल की रिफाइनिंग और पैकेजिंग के लिए इंदौर की रुचि सोया के साथ पहले से टाई-अप है। साथ ही कंपनी कुकिंग ऑयल बिजनेस में विस्तार करना चाहती है।

 

 

prev
next
मनी भास्कर पर पढ़िए बिज़नेस से जुड़ी ताज़ा खबरें Business News in Hindi और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट