Home » States » Delhiसेक्स डॉल को क्यों कहा जा रहा है अमीरों का डर्टी गेम- why robotic doll industry in controversy

एक डॉल पर खर्च कर रहे 20 लाख, इस बिजनेस में उतरे दुनिया के अमीर

विशेषज्ञ रोबोटिक सेक्स डॉल को अमीरों का ऐसा डर्टी गेम मान रहे हैं जो समाज के लिए बड़ा खतरा है।

1 of

नई दिल्ली।  अब एक नए तरह के रोबोट की इंडस्ट्री खड़ी हो रही है, जो सेक्स डॉल का विकसित रूप है। यह आपके आस-पास इंसानों के मौजूद होने का एहसास कराती है। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि ये डॉल जिसे कम्पेनियन रोबोट कहें या सेक्स बॉट, इंसानों के साथ भावनात्मक रूप से भी जुड़ेंगी। वहीं, विशेषज्ञ इसे अमीरों का ऐसा डर्टी गेम मान रहे हैं जो समाज के लिए बड़ा खतरा है। 

 

असल में हम यहां बात कर रहे हैं सेक्स डॉल इंडस्ट्री में हो रहे तेजी से बदलाव की। असल में अब इस इंडस्ट्री का इस्तेमाल सिर्फ फन के लिए नहीं, बल्कि लाइफ पार्टनर बनाने के लिए किया जाने लगा है। आज हम अपनी इस रिपोर्ट के जरिए बता रहे है कि किस तरह से अब लैब में लाइफ पार्टनर बनाने की तैयारी की जा रही है। इससे किस तरह से न सिर्फ समाज बल्कि इकोनॉमी के समीकरण भी बदल सकते हैं। इसे अमीरों का डर्टी गेम क्यों माना जा रहा है...... 

 

 

 

ये हैं अमीरों के डर्टी गेम के संकेत

 

कीमत 20 लाख रुपए तक 
रोबोटिक फीचर वाली डॉल की कीमत 20 लाख रुपए तक है। जाहिर है कि इतनी कीमत चुकाने वाला पैसे वाला ही होगा। वहीं, जो कंपनियां इसे बना रही हैं, वह भी इन्हीं अमीरों की डिमांड पूरी कर रही हैं। 


पुरूषों के लिए ही ज्यादा क्यों 
रिस्पॉन्सिबल रोबोटिक्स की रिपोर्ट के अनुसार जितने भी सेक्सबॉट बने हैं, उसमें से 95 फीसदी से ज्यादा फीमेल बॉडी पर आधारित हैं। सीधे शब्दों में कहें तो मौजूदा रोबोटिक फीचर वाली डॉल पुरुषों की डिमांड और मोटा पैसा चुकाने वालों की सेक्सुअल फैंटेसी के हिसाब ही काम कर रही है। 

 

महिलाओं के लिए डेंजरस तो नहीं 
हाल में एक कंपनी ट्रू कम्पेनियन ने ऐसी रियलडॉल  को लॉन्च किया है, जिसे प्रतिरोध करने के लिए डिजाइन किया गया है। बहुत से लोग मान रहे हैं कि यह रेप का ही सिंबल है। न्यू स्टेटमैन की रिपोर्ट के अनुसार यह रोबोट महिलाओं के लिए इस दुनिया को और खतरनाक बना देगा। 

 

सेक्स ही पहला पड़ाव 
फेडरेशन ऑफ रिस्पॉन्सिबल रोबोटिक्स रिपोर्ट के मुताबिक, मार्केट में उतरने के लिए तैयार सेक्सबॉट वास्तव में इंसानी शरीर का सिर्फ पोर्न वर्जन है। इनमें अधिकांश हाईटेक सेक्स डॉल ही हैं। इस वजह से इन प्रोजेक्ट पर सवाल उठने लगे हैं। 

 

 

आगे पढ़ें, रोबोटिक डॉल के बारे में

 

एक नई तरह की डॉल 
बीबीसी में छपी खबर के अनुसार एबेयस क्रिएशन नाम की कंपनी ने एक सेक्स डॉल डेवलप किया है, जिसे हार्मनी नाम दिया गया है। हार्मनी  चल सकती है और बातें भी कर सकती है। वह दूसरी लड़कियों से जलन महसूस करती है और कहती है कि उस लड़की को फेसबुक से हटा दो। 

 

ऑर्डर पर मिलेगी पार्टनर
पर्सनल रोबोटिक्स इंडस्ट्री का लक्ष्य है कम्पेनियन रोबोट बनाना, जो इंसानों के लाइफ पार्टनर की तरह रह सके। इसके लिए आप ऑर्डर दे सकते हैं कि डॉल को गुस्सैल नेचर वाली बनाना है कि शर्मीली नेचर वाली। यानी आपकी पसंद पर कंपनी इस तरह के डॉल तैयार करेगी।  

 

कंपनी कर रही है बचाव 
सेक्सबॉट के आइडिया के साथ इन पर विवाद भी शुरू हो गया है। समाज का एक बड़ा वर्ग इनकी जरूरत पर सवाल उठा रहा है। वहीं, सेक्सडॉल बनाने वाली कंपनी रियलडॉल के सीईओ मैट मैक्कुलन का कहना है कि उनकी सेक्स डॉल ने कई लोगों को सहारा दिया है। 

 

आगे पढ़ें, क्यों डरने लगे हैं विशेषज्ञ 

 

लोग डॉल के साथ ही रहना पसंद न करने लगें

 

बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक लेसेस्टर के डी मोन्टफोर्ट यूनिवर्सिटी में रोबोट नीतिशास्त्र की प्रोफेसर कैथलीन रिचर्डसन इस तरह के रोबोट को लेकर चिंतित हैं। उनका कहना है कि वैसे ही लोग रिश्‍ते बनाए रखने के संकट से जूझ रहे हैं, अगर रोबोट इंसानों की जगह लेने लगेंगे तो समाज का संगठन ही बगिड़ जाएगा। 

 

विशेषज्ञ इसे समाज के लिए बड़ा खतरा मान रहे हैं, जिससे इंसानी रिश्‍ते बिगड़ सकते हैं। द गार्डियन के मुताबिक इसी साल अप्रैल में चीन के एक इंजीनियर शैंग जिजियांग ने रोबोट के साथ शादी की है, क्योंकि काफी कोशिशों के बाद ये शख्स अपने लिए लाइफ पार्टनर तलाश नहीं कर सका। आगे ऐसे और उदाहरण भी आ सकते हैं। 

 

 

आगे पढ़ें, कितनी बड़ी है सेक्स डॉल इंडस्ट्री 

2020 तक 5000 करोड़ डॉलर की होगी इंडस्ट्री 


फोर्ब्स के मुताबिक, 2020 तक सेक्स टेक इंडस्ट्री 5000 करोड़ डॉलर यानी करीब 3 लाख करोड रुपए की हो जाएगी। फिलहाल, ये 1500 करोड़ डॉलर यानी करीब 97 हजार करोड़ रुपए की है।  वहीं, पर्सनल रोबोटिक्स के मार्केट पर नजर रखने वाली पीएंडएस मार्केट रिसर्च के मुताबिक, केयर-बॉट (केयर रोबोट) का मार्केट साइज 2022 तक बढ़कर 3400 करोड़ डॉलर (2.2 लाख करोड़ रुपए) का हो जाएगा। 2015 में ये 380 करोड़ डॉलर (24700 करोड़ रुपए) का था।  

 

prev
next
मनी भास्कर पर पढ़िए बिज़नेस से जुड़ी ताज़ा खबरें Business News in Hindi और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट