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जिसके दम पर अमेरिका ने जीत लिया इराक, भारत में बनेगा वह फाइटर प्लेन

इंडियन एयरफोर्स की ताकत बढ़ाने की दिशा में भारत को बड़ी सफलता हासिल हुई।

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नई दिल्ली. इंडियन एयरफोर्स की ताकत बढ़ाने की दिशा में भारत को बड़ी सफलता हासिल हुई। दरअसल में भारत में उस फाइटर प्लेन को बनाने का रास्ता साफ हो गया, जिसके दम पर अमेरिका दुनिया के कई देशों को दहला चुका है। इस प्लेन के दम पर अमेरिका ने जहां इराक को सद्दाम हुसैन के शासन से मुक्त कराया, वहीं अब भी आईएसआईएस के खिलाफ इसका बढ़-चढ़कर इस्तेमाल किया हो रहा है।

 

 

ये हैं खूबियां

-एफ-18 सुपर हॉर्नेट को अमेरिका की कंपनी बोइंग बनाती है। यह ट्विन इंजन फाइटर जेट है, जो अतिरिक्त फ्यूल भी ले जा सकता है।

-इसकी अधिकतम स्पीड 2 हजार किलोमीटर प्रति घंटा है। यह विमान एयर टू एयर मिसाइल और एयर टू सरफेस वीपन ले जाने में सक्षम है। साथ ही किसी भी रडार के लिए इसे पकड़ना लगभग असंभव है।

-मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस विमान की कॉस्ट 500 करोड़ है, जो खरीददार देशों की मांग पर किए जाने वाले बदलाव के आधार पर बढ़ सकती है।

-इसके विंग बड़े होने के कारण यह ज्यादा हथियार ले जाने में सक्षम है।

-यह ट्विन सीट प्लेन है, जो हवा से हवा में मार कर सकता है।

-यह जमीनी सेना को भरपूर सहयोग देकर जंग को आसान बना देता है।

-इसके अलावा दुश्मन की सप्लाई लाइन को तबाह कर सकता है, जिसमें शिपिंग भी शामिल है।

 

भारत में बनेगा सुपर हॉर्नेट

दरअसल अब अमेरिकी कंपनी बोइंग के एफ-18 सुपर हॉर्नेट के भारत में प्रोडक्शन का रास्ता साफ हो गया। बोइंग ने इसके लिए महिंद्रा एंड महिंद्रा की डिफेंस आर्म और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के साथ समझौता किया। इस प्लेन का प्रोडक्शन पीएम नरेंद्र मोदी की योजना मेक इन इंडिया के तहत किया जाएगा।

 

 

आगे भी पढ़ें-इराकी विद्रोहियों और तालिबान पर हो रहा इस्तेमाल

 

 

इराक और सीरिया में खूब हुआ इस्तेमाल

अमेरिका ने इस फाइटर प्लेन का इराक में जमकर इस्तेमाल किया। वर्ष 2002 में इराक को सद्दाम हुसैन के चंगुल से छुड़ाने में इसकी अहम भूमिका रही। अमेरिका ने इसका सीरिया सरकार और विद्रोहियों के बीच चल रही जंग में इसका खूब इस्तेमाल किया। वहीं सीरिया सरकार विद्रोह को कुचलने के लिए आम जनता को भी निशाना बना रही है। बीते साल इसी सुपर हॉर्नेट ने ही सीरिया सरकार के एक फाइटर प्लेन सुखोई को मार गिराया था।

इसके अलावा इस फाइटर प्लेन का अफगानिस्तान में तालिबानी आतंकियों को ठिकाने लगाने में भी इस्तेमाल किया जा रहा है।

 

अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया की एयरफोर्स के पास ही है यह प्लेन

अमेरिका के अलावा सिर्फ ऑस्ट्रेलिया की एयरफोर्स के पास यह प्लेन है। ऑस्ट्रेलिया ने वर्ष 2012 में 24 एफ/ए-18एफ सुपर हॉर्नेट हासिल किए थे। अब भारत ऐसा तीसरा देश बन सकता है, जिसके पास यह फाइटर प्लेन होगा।


 

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डोनाल्ड ट्रम्प का फेवरेट है यह फाइटर

अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रम्प ने हाल में इसे अपना फेवरेट फाइटर बताया था। उन्होंने कहा था कि एफ-18 न सिर्फ उनका फेवरेट है, बल्कि यह अपने आप में ‘बेजोड़’ है। ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका इसे खरीदने की योजना बना रहा है, लेकिन इसकी कीमत पर अभी विचार चल रहा है। उन्होंने कहा, ‘हम बोइंग के साथ अच्छी डील करना चाहते हैं।’ हालांकि अमेरिकी सेना पहले से इसका इस्तेमाल कर रही है।  फिलहाल, दुनिया में एक मात्र रॉयल ऑस्ट्रेलियन एयरफोर्स ही सुपर हॉर्नेट का विदेशी कस्टमर है।

 

 

15 साल से वायुसेना में लड़ाकू विमानों की कमी

बता दें कि भारत में बीते 15 साल से नए लड़ाकू विमानों की जरूरत महसूस की जा रही है। कई बार एलान होने पर भी जरूरत की तुलना में सिर्फ तीन-चौथाई जेट ही वायुसेना के पास मौजूद हैं।

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