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अडानी की ये मुराद पूरी कर सकते हैं मोदी, चीन को लगेगा झटका

भारत सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करीबी अरबपतियों में शुमार गौतम अडानी को बड़ी सौगात दे सकती है। अगर ऐसा होता है त

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नई दिल्ली. भारत सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करीबी अरबपतियों में शुमार गौतम अडानी को बड़ी सौगात दे सकती है। अगर ऐसा होता है तो यह चीन के लिए बड़ा झटका साबित होगा। इस फैसले से चीन के एक सेक्टर की कंपनियों की कमर ही टूट जाएगी, वहीं डॉमेस्टिक इंडस्ट्री को बढ़ावा मिलेगा। दरअसल भारत सरकार ने चीन जैसे देशों से इंपोर्ट होने वाले सोलर पावर इक्विपमेंट पर 70 फीसदी की भारी भरकम ड्यूटी लगाने की तैयारी कर रही है।

 

 

वित्त मंत्रालय को भेजी यह सिफारिश

डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सेफगार्ड्स (डीजीएस) ने 5 जनवरी को वित्त मंत्रालय को भेजी सिफारिशों में कहा कि सोलर सेल्स को 'भारत में भारी मात्रा में इंपोर्ट किया जा रहा है और मौजूदा हालात में डॉमेस्टिक इंडस्ट्री को बड़ा झटका लग सकता है या कॉम्पिटीशन में भारतीय प्रोडक्ट पिछड़ सकते हैं।'

 

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लोकल इंडस्ट्री को हो सकता है बड़ा नुकसान

इसमें कहा गया कि 'मौजूद हालात' में तत्काल सेफगार्ड ड्यूटी लगाना जरूरी हो गया है, जिससे लोकल इंडस्ट्री को बड़े नुकसान से बचाया जा सके। सिफारिशों में कहा गया कि अगर यह कदम नहीं उठाए गए तो नुकसान की भरपाई करना मुश्किल हो जाएगा। वित्त मंत्रालय द्वारा डीजीएस की सिफारिशें स्वीकार किए जाने के बाद ही सेफगार्ड ड्यूटी लगाई जाएगी।

 

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अडानी ग्रुप सहित कंपनियों ने उठाई आवाज

दरअसल अडानी ग्रुप सहित 5 डॉमेस्टिक सेल और मॉड्यूल मेकर्स की एसोसिएशन ने देश की सोलर इंडस्ट्री को बचाने के लिए कदम उठाने मांग की थी। इस पर डीजीएस ने सिफारिश की, 'इंपोर्ट हो रहे सोलर सेल्स पर 70 फीसदी की दर से सेफगार्ड ड्यूटी लगाई जानी चाहिए, चाहें ये मॉड्यूल में असेंबल किए जाने वाले इक्विपमेंट हों या पैनल हों।'

 

 

200 दिनों तक के लिए लग सकती है ड्यूटी

यह भी सिफारिश की गई कि सेफगार्ड ड्यूटी 200 दिनों तक के लिए लगाई जाए, 'जिसे डॉमेस्टिक इंडस्ट्री के हितों की रक्षा के लिए न्यूनतम अवधि माना गया है।' ड्यूटी या इंपोर्ट टैक्स पर फैसला लेने से पहले सस्ते इंपोर्ट से हुए नुकसान का आकलन किया जाएगा। इस मुद्दे पर एक पब्लिक हियरिंग भी होगी।

 

 

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लगातार बढ़ रहा है इंपोर्ट

भारत की सोलर सेल्स की सालाना मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी लगभग 3 गीगावाट है, जबकि जरूरत 20 गीगावाट है। डीजीएस ने कहा कि 2014-15 में 1,271 मेगावाट क्षमता के सोलर इक्विपमेंट का इंपोर्ट हुआ था, जो 2015-16 में बढ़कर 4,186 मेगावाट और 2016-17 में 6,375 मेगावाट हो गया।

चालू वित्त वर्ष के दौरान 9,474 मेगावाट का इंपोर्ट हुआ, जबकि घरेलू प्रोडक्शन महज 1,164 मेगावाट रहा।

डीजीएस ने कहा कि 2015-16 में घरेलू प्रोडक्शन की तुलना में इन प्रोडक्ट्स के इंपोर्ट्स की ग्रोथ रेट खासी ज्यादा 1,371 फीसदी रही।

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