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इस वित्त वर्ष में 85315 करोड़ रु अतिरिक्त खर्च करेगी सरकार, संसद से मांगी मंजूरी

नई दिल्ली. सरकार ने मौजूदा वित्त वर्ष में 85,315.30 करोड़ रुपए अतिरिक्त कैश एक्सपेंडिचर के लिए संसद से मंजूरी मांगी है। इसमें से 70 फीसदी जीएसटी लागू होने के बाद हुए नुकसान की भरपाई के लिए राज्यों को दिया जाना है। संसदीय मामलों के राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने 2017-18 के लिए सप्लीमेंट्री डिमांड के चौथे बैच को लोकसभा में रखा।

 

 

कुल 9.08 लाख करोड़ रु खर्च का प्रस्ताव

डॉक्यूमेंट में कहा गया कि 9.08 लाख करोड़ रुपए के ग्रॉस एडिशनल एक्सपेंडिचर के लिए संसद की मंजूरी मांगी गई है, जिसके बाकी हिस्से की भरपाई विभिन्न मंत्रालयों की सेविंग्स से की जाएगी।

इसमें कहा गया, ‘इसमें 85,315 करोड़ रुपए नेट कैश खर्च और ग्रॉस एडिशनल एक्सपेंडिचर के प्रस्ताव शामिल हैं। इसमें बाकी 8.21 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा रकम विभिन्न मंत्रालयों या विभागों से की जाएगी।’

 

राज्यों को की जाएगी नुकसान की भरपाई

कैश एक्सपेंडिचर के अधिकांश हिस्से से जीएसटी लागू होने के साथ ही सेंट्रल सेल्स टैक्स (सीएसटी) खत्म होने  राज्यों को हुए नुकसान की भरपाई की जाएगी।

कुल 61,215.58 करोड़ रुपए डिपार्टमेंट ऑफ रेवेन्यू को दिए जाने हैं, जो 85,315 करोड़ रुपए का लगभग 71 फीसदी है। इसमें से 58,999 करोड़ रुपए से राज्यों को हुए रेवेन्यू लॉस की भरपाई की जाएगी और 1,384 करोड़ रुपए सीएसटी कम्पन्सेशन के तौर पर दिए जाएंगे।

 

विभिन्न स्कीम्स पर खर्च होंगे 15,065.65 करोड़ रु खर्च

इसके अलावा विभिन्न स्कीम्स के अंतर्गत कैपिटल एसेट्स को सहयोग और उनके निर्माण के लिए ग्रांट के तौर पर 15,065.65 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। वहीं 9,260 करोड़ रुपए डिफेंस पेंशन पर खर्च किए जाएंगे और 5,721.90 करोड़ रुपए मार्केट लोन्स और ट्रेजरी बिल्स पर इंटरेस्ट पेमेंट की जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जाएगा।

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