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केन्‍द्र की तय न्‍यूनतम मजदूरी से कम नहीं दे पाएंगे राज्‍य, संसद में आएगा वेज कोड बिल

नई दिल्ली. श्रम मंत्री संतोष गंगवार ने मंगलवार को कहा कि एक संसदीय स्थाई समिति ने पहले लेबर कोड (श्रम संहिता), वेज कोड बिल (मजदूरी संहिता बिल) 2017 पर तैयार हो रही रिपोर्ट को अंतिम रूप दे दिया है। इसके दस्तावेज जमा करा दिए गए हैं और इसे संसद के मानसून सत्र में इसे पारित करने का प्रयास किया जाएगा। इसके बाद केन्‍द्र की तरफ तय न्‍यूनतम मजदूरी से कम कोई भी राज्‍य नहीं दे पाएगा।

 

 

केन्‍द्र सरकार को मिलेगा न्‍यूनतम मजदूरी तय करने का अधिकार

यह कानून केंद्र सरकार को देशभर के विभिन्न क्षेत्रों के लिए एक न्यूनतम मजदूरी (तय मानक के आधार पर) निर्धारित करने का अधिकार देगा। इस बिल के प्रावधानों के मुताबिक केंद्र सरकार की ओर से तय किए गए मानकों से कम मजदूरी दरें राज्य सरकारें नहीं तय कर पाएंगी। अंतरराष्ट्रीय श्रम दिवस के मौके पर एक समारोह के बाद गंगवार ने कहा कि मैंने मजदूरी संहिता विधेयक पर अपनी रिपोर्ट को अंतिम रूप देने के संबंध में समिति के अध्यक्ष से बात की है। उनके अनुसार उन्‍हें बताया गया है कि सब कुछ पूरा हो चुका है और इसे जल्द ही सौंप दिया जाएगा।

 

नौकरियों के नए रास्तों की तलाश

इस बिल का मसौदा (ड्राफ्ट कोड) साल 2017 के दौरान लोकसभा में पेश किया गया था। इसके बाद, इसे जांच के लिए समिति के पास भेजा गया था, जिसकी ओर से इस मानसून सत्र में रिपोर्ट सौंपे जाने की उम्मीद है। यह बिल पेमेंट ऑफ वेजेज एक्ट 1936, मिनिमम वेजेज एक्ट 1949, द पेमेंट ऑफ बोनस एक्ट 1965 और इक्वल रेमुनरेशन एक्ट 1976 को एक कोड में जोड़ना चाहता है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अगर सब कुछ ठीक रहा तो इस बिल को संसद के मानसून सत्र में आगे बढ़ाया जा सकता है।

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