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दाइची केस में दिल्ली HC से सिंह ब्रदर्स को झटका, 3500 करोड़ रु जमा कराने का आदेश

नई दिल्ली. दाइची मामले में फोर्टिस के प्रमोटर और अरबपति बिजनेसमैन सिंह ब्रदर्स को तगड़ा झटका लगा है। दिल्ली हाई कोर्ट ने फोर्टिस की याचिका खारिज की याचिका खारिज करते हुए रैनबैक्सी को बेचने के दौरान जानकारियां छिपाने पर 3,500 करोड़ रुपए जमा कराने का आदेश दिया है। दरअसल जापान की कंपनी दाइची और सिंह ब्रदर्स के बीच रैनबैक्सी को लेकर विवाद चल रहा था।

 

रैनबैक्सी पर मिलावटी दवाएं बेचने के लगे थे आरोप

दाइची सैंक्यो ने आर्बिट्रल अवार्ड को लागू करने के लिए सिंगापुर ट्रिब्यूनल में पिटीशन फाइल की थी और 2016 में केस जीत भी लिया था। जापान की दवा कंपनी ने दलील दी थी कि मलविंदर सिंह और शिविंदर सिंह ने 2008 में रैनबैक्सी बेचते समय उससे कई जानकारियां छिपाई थीं। 2013 में कंपनी अमेरिका में मिलावटी दवाएं बेचने और गलत आंकड़े वितरित करने की दोषी पाई गई थी। उसे 50 करोड़ डॉलर का भुगतान करना पड़ा था। बाद में दाइची से सन फार्मास्युटिकल लिमिटेड ने रैनबैक्सी का अधिग्रहण कर लिया था।

 

 

सिंह ब्रदर्स ने सिंगापुर में भी दायर की है याचिका

सिंह ब्रदर्स ने दिल्ली हाईकोर्ट में दलील दी थी कि भारतीय कानून के तहत आर्बिट्रल अवार्ड को लागू नहीं किया जा सकता। उन्होंने कोर्ट ऑफ अपील ऑफ सिंगापुर में भी इस अवार्ड को अलग से चुनौती दी है।

 

 

फोर्टिस की एसेट बेचने पर लग चुकी है रोक

वहीं सुप्रीम कोर्ट ने भी दाइची की एक अन्य पिटीशन पर सुनवाई करते हुए सिंह ब्रदर्स पर फोर्टिस हेल्थकेयर में अपनी कोई एसेट बेचने से रोक लगा दी थी।

इस खबर के बाद फोर्टिस हेल्थकेयर के स्टॉक में बड़ी गिरावट दर्ज की गई, जो 5.34 फीसदी गिरकर 139.10 रुपए पर बंद हुआ।

 

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