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आंध्र प्रदेश को नहीं मिलेगा स्‍पेशल स्‍टेट का दर्जा, जेटली बोले - भावनाओं से फंड तय नहीं होता

आंध्र प्रदेश को स्‍पेशल स्‍टेट का दर्जा दिए जाने की मांग पर फाइनेंस मिनिस्‍टर अरुण जेटली ने बड़ा बयान दिया है।

Arun Jaitley says Sentiment does not decide quantum of funds

नई दिल्‍ली। आंध्र प्रदेश को स्‍पेशल स्‍टेट का दर्जा दिए जाने की मांग पर फाइनेंस मिनिस्‍टर अरुण जेटली ने बड़ा बयान दिया है। जेटली ने कहा है कि साफ कर दिया है कि मांग के बावजूद आंध्र प्रदेश को स्‍पेशल स्‍टेट का दर्जा नहीं दिया जा सकता लेकिन राज्य को किसी तरह के फंड की कमी नहीं होने दी जाएगी। जेटली ने कहा, 'जब आंध्र प्रदेश का विभाजन हुआ था तब स्‍पेशल स्‍टेट का दर्जा अस्तित्व में था लेकिन 14वें वित्त आयोग ने इस विचार को ही खत्म कर दिया।'

 

- उन्होंने कहा कि विशेष दर्जा वास्तव में नॉर्थ ईस्‍ट के उन राज्यों को मिलता है जिनके पास अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं है।

- जेटली ने कहा कि स्‍पेशल स्‍टेट के दर्जे का यह मतलब नहीं है कि आपको 90/10 के अनुपात का लाभ मिलता है न कि 60/40 का।

- उन्होंने कहा कि 14वें वित्त आयोग के मुताबिक जिन राज्यों को रेवेन्‍यू में घाटा हो रहा था, उन्हें मुआवजा देने की बात की गई थी और आंध्र प्रदेश के मामले में रेवेन्‍यू घाटे को लेकर पहले ही सभी प्रावधानों को पूरा किया जा चुका है।


रेवेन्‍यू घाटा सिर्फ 10 महीनों के लिए 

 

जेटली ने कहा कि रेवेन्‍यू घाटा केवल 10 महीनों के लिए था और पहले दो सालों के लिए टैक्स में छूट दी जा चुकी है। जेटली ने कहा, 'केंद्र का इस मामले में साफ स्टैंड है। राज्य को हमें बताना होगा कि वह इसे कैसे चाहते हैं। केंद्र सरकार ने कभी भी इसके लिए मना नहीं किया है।'

 

इसलिए किया गया वादा 

 

स्‍पेशल स्‍टेट का दर्जा नहीं दिए जाने की स्थिति को समझाते हुए जेटली ने कहा कि आंध्र प्रदेश बंटवारे के खिलाफ था जबकि तेलंगाना विभाजन चाहता था। आंध्र को संसाधनों की हानि उठानी पड़ी। इसलिए उन्हें कुछ मदद दी जानी थी। 'इसलिए आंध्र प्रदेश को स्‍पेशल स्‍टेट के दर्जे का वादा किया गया था।' उन्होंने कहा, 'तब स्‍पेशल स्‍टेट के दर्जे का विचार अस्तित्व में था लेकिन 14वें वित्त आयोग के मुताबिक अब ऐसा कोई दर्जा नहीं दिया जा सकता।'

 

भावनाओं से फंड की राशि तय नहीं होती 

 

इस दौरान जेटली ने राजनीतिक तल्खी को लेकर भी बयान दिया। उन्होंने कहा कि भावनाओं से फंड की राशि तय नहीं होती। उन्होंने कहा, 'राजनीतिक मुद्दे फंड की राशि में बढ़ोतरी नहीं कर सकते क्योंकि सरकार के पास बेशुमार फंड नहीं है। भारत के सभी राज्यों को समान रूप से केंद्र से फंड पाने का अधिकार है। मुझे आंध्र प्रदेश से सहानुभूति है क्योंकि उन्हें विभाजन की वजह से नुकसान उठाना पड़ा है।'

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